बीकानेर, राजस्थान। पशु और मानव स्वास्थ्य को एक-दूसरे से जुड़ा मानने वाली 'वन हेल्थ' अवधारणा को साकार करने की दिशा में विश्व जूनोसिस दिवस के अवसर पर बीकानेर जिले के कोटड़ा गांव में पशु स्वास्थ्य एवं जागरूकता शिविर आयोजित किया गया। इस विशेष शिविर में पशुओं का स्वास्थ्य परीक्षण, ब्रुसेलोसिस की जांच तथा पशुपालकों को पशुजन्य रोगों (जूनोटिक बीमारियों) से बचाव के प्रति जागरूक करने पर विशेष जोर दिया गया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता ए.आर.सी., आईसीएआर-सीएसडब्ल्यूआरआई, बीकानेर की प्रभारी डॉ. निर्मला सैनी ने की। मुख्य अतिथि एस.पी. मेडिकल कॉलेज, बीकानेर के वरिष्ठ प्रदर्शक एवं नेशनल वन हेल्थ प्रोग्राम फॉर प्रिवेंशन एंड कंट्रोल ऑफ जूनोसिस के सह-अन्वेषक (को-पी.आई.) डॉ. दीप शिखर आचार्य रहे।
इसके साथ ही इस महत्वपूर्ण पशु स्वास्थ्य एवं जागरूकता शिविर में प्रधान वैज्ञानिक डॉ. आशीष चोपड़ा, प्रधान वैज्ञानिक डॉ. विजय कुमार, वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. अशोक कुमार, वैज्ञानिक डॉ. सुमनिल मारवाह, वैज्ञानिक डॉ. चेतन पाटिल एन.डी. तथा तकनीकी सहायक राम सिंह की सक्रिय उपस्थिति रही। सभी अतिथियों का ग्रामीण पशुपालकों द्वारा पारंपरिक रूप से स्वागत और अभिनंदन किया गया।
शिविर के दौरान भेड़ों का स्वास्थ्य परीक्षण एवं आवश्यक उपचार किया गया। विभिन्न झुंडों में ब्रुसेलोसिस की आशंका को देखते हुए 50 भेड़ों के रक्त नमूने जांच के लिए एकत्रित किए गए। उपस्थित वैज्ञानिकों और पशु चिकित्सकों ने बताया कि समय पर जांच और निरंतर निगरानी से इस गंभीर रोग की रोकथाम में महत्वपूर्ण सफलता मिल सकती है।
कोटड़ा गांव के इस विशेष पशु स्वास्थ्य एवं जागरूकता शिविर के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में वैज्ञानिक पशुपालन को बढ़ावा देने का संकल्प लिया गया। डॉक्टरों की टीम ने बीमार पशुओं के लिए मौके पर ही आवश्यक दवाइयां और पोषक तत्व भी वितरित किए। पशुपालकों को यह भी समझाया गया कि वे अपने पशुओं के रहने के स्थान पर स्वच्छता का विशेष ध्यान रखें ताकि संक्रमण को फैलने से रोका जा सके।
जागरूकता सत्र में किसानों को ब्रुसेलोसिस सहित अन्य जूनोटिक रोगों की विस्तार से जानकारी देते हुए बताया गया कि ये रोग पशुओं से मनुष्यों में भी फैल सकते हैं। विशेषज्ञों ने गर्भपातित भ्रूण एवं अन्य जैविक अपशिष्टों के सुरक्षित निस्तारण, संक्रमित पशुओं के पृथक प्रबंधन, स्वच्छता बनाए रखने तथा व्यक्तिगत सुरक्षा उपाय अपनाने की आवश्यकता पर बल दिया।
इस व्यापक पशु स्वास्थ्य एवं जागरूकता शिविर के मंच से मुख्य अतिथि डॉ. दीप शिखर आचार्य ने कहा कि ब्रुसेलोसिस एक गंभीर लेकिन रोकथाम योग्य रोग है। पशुपालकों की जागरूकता, समय पर जांच और वैज्ञानिक पशुपालन पद्धतियों को अपनाकर इस संक्रमण के प्रसार को प्रभावी रूप से नियंत्रित किया जा सकता है। उन्होंने किसानों को मानव ब्रुसेलोसिस के लक्षणों, बचाव और उपचार संबंधी महत्वपूर्ण जानकारी भी दी। कार्यक्रम में कुल 45 किसानों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
अस्वीकरण (Disclaimer):
यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसियों और स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचना के उद्देश्य से किया गया है। पशु एवं मानव स्वास्थ्य, जूनोटिक बीमारियों तथा ब्रुसेलोसिस संक्रमण के विधिक व चिकित्सकीय मामलों में नेशनल वन हेल्थ प्रोग्राम, आईसीएआर (ICAR) और स्थानीय पशुपालन विभाग द्वारा समय-समय पर जारी की गई आधिकारिक स्वास्थ्य गाइडलाइंस, प्रयोगशाला रिपोर्ट तथा डॉक्टरों के परामर्श ही अंतिम व सर्वमान्य होंगे। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक किसी भी रूप में उत्तरदायी नहीं होंगे।
Author:अजय त्यागी
July 6, 2026: 9:07 PM
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