जम्मू, जम्मू और कश्मीर: जम्मू कश्मीर पुलिस की काउंटर इंटेलिजेंस विंग ने अलगाववादी नेताओं का महिमामंडन करने और आपत्तिजनक सामग्री शामिल करने वाली दो विवादास्पद पुस्तकों के प्रकाशन के मामले में एक बड़ी सफलता हासिल की है। इस गंभीर सुरक्षा उल्लंघन की जांच के सिलसिले में रविवार को देश के विभिन्न हिस्सों से तीन प्रकाशक गिरफ्तार किए गए हैं। इन व्यक्तियों पर राष्ट्र विरोधी सामग्री को सरकारी शिक्षण संस्थानों में बढ़ावा देने का गंभीर आरोप है। सुरक्षा एजेंसियां इस पूरे नेटवर्क की कड़ाई से पड़ताल कर रही हैं। [1]
जो तीन प्रकाशक गिरफ्तार हुए हैं उनकी पहचान ओबेरॉय बुक सर्विस बहू प्लाजा जम्मू के इंद्रपॉल और नोएडा स्थित डोमिनेंट पब्लिशर्स के अमरदीप सिंह और गिरीश अरोड़ा के रूप में की गई है। इन आरोपियों की गिरफ्तारी काउंटर इंटेलिजेंस यूनिट द्वारा चार जुलाई को दर्ज की गई एक प्रथम सूचना रिपोर्ट के आधार पर की गई है। इस कानूनी मामले में भारतीय न्याय संहिता और गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत देश की संप्रभुता को खतरे में डालने के आरोप शामिल हैं।
यह पूरी जांच तब शुरू हुई जब प्रशासन को शिकायतें मिलीं कि सरकारी स्कूल की पुस्तकालयों में उपलब्ध दो पुस्तकें अलगाववादी विचारधारा को बढ़ावा दे रही हैं। जांच के दायरे में आई पहली पुस्तक का नाम पर्सनैलिटीज एंड लीजेंड्स ऑफ जेएंडके है जिसे हिलाल अहमद और संतोष मीणा ने लिखा है। दूसरी विवादित पुस्तक सुशांत गिरी द्वारा लिखित ग्रेट पर्सनैलिटीज ऑफ जम्मू एंड कश्मीर है। अधिकारियों ने बताया कि इन आपत्तिजनक पुस्तकों की प्रतियां कई जिलों के सरकारी स्कूलों में बांटी गई थीं।
सरकारी दस्तावेजों के अनुसार एक पुस्तक की एक सौ तेईस प्रतियां जम्मू रामबन और उधमपुर के स्कूलों में भेजी गई थीं जबकि दूसरी पुस्तक की एक सौ अट्ठाईस प्रतियां जम्मू और बारामूला के पुस्तकालयों में वितरित की गई थीं। खुफिया विंग द्वारा प्रकाशकों के परिसरों पर की गई छापेमारी के दौरान भारी मात्रा में कागजी रिकॉर्ड और डिजिटल सामग्री जब्त की गई है। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि तीन प्रकाशक गिरफ्तार किए गए हैं और तीनों व्यक्तियों से गुप्त ठिकानों पर कड़ाई से पूछताछ की जा रही है।
इस बड़े विवाद के सामने आने के बाद उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने कड़ी प्रशासनिक कार्रवाई करते हुए स्कूल शिक्षा विभाग के आठ कर्मचारियों को तुरंत निलंबित कर दिया है। इसके साथ ही एक संविदा कर्मचारी की सेवाएं समाप्त कर दी गई हैं और पूरे मामले की जांच के लिए उच्च स्तरीय समिति का गठन किया गया है। शिक्षा विभाग ने इन पुस्तकों की सामग्री को अत्यधिक अनुचित पाते हुए इन्हें सभी सरकारी स्कूलों की लाइब्रेरी से तुरंत वापस लेने का सख्त आदेश जारी किया है।
इस कृत्य के बाद राज्य के राजनीतिक हलकों में भी भारी आक्रोश देखा जा रहा है। भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस सहित कई प्रमुख राजनीतिक दलों ने इस देश विरोधी कृत्य की कड़े शब्दों में निंदा की है। विभिन्न कूटनीतिक संगठनों ने मांग की है कि राष्ट्र की अखंडता से खिलवाड़ करने वाले ऐसे तत्वों को समाज में बेनकाब किया जाना चाहिए और भविष्य में इस प्रकार की संवेदनशील चूक को रोकने के लिए पुख्ता प्रबंध किए जाने चाहिए।
पुलिस प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि वे इस आपराधिक साजिश के पीछे छिपे अन्य चेहरों को भी बेनकाब करने के लिए निरंतर प्रयासरत हैं। सरकारी तंत्र की लापरवाही की भी गहनता से समीक्षा की जा रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि यह सामग्री इतने लंबे समय तक सुरक्षा जांच से कैसे बची रही। इस विवादित वितरण के मुख्य स्रोतों तक पहुंचने के लिए कानूनी कार्रवाई के तहत तीन प्रकाशक गिरफ्तार किए गए हैं ताकि देश की एकता अक्षुण्ण बनी रहे।
अस्वीकरण (Disclaimer):
यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसियों और स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचना के उद्देश्य से किया गया है। जम्मू कश्मीर में विवादित पुस्तकों की जब्ती, प्रकाशकों की गिरफ्तारी और शिक्षा विभाग द्वारा की गई कर्मचारियों की बर्खास्तगी के संबंध में नए कानूनी विवरण संभव हैं। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक किसी भी रूप में उत्तरदायी नहीं होंगे।
Author:अजय त्यागी
July 12, 2026: 3:52 PM
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