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Rex TV India
Latest News राजस्थान Digital Newsletter 04 Jul 2026 · 4:03 PM

जेके लोन अस्पताल में एचआईवी संक्रमण के आरोपों को प्रबंधन ने नकारा

प्रतीकात्मक फोटो - Rex TV India

कोटा, राजस्थान। जेके लोन अस्पताल में नियमित रूप से ब्लड ट्रांसफ्यूजन कराने वाले दो मासूम बच्चों में एचआईवी की पुष्टि होने के बाद जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया है। थैलसीमिया से पीड़ित बच्चों के परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन पर गंभीर आरोप लगाए हैं जिसके बाद मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल ने तीन सदस्यीय विशेष जांच समिति का गठन किया है। हालांकि अस्पताल के ब्लड ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन विभाग ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए दावा किया है कि उनकी तरफ से जारी किए गए रक्त में किसी भी प्रकार का वायरस मौजूद नहीं था और एचआईवी संक्रमण फैलने की बात पूरी तरह गलत है। [1]

परिजनों का आरोप

पहला मामला एक आठ वर्षीय मासूम बच्ची का है जो पिछले कई सालों से थैलसीमिया के कारण जेके लोन अस्पताल में खून चढ़वा रही थी। परिजनों का कहना है कि साल 2023 में हुई नियमित स्वास्थ्य जांच के दौरान बच्ची पूरी तरह स्वस्थ थी लेकिन हालिया जांच में उसकी रिपोर्ट पॉजिटिव आई है। बच्ची को आखिरी बार बीते साल जून महीने में रक्त दिया गया था जिसके बाद से उसका उपचार दवाओं के माध्यम से जयपुर में किया जा रहा था। परिजनों का सीधा आरोप है कि अस्पताल से मिले रक्त के कारण ही उनकी मासूम बच्ची इस जानलेवा एचआईवी संक्रमण की चपेट में आई है।

ऐसा ही एक दूसरा गंभीर मामला बूंदी जिले के एक तेरह वर्षीय किशोर का सामने आया है जिसके माता-पिता मेहनत मजदूरी का काम करते हैं। हाल ही में जब पीड़ित किशोर के माता-पिता की स्वास्थ्य जांच की गई तो दोनों की रिपोर्ट पूरी तरह से सामान्य आई है। लेकिन जेके लोन अस्पताल से नियमित रूप से खून चढ़वाने वाले उनके बेटे की रिपोर्ट में खतरनाक वायरस की पुष्टि होने के बाद से पूरा परिवार सदमे में है। दोनों ही मामलों में पीड़ित बच्चों को एक ही चिकित्सा संस्थान से रक्त जारी किया गया था जिसके कारण परिजनों का शक गहरा गया है।

अस्पताल की सफाई

चिकित्सालय के ब्लड ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन विभाग के अध्यक्ष ने अस्पताल पर लगे इन सभी आरोपों को पूरी तरह नकारते हुए तकनीकी तथ्यों को सामने रखा है। उनके अनुसार ब्लड बैंक में आने वाले रक्त की कई स्तरों पर बेहद कड़ी और वैज्ञानिक स्क्रीनिंग की जाती है जिससे चिकित्सालय के भीतर किसी भी मरीज में एचआईवी संक्रमण पहुंचने की संभावना न के बराबर रहती है। थैलसीमिया पीड़ितों को दिए जाने वाले रक्त की जांच सबसे विश्वसनीय न्यूक्लिक एसिड टेस्ट यानी नैट पद्धति से की जाती है जो चौथी पीढ़ी की सबसे अचूक तकनीक मानी जाती है।

"नैट तकनीक इतनी उन्नत है कि यह रक्तदाता के शरीर में पिछले कुछ दिनों के भीतर पहुंचे वायरस को भी बेहद आसानी से पकड़ लेती है। इसलिए हमारे ब्लड बैंक से जारी किए गए रक्त के कारण किसी भी मरीज के संक्रमित होने की आशंका पूरी तरह से निराधार और शून्य है।" — डॉ परमेंद्र पचौरी, विभागाध्यक्ष

