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Rex TV India
Latest News उत्तर प्रदेश Digital Newsletter 23 Jun 2026 · 6:05 PM

राम मंदिर चढ़ावा चोरी प्रकरण: जांच में 25-30 लोगों की भूमिका हुई उजागर

जांच रिपोर्ट सौंपते हुए

अयोध्या, उत्तर प्रदेश। राम मंदिर चढ़ावा चोरी प्रकरण की जांच रिपोर्ट एसआईटी ने मंगलवार सुबह अपर मुख्य सचिव गृह संजय प्रसाद को सौंप दी है। इस प्रारंभिक रिपोर्ट में चढ़ावा चोरी से लेकर कमीशनखोरी के खेल तक के पुख्ता सुबूत शामिल किए गए हैं। एसआईटी ने मंदिर में कर्मचारियों की नियुक्ति और दान राशि की गणना प्रक्रिया में बड़े स्तर पर हेरफेर की आशंका जताई है। रिपोर्ट में कई गवाहों के बयानों का भी जिक्र किया गया है, जो इस पूरे घोटाले की भयावहता को दर्शाते हैं। [विडियो 1]

एसआईटी की कार्रवाई

एसआईटी में शामिल लखनऊ मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत, लखनऊ आईजी रेंज किरन एस और विशेष सचिव वित्त नील रतन ने सुबह करीब 11 बजे शासन पहुंचकर यह गोपनीय जांच रिपोर्ट संजय प्रसाद को दी। अब यह रिपोर्ट मुख्यमंत्री के सामने रखी जाएगी, जिसके बाद ट्रस्ट में बड़े बदलावों और दोषियों पर कार्रवाई की संभावना जताई जा रही है। एसआईटी का स्पष्ट कहना है कि यह केवल एक प्रारंभिक जांच है और अगले दो सप्ताह में विस्तृत जांच पूरी होने पर और भी कई अहम खुलासे सामने आएंगे।

राम मंदिर चढ़ावा चोरी प्रकरण में ट्रस्ट के शीर्ष पदाधिकारियों पर सबसे बड़े सवाल खड़े किए गए हैं। सूत्रों के अनुसार, ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय, अनिल मिश्रा और निर्माण सहायक गोपाल राव का नाम जांच के घेरे में आया है। कुछ पदाधिकारियों की भूमिका को हेरफेर में सक्रिय माना गया है, जबकि अन्य को इस चोरी के प्रति लापरवाही बरतने का दोषी पाया गया है। इन पदाधिकारियों के अलावा उनके करीबियों और रिश्तेदारों, जिनमें टिन्नू यादव और सोम जैसे नाम शामिल हैं, की संदिग्ध गतिविधियों का भी रिपोर्ट में उल्लेख है।

गबन का सिलसिला

राम मंदिर चढ़ावा चोरी प्रकरण की जांच के दौरान यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया कि दान की राशि में गबन का सिलसिला सवा साल से बेरोकटोक चल रहा था। दानपात्रों से रकम निकालने वाले संदिग्ध इसे नियमित रूप से इधर-उधर कर रहे थे। पिछले साल महाकुंभ और इस साल माघ मेले के दौरान जब प्रयागराज से करोड़ों की संख्या में श्रद्धालु अयोध्या पहुंचे, तो चढ़ावे की राशि में भारी बढ़ोतरी हुई। इसी दौरान गिनती करने वाले कर्मचारियों ने एक-एक दिन में 15 लाख रुपये तक पार किए।

राम मंदिर चढ़ावा चोरी प्रकरण में यह खुलासा हुआ कि गबन किसी एक व्यक्ति का काम नहीं था, बल्कि यह नियुक्तियों में भाई-भतीजावाद और प्रक्रियात्मक खामियों का फायदा उठाकर किया गया खेल था। दान की गिनती की जिम्मेदारी स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के माध्यम से एक आउटसोर्सिंग कंपनी को दी गई थी, लेकिन कंपनी में वही लोग रखे गए जिन्हें ट्रस्ट ने तय किया था। टिन्नू नामक व्यक्ति ने अपने प्रभाव से 35 से 40 अपने ही लोगों को नौकरी पर रखवा दिया, जिससे चोरी को अंजाम देना आसान हो गया।

चोरी का तरीका

चोरी का तरीका बेहद शातिराना था। गिनती शुरू करने से पहले सभी दानपात्रों को खोलकर रकम एक जगह इकट्ठा कर ली जाती थी। चूंकि पहले से यह पता नहीं रहता था कि कुल कितनी रकम है, इसलिए कर्मचारी गिनती के दौरान ही बड़ी मात्रा में राशि पार कर देते थे और अंत में बची हुई रकम का ही विवरण दर्ज कर दिया जाता था। सबसे बड़ी चूक यह रही कि ट्रस्ट के अपने लोग होने के कारण इन कर्मचारियों की न तो कोई तलाशी ली जाती थी और न ही कोई सत्यापन किया गया था।

कम वेतन के बावजूद इन कर्मचारियों का मंदिर में डटे रहना यह साबित करता है कि उनका असली उद्देश्य वेतन नहीं बल्कि दान की करोड़ों की रकम थी। बैंक अधिकारियों ने भी ट्रस्ट की सिफारिश के कारण इनकी कार्यप्रणाली पर कोई सवाल नहीं उठाए। वहीं, सीसीटीवी कैमरों की निगरानी और ऑडिट व्यवस्था पूरी तरह से अप्रभावी रही। यद्यपि कैमरों ने घटनाओं को रिकॉर्ड किया, लेकिन रियल-टाइम मॉनिटरिंग न होने के कारण चोरी का तुरंत पता नहीं चला। ट्रस्ट के पूर्व पदाधिकारी महिपाल सिंह ने तो आठ महीने के सीसीटीवी फुटेज डिलीट करने के गंभीर आरोप भी लगाए थे।

अस्वीकरण (Disclaimer):

यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसी एवं स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचनात्मक उद्देश्य से किया गया है। मंदिर ट्रस्ट से संबंधित कानूनी जांच और वित्तीय अनियमितताओं के मामले सरकारी नियमों के अधीन हैं। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक उत्तरदायी नहीं हैं।

Rex TV India Author:अजय त्यागी June 23, 2026: 6:05 PM © 2026 Rex TV India Contact @ 91 6376887816 | rextvindia@gmail.com
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