बीकानेर, राजस्थान (डॉ नासिर अली ज़ैदी)। न्यायालय परिसर में महिला अधिवक्ताओं के लिए पृथक बार रूम की उचित व्यवस्था किए जाने को लेकर वरिष्ठ अधिवक्ता सकीना बानों के नेतृत्व में एक विशेष प्रतिनिधिमंडल ने जिला एवं सत्र न्यायाधीश को महत्वपूर्ण ज्ञापन सौंपा है। सौंपे गए इस पत्र के माध्यम से नए अदालत परिसर में उपलब्ध बार रूम की वर्तमान व्यवस्थाओं में आवश्यक बदलाव करने और महिला वकीलों की मांग के अनुसार उनके बैठने के लिए अलग सुरक्षित कक्ष आरक्षित करने का पुरजोर अनुरोध किया गया है।
वरिष्ठ वकीलों द्वारा सौंपे गए इस आधिकारिक ज्ञापन में साफ तौर पर बताया गया है कि नवनिर्मित न्यायालय परिसर में वर्तमान में दो कॉमन बार रूम तैयार किए गए हैं। इनमें से एक बार रूम भूतल पर और दूसरा पूरी तरह से प्रथम तल पर स्थित है। भूतल पर बने इस कक्ष को न्यायालय प्रशासन ने इस सख्त शर्त के साथ आवंटित किया था कि किसी भी वकील का इस पर कोई स्थायी अधिकार नहीं होगा ताकि सभी लोग जरूरत के अनुसार उपयोग कर सकें।
इसके विपरीत प्रथम तल पर स्थित कॉमन बार रूम में कुछ अधिवक्ताओं ने नियमों को ताक पर रखकर अपनी टेबल और कुर्सियां लगा ली हैं और वहां पूरी तरह से नियमित रूप से अपना कब्जा जमाकर बैठना शुरू कर दिया है। इस अव्यवस्था के कारण न्यायालय परिसर में अपने कार्यों के लिए आने वाली अन्य महिला अधिवक्ताओं को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है जिसके बाद यह महिला वकीलों की मांग जोर पकड़ने लगी है।
अधिवक्ताओं ने अपने इस पत्र में माननीय सर्वोच्च न्यायालय के उन दिशा-निर्देशों का भी विशेष रूप से उल्लेख किया है जिसमें देश की सभी अदालतों में महिला वकीलों के लिए आवश्यक और सम्मानजनक बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने पर विशेष बल दिया गया है। इसके अलावा पुराने कोर्ट परिसर में पूर्व से बना महिला कॉमन रूम इस समय पूरी तरह से उपेक्षित है और वहां कोई पर्याप्त उपयोग भी नहीं किया जा रहा है।
दिन-प्रतिदिन न्यायालयों में महिला वकीलों की मांग और उनकी लगातार बढ़ती संख्या को देखते हुए तथा सुदूर ग्रामीण इलाकों से आने वाली महिला वकीलों के विश्राम की आवश्यकताओं को ध्यान में रखना बेहद आवश्यक हो गया है। इसीलिए प्रतिनिधिमंडल ने कोर्ट प्रशासन से पुरजोर मांग की है कि भूतल या प्रथम तल पर बने दोनों बार रूम में से किसी भी एक बड़े कक्ष को पूरी तरह से केवल महिला अधिवक्ताओं के विश्राम के लिए आरक्षित घोषित किया जाए।
इस महत्वपूर्ण मांग को लेकर जिला न्यायाधीश से मिलने पहुंचे मुख्य प्रतिनिधिमंडल में एडवोकेट सकीना बानों के साथ एडवोकेट हरशन ख़ान, एडवोकेट निशा कादरी और एडवोकेट प्रियंका प्रमुख रूप से मौजूद रहीं। इनके अलावा कोर्ट परिसर में इस व्यवस्था में सुधार के लिए एडवोकेट तारा भाटी, एडवोकेट बेनजीर, एडवोकेट नीलम, एडवोकेट काव्या और एडवोकेट गुरजीत ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराते हुए इस मुहिम को अपना पूर्ण समर्थन दिया।
महिला वकीलों की मांग से जुड़े इस महत्वपूर्ण ज्ञापन की एक मुख्य प्रतिलिपि बार एसोसिएशन बीकानेर के वर्तमान अध्यक्ष को भी आवश्यक कार्रवाई और समर्थन के लिए प्रेषित की गई है। महिला वकीलों का दृढ़ता से कहना है कि इस छोटे से प्रशासनिक बदलाव से उन्हें अदालत परिसर के भीतर कार्य करने के लिए बहुत ही सुरक्षित, सुगम, सम्मानजनक और सुविधाजनक वातावरण प्राप्त हो सकेगा जिससे वे अपने कर्तव्यों का निर्वहन बेहतर ढंग से कर सकेंगी।
अस्वीकरण (Disclaimer):
यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसियों और स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचनात्मक उद्देश्य से किया गया है। किसी भी न्यायिक परिसर में प्रशासनिक व्यवस्थाओं, नियमों में बदलाव या वकीलों की मांगों से जुड़े मामलों पर अंतिम निर्णय के लिए हमेशा संबंधित न्यायालय प्रशासन और बार काउंसिल द्वारा जारी आधिकारिक अधिसूचनाओं को ही सर्वोपरि मानें। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक उत्तरदायी नहीं हैं।
Author:अजय त्यागी
June 30, 2026: 10:00 PM
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