सीकर, राजस्थान। राज्य कर्मचारी का दर्जा पाने और न्यूनतम मासिक वेतन छब्बीस हजार रुपए करने की मांग को लेकर मंगलवार को जिला मुख्यालय पर बड़ा आंदोलन देखने को मिला। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार राजस्थान आंगनबाड़ी कार्यकर्ता एवं सहायिका यूनियन सीटू के बैनर तले कार्यकर्ताओं ने विशाल रैली निकाली। यह रैली कलेक्ट्रेट पहुंचकर एक बड़े विरोध प्रदर्शन में बदल गई। आंदोलनकारियों ने मुख्यमंत्री और उप मुख्यमंत्री के नाम जिला कलेक्टर को अपनी बारह सूत्रीय मांगों का ज्ञापन सौंपकर न्याय की गुहार लगाई है। कलेक्ट्रेट परिसर के सामने आंगनबाड़ी कर्मियों का प्रदर्शन कई घंटों तक जारी रहा। [1]
आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने विभाग पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि महिला एवं बाल विकास विभाग के निर्धारित कार्यों के अलावा उन्हें अन्य विभागों के काम भी जबरन सौंपे जा रहे हैं। यूनियन की वरिष्ठ पदाधिकारी विमला ने कहा कि कार्यकर्ताओं से बीएलओ, जनगणना, सेनेटरी नैपकिन वितरण और कई तरह के ऑनलाइन कार्य करवाए जा रहे हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री के कार्यक्रमों में खाली कुर्सियों को भरने और भीड़ बढ़ाने के लिए कार्यकर्ताओं को बिना यूनिफार्म के बसों में भरकर ले जाया जाता है।
अतिरिक्त जिम्मेदारियों के कारण कार्यकर्ताओं पर काम का बोझ लगातार बढ़ रहा है जिससे उनका मूल कार्य प्रभावित हो रहा है। उन्होंने सरकार से मांग की है कि सेनेटरी नैपकिन वितरण और उड़ान योजना से जुड़े सभी ऑनलाइन कार्य आंगनबाड़ी कर्मियों से तुरंत बंद करवाए जाएं। विभाग के अलावा किसी भी अन्य सरकारी या गैर सरकारी कार्य में उनकी ड्यूटी बिल्कुल न लगाई जाए। इन सभी शोषणकारी नीतियों के खिलाफ ही जिला मुख्यालय पर यह आंगनबाड़ी कर्मियों का प्रदर्शन किया जा रहा है।
यूनियन के प्रतिनिधि कमल चौधरी ने बताया कि इस ज्ञापन के माध्यम से बारह सूत्रीय मांगें सरकार के समक्ष मजबूती से रखी गई हैं। इन मांगों में प्रदेश की सभी आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को स्थायी सरकारी कर्मचारी घोषित करने तथा न्यूनतम छब्बीस हजार रुपए प्रतिमाह वेतन देने की मांग सबसे प्रमुख है। इसके अलावा ऑनलाइन कार्य करने के लिए विभाग द्वारा गुणवत्तापूर्ण मोबाइल फोन और इंटरनेट डाटा का पूरा खर्च उपलब्ध कराने की बात भी कही गई है।
कार्यकर्ताओं ने आंगनबाड़ियों के निजीकरण पर पूरी तरह रोक लगाने और बच्चों के लिए नियमित एवं गुणवत्तापूर्ण पोषाहार उपलब्ध कराने की भी मांग उठाई है। इसके साथ ही उन्होंने सेवानिवृत्ति के समय दस लाख रुपए की ग्रेच्युटी और हर महीने दस हजार रुपए मासिक पेंशन देने की मांग को भी पुरजोर तरीके से उठाया है। सरकार की अनदेखी के कारण ही आज पूरे प्रदेश में आंगनबाड़ी कर्मियों का प्रदर्शन लगातार उग्र होता जा रहा है और महिलाएं सड़कों पर उतर आई हैं।
कार्यकर्ताओं ने केंद्र सरकार द्वारा लाए गए चारों लेबर कोड को पूरी तरह मजदूर विरोधी बताते हुए उन्हें वापस लेने की मांग की है। इसके साथ ही मानदेय का एकमुश्त भुगतान करने और आगामी राष्ट्रीय जनगणना अभियान में आंगनबाड़ी कर्मियों की ड्यूटी नहीं लगाने की भी बात कही गई है। प्रदर्शनकारी महिलाओं ने साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि उनकी इन जायज मांगों पर सरकार ने जल्द ही कोई सकारात्मक निर्णय नहीं लिया, तो आने वाले समय में प्रदेश स्तर पर बड़ा आंदोलन शुरू किया जाएगा।
यूनियन नेताओं ने कहा कि रैलियों में भीड़ बढ़ाने के लिए उनका इस्तेमाल बंद होना चाहिए और उन्हें उनका असली हक मिलना चाहिए। प्रशासनिक अधिकारियों को ज्ञापन सौंपने के बाद कार्यकर्ताओं ने शांतिपूर्ण तरीके से अपना धरना समाप्त किया लेकिन सरकार को चेतावनी दी कि उनकी चुप्पी को कमजोरी न समझा जाए। कलेक्ट्रेट के सामने हुआ यह आंगनबाड़ी कर्मियों का प्रदर्शन इस बात का साफ संकेत है कि यदि जल्द ही मानदेय और अधिकारों पर फैसला नहीं हुआ तो पूरी व्यवस्था ठप हो जाएगी।
अस्वीकरण (Disclaimer):
यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसियों और स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचना के उद्देश्य से किया गया है। यह रिपोर्ट राजस्थान में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के बारह सूत्रीय मांग पत्र, कलेक्ट्रेट पर प्रदर्शन और यूनियन की मांगों से संबंधित है। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक किसी भी रूप में उत्तरदायी नहीं होंगे।
Author:अजय त्यागी
July 14, 2026: 4:48 PM
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