संक्रमण के स्रोत

चिकित्सकों का तर्क है कि थैलसीमिया पीड़ित बच्चों में इस खतरनाक बीमारी के प्रसार (एचआईवी संक्रमण) के पीछे रक्त संचरण के अलावा कई अन्य माध्यम भी हो सकते हैं। यह मरीज अक्सर अपने लंबे उपचार के दौरान अलग-अलग क्षेत्रों के स्थानीय क्लीनिकों और छोटे अस्पतालों में भी प्राथमिक उपचार के लिए जाते रहते हैं। वहां पर अप्रशिक्षित कर्मचारियों द्वारा उपयोग की गई दूषित सुइयों अथवा आईवी ड्रिप के माध्यम से भी मरीजों के शरीर में वायरस पहुंचने का सबसे बड़ा खतरा बना रहता है और इसे सीधे एचआईवी संक्रमण से जोड़कर देखना जल्दबाजी होगी।

इसके अलावा कई बार मरीज के माता-पिता पूर्व में अन्य स्थानों पर कराए गए इलाज अथवा इंजेक्शन की पूरी जानकारी डॉक्टरों से साझा नहीं करते हैं। इस अधूरी जानकारी के कारण चिकित्सा विशेषज्ञों के लिए भी यह पता लगाना बेहद जटिल हो जाता है कि वायरस वास्तव में किस जगह से फैला है। अस्पताल की अधीक्षक डॉ निर्मला शर्मा ने स्पष्ट किया है कि जांच समिति की विस्तृत रिपोर्ट सामने आने के बाद ही इस पूरे मामले में स्थिति पूरी तरह साफ हो पाएगी और तभी एचआईवी संक्रमण के स्रोत का सच सामने आएगा।

सुरक्षा और जांच की मांग

इस बेहद संवेदनशील और गंभीर मामले के सार्वजनिक होने के बाद स्थानीय सामाजिक संगठनों और पीड़ित परिवारों ने सरकारी अस्पतालों में ब्लड स्क्रीनिंग की व्यवस्था को और अधिक पारदर्शी बनाने की मांग तेज कर दी है। लोगों का कहना है कि बच्चों के जीवन के साथ खिलवाड़ करने वाले एचआईवी संक्रमण के इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए ताकि सच सबके सामने आ सके। इस उच्च स्तरीय तीन सदस्यीय जांच समिति में बाल रोग विभाग की प्रोफेसर अमृता मयंगर, ब्लड ट्रांसफ्यूजन विभाग के हेड डॉ परमेंद्र पचौरी और डॉ मनीष बोहरा शामिल हैं।

मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने आश्वासन दिया है कि इस समिति की रिपोर्ट आने के बाद दोषियों के खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी कदम उठाए जाएंगे। तब तक अस्पताल प्रशासन ने सभी संबंधित विभागों को रक्त प्रबंधन और मरीजों की काउंसलिंग के दौरान अत्यधिक सावधानी बरतने और सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन करने के कड़े निर्देश जारी कर दिए हैं। प्रशासन ने यह भी कहा है कि आम और रूटीन मरीजों के लिए भी अब इसी नैट तकनीक से जांचा हुआ रक्त उपलब्ध कराने का प्रयास किया जाएगा ताकि किसी भी प्रकार के एचआईवी संक्रमण के खतरे को पूरी तरह खत्म किया जा सके।

अस्वीकरण (Disclaimer):

यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसियों और स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचनात्मक उद्देश्य से किया गया है। आरोपों और खंडन के आधार पर कोई निर्णय नहीं लिया जा सकता, मामले में जांच जारी है। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक उत्तरदायी नहीं हैं।

Rex TV India Author:अजय त्यागी July 4, 2026: 4:03 PM © 2026 Rex TV India Contact @ 91 6376887816 | rextvindia@gmail.com
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