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Rex TV India
Latest News टेक्नोलॉजी Digital Newsletter 19 Jun 2026 · 12:04 PM

सुरक्षा के सारे दावे साबित हुए बौने, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर का संकट

प्रतीकात्मक फोटो - Rex TV India (AI)

नई दिल्ली, भारत। देश में आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस, क्लाउड कंप्यूटिंग और उन्नत इंटरनेट सेवाओं के विस्तार के लिए अरबों डॉलर के निवेश को आकर्षित करने की होड़ मची हुई है। इस बीच आई एक वैश्विक रिपोर्ट ने भारत सरकार की चिंता को काफी बढ़ा दिया है। पर्यावरण जोखिमों का आकलन करने वाली मशहूर संस्था एक्सडीआई द्वारा जारी एक ताज़ा विश्लेषण के अनुसार, भारत की अगली पीढ़ी के अत्याधुनिक डेटा सेंटर्स पर मौसम में आ रहे अप्रत्याशित बदलावों का बहुत बुरा असर पड़ने की आशंका जताई गई है, जिससे एक बड़ा डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर का संकट पैदा हो सकता है।[1]

इस गंभीर विषय को लेकर जारी की गई '2026 ग्लोबल एनालिसिस ऑफ प्लान्ड डेटा सेंटर्स फॉर फिजिकल क्लाइमेट रिस्क एंड रेजिलिएंस' रिपोर्ट में दुनिया भर के लगभग दो हजार पांच सौ पचानवे नियोजित डेटा सेंटर्स का गहराई से अध्ययन किया गया है। इसमें सामने आया है कि अब तक हमारा पूरा ध्यान केवल इन सेंटर्स की भारी बिजली खपत और अत्यधिक पानी की जरूरतों पर ही केंद्रित था। लेकिन अब भीषण गर्मी, इंफ्रास्ट्रक्चर को होने वाले सीधे नुकसान और बुनियादी तंत्र की विफलता इस पूरे तकनीकी क्षेत्र के लिए एक बहुत बड़ी चुनौती बनकर उभर रहे हैं। जिसके चलते डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर का संकट पैदा हो सकता है। 

बढ़ता जा रहा है खतरा

मौसम के इस बदलते मिजाज के कारण वैश्विक जोखिम सूचकांक में भारत दुनिया भर में ग्यारहवें स्थान पर पहुंच चुका है। एक्सडीआई के आंकड़ों के मुताबिक, भारत के प्रमुख तकनीकी और निवेश हब माने जाने वाले तमिलनाडु, तेलंगाना और कर्नाटक जैसे राज्य दुनिया के उन शीर्ष तीस उप-राष्ट्रीय क्षेत्रों में शामिल हैं, जहां अत्यधिक तापमान के कारण परिचालन ठप होने का सबसे बड़ा खतरा मंडरा रहा है। यह चेतावनी ऐसे समय में आई है जब भारत खुद को डेटा लोकलाइजेशन और एआई कंप्यूटिंग के सबसे बड़े वैश्विक गंतव्य के रूप में स्थापित कर रहा है।

"अब तक डेटा सेंटर्स को लेकर सारा ध्यान केवल ऊर्जा की मांग और पानी की खपत पर ही लगा रहा. लेकिन भौतिक जलवायु जोखिम अब अपने आप में एक अत्यंत महत्वपूर्ण विचार बनता जा रहा है, जिस पर तुरंत ध्यान देना आवश्यक है." : डॉ कार्ल मैलोन, संस्थापक और प्रमुख, एक्सडीआई

