वाशिंगटन। इसराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने ईरान के साथ परमाणु समझौता करने के अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के प्रयासों का पुरजोर समर्थन किया है। आईएएनएस की एक रिपोर्ट के अनुसार, नेतन्याहू ने कहा कि इसराइल अब रक्षा क्षेत्र में पूरी तरह आत्मनिर्भर हो रहा है जिसके चलते वह धीरे-धीरे अमेरिकी सैन्य सहायता में कटौती करने के ऐतिहासिक कदम की ओर आगे बढ़ेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि अमेरिका बातचीत के माध्यम से रास्ता तलाश रहा है लेकिन जरूरत पड़ने पर तेहरान के खिलाफ सैन्य बल का उपयोग करने के लिए भी तैयार है। [1]
नेतन्याहू ने एक टीवी इंटरव्यू में बताया कि ट्रम्प ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर समझौता करना चाहते हैं लेकिन यदि ईरान अपनी प्रतिबद्धताओं का उल्लंघन करता है तो अमेरिकी राष्ट्रपति सैन्य बल का उपयोग करने में संकोच नहीं करेंगे। आईएएनएस की एक रिपोर्ट के अनुसार, ट्रम्प ने अलग से दिए इंटरव्यू में कहा कि ईरान एक आदर्श समझौते पर सहमत हो गया था लेकिन फिर उसने एक जहाज पर ड्रोन दाग दिया। ट्रम्प ने पुष्टि की कि होर्मुज जलडमरूमध्य खुला है और अमेरिका ने रात भर में ईरान के खिलाफ नए हमले किए हैं।
नेतन्याहू ने कहा कि इसराइल अमेरिका के साथ अपनी सैन्य साझेदारी के लिए बेहद आभारी है। इन संयुक्त अभियानों ने ईरान के परमाणु और मिसाइल कार्यक्रमों से उत्पन्न तत्काल खतरे को पीछे धकेल दिया है। अमेरिकी समर्थन ने न केवल इसराइल बल्कि पूरे पश्चिम और अमेरिका को भी सुरक्षित किया है। इस मजबूत सुरक्षा तंत्र के विकसित होने के कारण ही अब इसराइल अमेरिकी सैन्य सहायता में कटौती करने की स्थिति में आ सका है जिससे दोनों देशों के बीच नए रक्षा आयाम स्थापित होंगे।
नेतन्याहू ने क्लिंटन ओबामा और ट्रम्प के राष्ट्रपतित्व काल के दौरान हुए समझौतों का जिक्र करते हुए कहा कि हम अब उस उम्र में आ चुके हैं जहां इस सैन्य सहायता में कटौती करने की प्रक्रिया को शुरू कर इसे शून्य पर लाया जा सकता है। उन्होंने दिवंगत सीनेटर लिंडसे ग्राहम को याद किया जिन्होंने हमेशा इसराइली बैलिस्टिक मिसाइल रक्षा के लिए बड़े अमेरिकी समर्थन की वकालत की थी। ग्राहम का मानना था कि इसराइल को दी जाने वाली सैन्य मदद खुद अमेरिकी सुरक्षा हितों की रक्षा करती है।
संयुक्त राष्ट्र और वैश्विक समुदाय भी मध्य पूर्व के इस बदलते घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए है। इसराइल का आत्मनिर्भर बनने का यह नया संकल्प वैश्विक राजनीति में बड़े रणनीतिक बदलाव के संकेत दे रहा है। नेतन्याहू ने स्पष्ट किया कि सहायता कम होने के बाद भी दोनों देशों की आपसी समझ और खुफिया सहयोग पहले की तरह ही मजबूत बने रहेंगे। इस पूरी रक्षा नीति के लागू होने से आने वाले समय में वैश्विक स्तर पर हथियारों की खरीद और सामरिक संधियों में व्यापक बदलाव देखने को मिल सकते हैं।
अस्वीकरण (Disclaimer):
यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसियों और स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचना के उद्देश्य से किया गया है। प्रस्तुत समाचार अमेरिका और इसराइल के बीच रक्षा संबंधों परमाणु समझौते के प्रयासों और सैन्य सहायता के विषय से संबंधित है। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक किसी भी रूप में उत्तरदायी नहीं होंगे।
Author:अजय त्यागी
July 13, 2026: 12:54 PM
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