मुंबई, महाराष्ट्र। भारतीय रुपये में मंगलवार को शुरुआती कारोबार के दौरान मामूली सुधार देखने को मिला। अधिकांश एशियाई मुद्राओं में आई मजबूती के चलते रुपये को आज बाजार से अच्छा समर्थन मिलने की उम्मीद है। हालांकि विदेशी मुद्रा व्यापारियों का कहना है कि हालिया सत्रों में घरेलू मुद्रा का अंतर्निहित रुख काफी कमजोर हुआ है। पिछले छह सत्रों के दौरान इसमें एक प्रतिशत से अधिक की बड़ी गिरावट देखी गई है जिसके कारण यह पिछले एक महीने में पहली बार बड़े मनोवैज्ञानिक स्तर के करीब पहुंच गया था। [1]
बाजार के जानकारों का मानना है कि कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट और रिजर्व बैंक के प्रयासों से भारतीय रुपये में जो रिकवरी आई थी वह अब पूरी तरह थम चुकी है। आयातक कंपनियों द्वारा की जा रही डॉलर की नियमित मांग और अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा इस साल ब्याज दरों में बढ़ोतरी की आशंकाओं ने रुपये पर दोबारा दबाव बढ़ा दिया है। इस वजह से कूटनीतिक स्तर पर रुपये को रक्षात्मक रुख अपनाने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।
फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति को लेकर बने अनुमानों के बीच डॉलर इंडेक्स में मामूली नरमी आई है। अमेरिका के कमजोर रोजगार आंकड़ों के बाद डॉलर थोड़ा ठंडा जरूर पड़ा है लेकिन इससे भारतीय रुपये को कोई खास राहत नहीं मिली है जो बाजार विश्लेषकों के लिए बड़ी चिंता का विषय है। सामान्य परिस्थितियों में कमजोर डॉलर से रुपये को मजबूती मिलती है लेकिन इस बार ऐसा नहीं होना भारतीय मुद्रा बाजार के लिए एक अप्रत्याशित संकेत माना जा रहा है।
घरेलू मुद्रा को बड़ी गिरावट से बचाने के लिए अब बाजार की नजरें पूरी तरह रिजर्व बैंक के हस्तक्षेप पर टिकी हैं। केंद्रीय बैंक विभिन्न स्तरों पर डॉलर की बिक्री करके रुपये को सहारा देने का लगातार प्रयास कर रहा है। सरकारी बैंकों के माध्यम से बाजार में डॉलर की आपूर्ति बढ़ाने की कोशिश की जा रही है ताकि दबाव को कम किया जा सके। बुधवार को जारी होने वाले फेडरल रिजर्व की बैठक के ब्यौरे से आगे की नीतिगत दिशा तय होगी।
वैश्विक मोर्चे पर अधिकांश एशियाई मुद्राएं आज बढ़त के साथ कारोबार कर रही हैं जिससे क्षेत्रीय बाजारों में थोड़ा सकारात्मक माहौल बना हुआ है। डॉलर इंडेक्स भी इस समय एक निश्चित दायरे में सीमित नजर आ रहा है जिससे अन्य मुद्राओं को संभलने का मौका मिला है। आने वाले दिनों में भारतीय रुपये की चाल काफी हद तक अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों और अमेरिकी केंद्रीय बैंक के ब्याज दर संबंधी कूटनीतिक फैसलों पर निर्भर करेगी।
अस्वीकरण (Disclaimer):
यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसियों और स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचना के उद्देश्य से किया गया है। यह रिपोर्ट विदेशी मुद्रा बाजार के उतार चढ़ाव और भारतीय रुपये की विनिमय दर को प्रभावित करने वाले आर्थिक कारकों को दर्शाती है। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक किसी भी रूप में उत्तरदायी नहीं होंगे।
Author:अजय त्यागी
July 7, 2026: 11:20 AM
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