वाशिंगटन, डिस्ट्रिक्ट ऑफ कोलंबिया। अमेरिका ने इंटरनेशनल कोर्ट (आईसीसी) को निशाना बनाते हुए एक बड़ा सरकारी अभियान शुरू कर दिया है। आईएएनएस की एक रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी विदेश विभाग इस आईसीसी विरोधी अभियान का नेतृत्व कर रहा है। इसके तहत इंटरनेशनल कोर्ट का समर्थन करने वाले देशों पर कड़े प्रतिबंध और राजनयिक दबाव बनाने की तैयारी है। ट्रंप प्रशासन का मानना है कि यह अंतरराष्ट्रीय न्यायिक संस्था अमेरिकी संप्रभुता के लिए बड़ा खतरा है। इसी वजह से अमेरिका ने अब इस वैश्विक अदालत के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए कड़े कदम उठाने का निर्णय लिया है। [1]
अमेरिकी प्रशासन इस नए अभियान के अंतर्गत विभिन्न विकल्पों पर गंभीरता से विचार कर रहा है। इसमें यात्रा प्रतिबंध और वीजा रद्द करना तथा अदालत से जुड़े संगठनों के खिलाफ वित्तीय कार्रवाई शामिल है। अमेरिकी विदेश मंत्री और राजदूत दुनिया भर की सरकारों से संपर्क साध रहे हैं ताकि इस अदालत को राजनयिक रूप से बिल्कुल अलग थलग किया जा सके। अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि इसके जरिए वे उन सभी देशों को अंतिम चेतावनी दे रहे हैं जो इस अदालत का लगातार सहयोग कर रहे हैं।
वे उन सभी सहयोगी देशों पर भी मुख्य रूप से ध्यान केंद्रित कर रहे हैं जो अमेरिका के मजबूत सुरक्षा कवच का लाभ उठाते हैं। अमेरिका का मानना है कि इंटरनेशनल कोर्ट उनकी संप्रभुता के खिलाफ काम कर रहा है और इसे रोकने के लिए वे हर संभव प्रयास करेंगे। वाशिंगटन की इस नई नीति से कई देशों के संबंधों में बड़ी खटास आ सकती है क्योंकि ट्रंप प्रशासन अब अपने कदम पीछे खींचने के मूड में बिल्कुल नहीं है।
जो देश अमेरिकी सुरक्षा और कानून व्यवस्था के सहयोग पर निर्भर हैं, उन्हें स्पष्ट चेतावनी दी गई है। अमेरिका चाहता है कि ये देश अमेरिकी सैनिकों पर मुकदमा चलाने के इस अदालत के अधिकार को पूरी तरह खारिज करें। अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि जो देश अमेरिकी वित्तीय सहायता का लाभ उठा रहे हैं और फिर भी इस अदालत का समर्थन करते हैं, उन पर आने वाले दिनों में कड़ी निगरानी रखी जाएगी और उनकी मदद भी रोकी जा सकती है।
ट्रंप प्रशासन ने अब साफ संकेत दिया है कि वे आने वाले समय में अपने इस कड़े विरोध को और अधिक तेज करने वाले हैं। अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि वे तब तक चैन से नहीं बैठेंगे जब तक इंटरनेशनल कोर्ट उनके नागरिकों के लिए खतरा बना रहेगा। वैश्विक स्तर पर हो रहे इस बड़े राजनयिक बदलाव के दूरगामी परिणाम होंगे और कई देश अब अमेरिका के इस नए रुख के अनुसार अपनी विदेश नीति बदलने पर गंभीरता से विचार कर रहे हैं।
अस्वीकरण (Disclaimer):
यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसियों और स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचना के उद्देश्य से किया गया है। यह रिपोर्ट अमेरिका और अंतरराष्ट्रीय न्यायालय के बीच बढ़ते राजनयिक तनाव के विषय से संबंधित है। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक किसी भी रूप में उत्तरदायी नहीं होंगे।
Author:अजय त्यागी
July 14, 2026: 11:34 AM
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