अत्यधिक तापमान का असर

इस विश्लेषण के अनुसार, दक्षिण एशिया, दक्षिण-पूर्व एशिया और पूर्वी एशिया में नियोजित डेटा सेंटर्स का एक बहुत बड़ा हिस्सा इस समय सबसे अधिक पर्यावरणीय जोखिम का सामना कर रहा है। दक्षिण एशिया में लगभग बारह प्रतिशत प्रस्तावित सुविधाएं पहले से ही उच्च जोखिम की श्रेणी में शामिल हैं। उच्च-उत्सर्जन की स्थिति में इस सदी के अंत तक यह खतरा तीन गुना से भी अधिक बढ़ सकता है। भारत के अलावा ब्राजील, मैक्सिको और इंडोनेशिया जैसे देशों में भी तापमान से जुड़ी परिचालन बाधाओं का जोखिम सबसे अधिक आंका गया है।

लगातार बढ़ने वाली यह भीषण गर्मी बाढ़ या तूफान की तरह इमारतों को सीधे तौर पर नष्ट तो नहीं करती, लेकिन यह सर्वरों और तकनीकी उपकरणों की कार्यक्षमता को बेहद कम कर देती है। इससे उपकरणों को ठंडा रखने की लागत काफी बढ़ जाती है और बिजली आपूर्ति ठप होने से सेवाएं अचानक बंद हो जाती हैं। यदि बिजली ग्रिड, दूरसंचार प्रणालियाँ, परिवहन नेटवर्क और जल आपूर्ति जैसे बाहरी तंत्र चरमरा गए, तो डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर का संकट और अधिक विस्फोटक रूप ले लेगा, जिससे उत्पादकता का नुकसान दस गुना तक बढ़ सकता है।

"अब सवाल सिर्फ यह नहीं है कि अगली पीढ़ी का डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर कहां बनाया जाए, बल्कि यह है कि क्या वे संपत्तियां अपने जीवनकाल में आर्थिक रूप से लचीली और चालू रह पाएंगी या नहीं." : डॉ कार्ल मैलोन, संस्थापक और प्रमुख, एक्सडीआई

भविष्य की बड़ी चुनौतियाँ

वैश्विक स्तर पर एआई इंफ्रास्ट्रक्चर के अप्रत्याशित निर्माण के बीच बीमा कंपनियां भी अब इस पर्यावरणीय जोखिम को बहुत गंभीरता से देख रही हैं। स्विस री के अनुमान के मुताबिक, डेटा सेंटर इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े वैश्विक बीमा प्रीमियम का ग्राफ आज के साढ़े दस अरब डॉलर से बढ़कर साल दो हजार तीस तक चौबीस अरब डॉलर के पार पहुंच सकता है। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य के इन खतरों को समय रहते सही इंजीनियरिंग मानकों और सही साइट चयन के निर्णयों से काफी हद तक बदला जा सकता है।

साल दो हजार सैंतालीस तक भारत को एक पूरी तरह विकसित राष्ट्र बनाने के बड़े लक्ष्य को हासिल करने में देश की डिजिटल अर्थव्यवस्था एक मुख्य आधार है। ऐसे में राज्यों के बीच निवेश आकर्षित करने की इस अंधी दौड़ में सुरक्षा मानकों की अनदेखी भारी पड़ सकती है। इस रिपोर्ट के निष्कर्ष यह साफ संकेत देते हैं कि आने वाले समय में इंटरनेट और डेटा सुरक्षा को बनाए रखने के लिए हमें अपने सिस्टम को केवल मांग के अनुरूप नहीं, बल्कि पर्यावरण के अनुकूल भी बनाना होगा ताकि डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर का संकट टल सके।

अस्वीकरण (Disclaimer):

यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसी एवं स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचनात्मक उद्देश्य से किया गया है। देश के डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर, डेटा सेंटर सुरक्षा नीतियों और पर्यावरण मंत्रालयों द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के आधिकारिक विवरण के लिए संबंधित सरकारी विभागों की वेबसाइट का अवलोकन करें। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक उत्तरदायी नहीं हैं।

Rex TV India Author:अजय त्यागी June 19, 2026: 12:04 PM © 2026 Rex TV India Contact @ 91 6376887816 | rextvindia@gmail.com
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