कोटा, राजस्थान (राहुल पारीक)। विश्व प्रसिद्ध बूंदी चित्र शैली को अब अकादमिक पहचान देने की दिशा में विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा एक महत्वपूर्ण पहल की गई है। पारंपरिक कला के संरक्षण, संवर्धन और नई पीढ़ी को इससे जोड़ने के उद्देश्य से कोटा विश्वविद्यालय में विश्वविख्यात बूंदी एवं कोटा चित्र शैली कोर्स प्रारंभ करने की तैयारी शुरू कर दी गई है। इस संबंध में विश्वविद्यालय में कुलगुरु प्रो. बी.एल. सारस्वत की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई जिसमें इस नए शैक्षणिक पाठ्यक्रम की रूपरेखा और उसके व्यावहारिक पक्षों पर विस्तार से चर्चा की गई।
बैठक को संबोधित करते हुए कुलगुरु प्रो. बी.एल. सारस्वत ने कहा कि भारतीय पारंपरिक कलाएं देश की सांस्कृतिक धरोहर हैं। विश्वविद्यालय का यह परम दायित्व है कि उन्हें केवल संग्रहालयों तक सीमित न रखकर नियमित उच्च शिक्षा और शोध का हिस्सा बनाया जाए। उन्होंने कहा कि बूंदी चित्र शैली को पाठ्यक्रम में शामिल करने से विद्यार्थियों को अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का अध्ययन करने का अवसर मिलेगा। इससे स्थानीय कलाकारों के अनुभव और कौशल को भी एक बड़ा अकादमिक मंच प्राप्त होगा।
कुलगुरु ने विश्वास व्यक्त किया कि यह नई पहल कला के संरक्षण के साथ-साथ रोजगार एवं स्वरोजगार के अनेक नए अवसर भी सृजित करेगी। बैठक में बूंदी जिला कलक्टर हरफूल सिंह यादव, विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार मुरलीधर प्रतिहार तथा चित्रकला विभाग की प्रोफेसर डॉ. शालिनी भारती ने कलाकारों के साथ विस्तृत विचार-विमर्श किया। इस दौरान नवीन चित्र शैली कोर्स और इसके अंतर्गत डेढ़ वर्षीय डिप्लोमा पाठ्यक्रम प्रारंभ करने के प्रस्ताव पर व्यापक मंथन किया गया।
बैठक में पाठ्यक्रम की संरचना, प्रशिक्षण पद्धति, व्यावहारिक शिक्षण और कलाकारों की सहभागिता जैसे विभिन्न महत्वपूर्ण पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की गई। जिला कलक्टर हरफूल सिंह यादव ने कहा कि इस प्रस्तावित पाठ्यक्रम को पूरी तरह व्यावसायिक दृष्टिकोण के साथ विकसित किया जाना चाहिए। इससे विद्यार्थी इस पारंपरिक कला को अच्छी तरह सीखने के साथ-साथ भविष्य में इसे अपनी आजीविका का एक बहुत ही सुदृढ़ और प्रभावी माध्यम भी आसानी से बना सकेंगे।
इस बैठक में कला क्षेत्र के विकास और संरक्षण के लिए कई अन्य महत्वपूर्ण निर्णय भी लिए गए। प्रशासनिक अधिकारियों ने स्थानीय कलाकारों को आश्वस्त किया कि इस नए चित्र शैली कोर्स के माध्यम से उन्हें पूरा सहयोग और सम्मान मिलेगा। पारंपरिक कला को आधुनिक समय की मांग के अनुरूप ढाला जा सके इसलिए इसमें व्यावहारिक प्रशिक्षण पर सबसे अधिक ध्यान दिया जाएगा जिससे विद्यार्थियों को रोजगार पाने में किसी कठिनाई का सामना न करना पड़े।
बैठक में इंटेक के संयोजक राजकुमार दाधीच, पर्यटन अधिकारी प्रेम शंकर सैनी, वरिष्ठ पुरातत्ववेत्ता ओम प्रकाश कुक्की तथा बूंदी चित्र शैली के प्रमुख कलाकार सुनील जांगिड़, पंकज सिसोदिया और विवेक उत्प्रेजा सहित अन्य विशेषज्ञ भी उपस्थित रहे। इन सभी विशेषज्ञों ने अपने बहुमूल्य सुझाव दिए और विश्वविद्यालय की इस अनूठी पहल की सराहना की। सभी का मानना था कि इस प्रकार के अकादमिक प्रयासों से हमारी सांस्कृतिक धरोहर को एक नया जीवन मिल सकेगा।
सभी विशेषज्ञों ने सर्वसम्मति से इस बात पर सहमति व्यक्त की कि वर्तमान युग में युवाओं को ऐसी शिक्षा से जोड़ना बहुत आवश्यक है। कोटा विश्वविद्यालय द्वारा शुरू किया जाने वाला यह विशेष चित्र शैली कोर्स आने वाले समय में कला जगत में एक नया मील का पत्थर साबित होगा। इस पाठ्यक्रम के माध्यम से कला के क्षेत्र में रुचि रखने वाले युवाओं को राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाने का एक सुनहरा अवसर प्राप्त होगा।
अस्वीकरण (Disclaimer):
यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसियों और स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचना के उद्देश्य से किया गया है। कोटा विश्वविद्यालय द्वारा कला संरक्षण और रोजगारपरक पाठ्यक्रमों के संचालन के संबंध में किए गए निर्णयों को दर्शाने के लिए इस रिपोर्ट को तैयार किया गया है। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक किसी भी रूप में उत्तरदायी नहीं होंगे।
Author:अजय त्यागी
July 14, 2026: 8:42 PM
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