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Rex TV India
Latest News प्रादेशिक Digital Newsletter 29 Jun 2026 · 10:00 AM

ऐतिहासिक अनुष्ठान के साथ शुरू हुई भगवान जगन्नाथ की स्नान यात्रा

भगवान जगन्नाथ की स्नान यात्रा

पुरी, ओडिशा। देव स्नान पूर्णिमा के पावन अवसर पर पुरी के इस तटीय शहर में लाखों श्रद्धालुओं का भारी हुजूम उमड़ पड़ा। इस विशेष दिन बारहवीं शताब्दी के ऐतिहासिक मंदिर के भीतर भगवान जगन्नाथ और उनके भाई-बहनों का पारंपरिक स्नान अनुष्ठान सोमवार सुबह तड़के संपन्न हुआ। देश के कोने-कोने से आए भक्त इन पूजनीय देवी-देवताओं की एक झलक पाने के लिए अत्यधिक उत्सुक दिखाई दे रहे थे। इस महत्वपूर्ण धार्मिक आयोजन को वार्षिक रथ यात्रा की शुरुआत के रूप में देखा जाता है। [विडियो]

भगवान जगन्नाथ की स्नान यात्रा के इस पावन अवसर पर भगवान बलभद्र, देवी सुभद्रा और भगवान जगन्नाथ को उनके गर्भगृह से पूरे आदर और सम्मान के साथ बाहर निकाला गया। इसके बाद सभी श्रद्धालुओं के सामने मुख्य मंच पर तीनों विग्रहों को पूरी तरह सार्वजनिक रूप से 108 पवित्र कलशों के जल से स्नान कराया गया। इस भव्य दृश्य को देखने के लिए मंदिर परिसर और उसके आसपास जनसैलाब उमड़ पड़ा। इसी पावन दिन प्रसिद्ध रेत कलाकार सुदर्शन पटनायक ने भी पुरी समुद्र तट पर रेत से एक सुंदर कलाकृति बनाकर भगवान जगन्नाथ को अपनी विशेष श्रद्धांजलि अर्पित की।

पौराणिक धार्मिक महत्व

हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार भगवान जगन्नाथ की स्नान यात्रा के इस दिव्य अनुष्ठान का अपना एक विशिष्ट महत्व माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं में देव स्नान पूर्णिमा को भगवान जगन्नाथ के प्राकट्य दिवस अर्थात उनके जन्मदिवस के रूप में बड़े हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। शास्त्रों में उल्लेख मिलता है कि ज्येष्ठ मास की पूर्णिमा तिथि को राजा इंद्रद्युम्न ने पहली बार इन लकड़ी के विग्रहों की स्थापना करवाई थी और उनका महास्नान कराया था। तभी से इस परंपरा का निर्वहन निरंतर किया जा रहा है और इसी कारण से भगवान जगन्नाथ की स्नान यात्रा को सनातन धर्म में एक अत्यंत महत्वपूर्ण और पवित्र त्योहार का दर्जा प्राप्त है।

पौराणिक कथाओं में यह भी वर्णित है कि इस भव्य सामूहिक स्नान के पश्चात अत्यधिक जल से स्नान करने के कारण भगवान बीमार पड़ जाते हैं। इस स्थिति को स्थानीय भाषा में 'अनासर' कहा जाता है जिसके तहत भगवान अगले 15 दिनों तक एक गुप्त कक्ष में विश्राम करते हैं। इस एकांतवास के दौरान किसी भी आम श्रद्धालु को उनके दर्शन करने की अनुमति नहीं होती है। इस अवधि में उन्हें केवल विशेष जड़ी-बूटियों का भोग लगाया जाता है। इसके ठीक बाद भगवान पूरी तरह स्वस्थ होकर अपने भक्तों को दर्शन देते हैं और प्रसिद्ध रथ यात्रा पर निकलते हैं।

अस्वीकरण (Disclaimer): 

यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसियों और स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचनात्मक उद्देश्य से किया गया है। धार्मिक आयोजनों और उनकी पौराणिक मान्यताओं के संदर्भ में विस्तृत अध्ययन के लिए संबंधित धार्मिक ग्रंथों की मदद लें। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक उत्तरदायी नहीं हैं।

Rex TV India Author:अजय त्यागी June 29, 2026: 10:00 AM © 2026 Rex TV India Contact @ 91 6376887816 | rextvindia@gmail.com
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