वाशिंगटन। अमेरिका और ईरान के बीच हुए ताजा सैन्य हमलों के बाद वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतें अचानक तीन प्रतिशत से अधिक उछल गईं। आईएएनएस की एक रिपोर्ट के अनुसार, इस नए भू राजनीतिक तनाव के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य से होने वाली वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति में बड़ी बाधा आने की आशंका बढ़ गई है। अमेरिकी क्रूड वायदा बढ़कर तिहत्तर डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया जबकि अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड भी तेजी से बढ़ते हुए अठहत्तर डॉलर प्रति बैरल के स्तर को पार कर गया है। [1]
यह भारी आर्थिक उछाल ईरान के खिलाफ अमेरिकी सेना द्वारा किए गए हमलों के सिलसिले के बाद देखने को मिला है। इन हमलों का मुख्य उद्देश्य वाणिज्यिक जहाजों पर होने वाले खतरों को रोकना था। अमेरिकी सेंट्रल कमांड यानी सेंटकॉम ने बयान जारी कर बताया कि कमांडर इन चीफ के निर्देश पर ईरानी सेना को जवाबदेह ठहराने के लिए यह कार्रवाई की गई है। वॉल स्ट्रीट जर्नल के अनुसार यह चौबीस घंटों में अमेरिकी हमलों की तीसरी बड़ी लहर थी जिसमें मिसाइल प्रणालियों और हथियारों के ठिकानों को निशाना बनाया गया।
ईरानी बलों ने भी इस सैन्य कार्रवाई के दौरान वाणिज्यिक जहाजों पर गोलीबारी की जिसके जवाब में अमेरिकी विमानों ने एक ईरानी क्रूज मिसाइल और ड्रोन को मार गिराया। ईरान ने इस तनावपूर्ण स्थिति के बाद होर्मुज जलमार्ग को पूरी तरह बंद करने का दावा किया था लेकिन सेंटकॉम ने इस दावे को खारिज करते हुए कहा कि जहाजों की आवाजाही कानूनी रूप से जारी है। इस युद्ध जैसी स्थिति के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें लगातार अस्थिर बनी हुई हैं जिससे वैश्विक व्यापारिक समुदाय में चिंता व्याप्त है।
समुद्री खुफिया एजेंसी विंडवर्ड ने इस तनाव के बीच भी कुछ जहाजों के गुजरने की पुष्टि की है और जहाजों को अत्यधिक सतर्क रहने की सलाह दी गई है। हालांकि युद्ध शुरू होने के बाद से इस मार्ग पर जहाजों की सामान्य संख्या में भारी गिरावट आई है। केपलर के आंकड़ों के अनुसार जहां पहले प्रतिदिन एक सौ तीस से अधिक जहाज यहां से गुजरते थे वहीं अब यह संख्या घटकर बेहद कम रह गई है जिससे तेल आपूर्ति को लेकर बाजार का भरोसा बहुत तेजी से कम हुआ है।
फॉक्स न्यूज ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि अमेरिकी सेना ने अपने रातोंरात चले ऑपरेशनों में ईरान के लगभग एक सौ चालीस ठिकानों को भारी नुकसान पहुंचाया है। इसके जवाब में ईरान ने भी खाड़ी देशों में जवाबी हमले किए हैं जिससे कुवैत की सीमा चौकियों और एक अपतटीय तेल प्लेटफॉर्म को भी नुकसान पहुंचा है। मध्य पूर्व के इस भीषण सैन्य संकट ने पूरी दुनिया को हिलाकर रख दिया है जिसके सीधे परिणाम स्वरूप वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें लगातार नया रिकॉर्ड बना रही हैं।
अस्वीकरण (Disclaimer):
यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसियों और स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचना के उद्देश्य से किया गया है। प्रस्तुत समाचार अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य संघर्ष तथा वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें बढ़ने की घटना से संबंधित है। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक किसी भी रूप में उत्तरदायी नहीं होंगे।
Author:अजय त्यागी
July 13, 2026: 12:30 PM
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