नई दिल्ली, दिल्ली। ईकॉमर्स दिग्गज फ्लिपकार्ट के खिलाफ भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग में एक नई एंटी ट्रस्ट शिकायत दर्ज कराई गई है जिसमें कंपनी पर चुनिंदा विक्रेताओं को असमान रूप से लाभ पहुंचाने और बाजार में प्रतिस्पर्धा विरोधी तरीके अपनाने के गंभीर आरोप लगाए गए हैं। फोरम फॉर इंटरनेट रिटेलर्स सेलर्स एंड ट्रेडर्स नामक संस्था ने यह शिकायत दर्ज कराई है और आयोग के डायरेक्टर जनरल से इस पूरे मामले की गहन जांच करने की मांग की है जिससे बाजार में छोटे व्यापारियों के हितों की रक्षा की जा सके। [1]
शिकायत में दावा किया गया है कि फ्लिपकार्ट विदेशी निवेशकों की पूंजी का इस्तेमाल करके देश के चौदह लाख से अधिक सामान्य विक्रेताओं को भारी नुकसान पहुंचा रहा है। कंपनी महज तैंतीस चुनिंदा सेलर्स को बाजार मूल्य से काफी कम कीमत पर सामान उपलब्ध करा रही है। इन विशेष सेलर्स में ओमनीटेक रिटेल, सुपरकॉम नेट और ट्रूकॉम रिटेल जैसे बड़े नाम शामिल हैं जो फिर इसी माल को फ्लिपकार्ट के प्लेटफॉर्म पर अन्य आम विक्रेताओं की तुलना में बेहद सस्ते दामों पर बेचते हैं।
इस पूरी व्यापारिक व्यवस्था के कारण आम दुकानदारों के लिए बाजार में टिके रहना मुश्किल हो गया है। फ्लिपकार्ट के खिलाफ शिकायत दर्ज होने के बाद यह बात सामने आई है कि चुनिंदा सेलर्स को मिलने वाली इस बड़ी छूट के कारण ही सामान्य रिटेलर्स को ऑनलाइन मार्केट से बाहर धकेला जा रहा है। छोटे व्यापारियों की संस्था ने इस नीति को पूरी तरह से प्रतिस्पर्धा विरोधी और छोटे व्यवसायों को जानबूझकर खत्म करने की एक सोची समझी कॉर्पोरेट रणनीति करार दिया है।
संस्था ने अपनी शिकायत में गंभीरता से यह भी कहा है कि फ्लिपकार्ट ने अपने पूरे कामकाज का ढांचा इस तरह तैयार कर रखा है कि वह नियमों को ताक पर रख सके। असल में वह इन्वेंट्री बेस्ड मॉडल पर काम करता है लेकिन कानूनी कागजों और दिखावे के लिए खुद को सिर्फ एक मार्केटप्लेस बताता है। शिकायतकर्ता के अनुसार बाजार दर से नीचे सामान बेचने के लिए जरूरी भारी धनराशि पैरेंट कंपनी वॉलमार्ट से आती है और इसके साथ ही गलत तरीके से टैक्स लाभ भी उठाए जा रहे हैं।
विदेशी फंडिंग और टैक्स चोरी के इन आरोपों ने सरकार की विदेशी निवेश नीति पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। फ्लिपकार्ट के खिलाफ शिकायत के बाद यह स्पष्ट होता जा रहा है कि इस मार्केटप्लेस के मुखौटे के पीछे असली नियंत्रण कंपनी खुद ही संभाल रही है। इससे देश के घरेलू खुदरा बाजार का संतुलन पूरी तरह बिगड़ रहा है और कानून की कमियों का फायदा उठाकर घरेलू नियमों को सीधे तौर पर ठेंगा दिखाया जा रहा है।
शिकायत में एक और गंभीर दावा किया गया है कि फ्लिपकार्ट ने जीएसटी छूट का गलत तरीके से फायदा उठाया है। कंपनी ने इसके जरिए हर साल करीब तीन हजार करोड़ रुपये का एक खुद ब खुद भरने वाला सब्सिडी पूल तैयार कर लिया है। यह फ्लिपकार्ट के खिलाफ शिकायत सिर्फ मुख्य कंपनी तक ही सीमित नहीं है बल्कि इसकी पैरेंट कंपनी वॉलमार्ट और मिंत्रा लॉजिस्टिक्स व ईकार्ट लॉजिस्टिक्स जैसी सहयोगी कंपनियों के खिलाफ भी की गई है जिससे इसकी व्यापकता का पता चलता है।
सेबी में पंजीकृत इंडिया एसएमई फोरम की इस पहल के बाद अब बड़ी ईकॉमर्स कंपनियों की जांच तेज होने की उम्मीद है। फ्लिपकार्ट के खिलाफ शिकायत ने यह साफ कर दिया है कि बड़ी लॉजिस्टिक्स कंपनियां और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म मिलकर एक ऐसा तंत्र चला रहे हैं जो छोटे उद्यमियों को आगे बढ़ने से रोकता है। आने वाले दिनों में प्रतिस्पर्धा आयोग की इस रिपोर्ट पर होने वाली कार्रवाई देश के संपूर्ण खुदरा डिजिटल व्यापार की दिशा और दशा को पूरी तरह से तय करेगी।
अस्वीकरण (Disclaimer):
यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसियों और स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचना के उद्देश्य से किया गया है। ईकॉमर्स कंपनियों की व्यापारिक नीतियां और उन पर नियामक आयोग की जांच की कार्रवाई पूरी तरह से सरकारी मानकों के अधीन हैं। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक किसी भी रूप में उत्तरदायी नहीं होंगे।
Author:अजय त्यागी
July 11, 2026: 4:19 PM
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