नई दिल्ली। एयर इंडिया विमान की फुकेत से दिल्ली आ रही उड़ान में 4 अगस्त को अचानक 300 फीट की ऊंचाई घटने की घटना अब गंभीर तकनीकी सवालों के घेरे में है। शुरुआती विश्लेषण के मुताबिक विमान के 3 हाइड्रोलिक सिस्टम महज 2 सेकंड के भीतर खराब हुए और करीब 4 सेकंड तक एलिवेटर और एलेरॉन जैसे अहम उड़ान नियंत्रण काम नहीं कर पाए। इस दौरान 145 लोग विमान में सवार थे और 24 लोग घायल हुए। घटना की जांच विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो कर रहा है। [1]
शुरुआती विश्लेषण में सामने आया कि एयरबस ए320 विमान के 3 हाइड्रोलिक सिस्टम में एक के बाद एक खराबी आई। रिपोर्ट के मुताबिक 9 बजकर 32 मिनट 44 सेकंड के आसपास एक हाइड्रोलिक सिस्टम का दबाव खत्म हुआ और अगले ही सेकंड बाकी 2 सिस्टम भी प्रभावित हो गए। करीब 7 सेकंड बाद तीनों सिस्टम फिर से काम करने लगे। इस दौरान विमान के ऊपर नीचे और दाएं बाएं दिशा में नियंत्रण देने वाली अहम सतहों ने करीब 4 सेकंड तक प्रतिक्रिया नहीं दी।
रिपोर्ट के मुताबिक सिस्टम में हाइड्रोलिक दबाव घटने के कारण कम दबाव का संकेत मिला और इसके बाद कुछ एक्ट्यूएटर काम करना बंद कर गए। इसी दौरान प्रथम अधिकारी ने विमान का अगला हिस्सा नीचे करने के लिए पूरा नियंत्रण इनपुट दिया, लेकिन उड़ान नियंत्रण ने तुरंत प्रतिक्रिया नहीं दी। एयरबस ने घटना के बाद कई संभावित तकनीकी कारणों पर ध्यान केंद्रित किया है। एयर इंडिया विमान बाद में स्थिर हो गया और सुरक्षित दिल्ली पहुंचा। मामले की जांच में विमान के सिस्टम और रिकॉर्ड की बारीकी से पड़ताल की जा रही है।
एयर इंडिया विमान के साथ हुई घटना को लेकर विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो ने भी जानकारी दी थी कि विमान ने उड़ान के दौरान करीब 300 फीट की अचानक ऊंचाई खोई। विमान का पंजीकरण वीटी ईएक्सओ था और यह उड़ान एआई2379 के तौर पर फुकेत से दिल्ली जा रही थी। घटना के बाद विमान ने नियंत्रण हासिल किया और दिल्ली में सुरक्षित उतर गया। जांच एजेंसी तकनीकी रिकॉर्ड के साथ परिचालन, रखरखाव, मेडिकल और मानवीय पहलुओं से जुड़े सबूत भी जुटा रही है।
जांच एजेंसी का कहना है कि विमान और उसके सिस्टम की जांच के अलावा उड़ान रिकॉर्डर में दर्ज आंकड़ों, रखरखाव के रिकॉर्ड और संबंधित लोगों के बयानों को भी देखा जा रहा है। एयरबस ने 10 अगस्त के अपने शुरुआती विश्लेषण में एयर इंडिया से और जानकारी मांगी है। अभी इस तकनीकी गड़बड़ी की अंतिम वजह तय नहीं हुई है। जांच में जुटी एजेंसियां सभी उपलब्ध सबूतों को एक साथ देखकर ही किसी निष्कर्ष पर पहुंचेंगी। इसलिए फिलहाल किसी एक कारण को जिम्मेदार मानना जल्दबाजी होगी।
इस घटना के बाद एयर इंडिया के विमान के पायलटों की जांच को लेकर भी मामला गंभीर हो गया है। उड़ान के कमांडर की मनोदैहिक पदार्थों से जुड़ी जांच में रिपोर्ट सकारात्मक आई है। इसके बाद एयर इंडिया ने अपने सभी पायलटों की ऐसी जांच कराने का फैसला किया है। यह जांच एयर इंडिया और एयर इंडिया एक्सप्रेस के 5000 से अधिक पायलटों तक पहुंचने वाली है। हालांकि पायलट की जांच और विमान की तकनीकी खराबी के बीच सीधा संबंध अभी जांच से साबित नहीं हुआ है।
जांच एजेंसी विमान की तकनीकी स्थिति और चालक दल से जुड़े पहलुओं को अलग अलग कोण से देख रही है। एयर इंडिया विमान के अचानक नीचे आने की घटना के दौरान नियंत्रण में आई दिक्कत और उसके बाद सिस्टम के सामान्य होने को समझना जांच का अहम हिस्सा है। विमान के उड़ान आंकड़े, तकनीकी रिकॉर्ड और चालक दल से जुड़ी जानकारी के आधार पर पूरी तस्वीर तैयार की जा रही है। अधिकारियों का जोर इस बात पर है कि किसी भी निष्कर्ष से पहले सभी जरूरी सबूतों की पूरी जांच हो।
फिलहाल इस घटना में सबसे अहम बात यह है कि एयर इंडिया विमान के उड़ान नियंत्रण करीब 4 सेकंड तक प्रभावित हुए और विमान की ऊंचाई करीब 300 फीट घट गई। इसके बावजूद विमान बाद में स्थिर हुआ और सुरक्षित दिल्ली पहुंच गया। 145 लोगों में से 24 लोग घायल हुए। घटना के तकनीकी कारणों की जांच अभी जारी है और एयरबस ने भी अतिरिक्त जानकारी मांगी है। ऐसे में शुरुआती विश्लेषण से संकेत जरूर मिलते हैं, लेकिन अंतिम कारण बताने के लिए जांच पूरी होना जरूरी है।
एयर इंडिया विमान की घटना ने उड़ान सुरक्षा से जुड़े तकनीकी और मानवीय दोनों पहलुओं को चर्चा में ला दिया है। एक तरफ 3 हाइड्रोलिक सिस्टम के एक साथ प्रभावित होने की वजह समझने की कोशिश हो रही है, दूसरी तरफ पायलट की जांच से जुड़े तथ्य भी सामने आए हैं। दोनों पहलुओं को जोड़कर कोई निष्कर्ष निकालना अभी उचित नहीं होगा। विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो और संबंधित विशेषज्ञों की जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि 300 फीट की अचानक गिरावट और कुछ सेकंड तक नियंत्रण प्रभावित होने की असली वजह क्या थी।
अस्वीकरण (Disclaimer):
यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसियों और स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचना के उद्देश्य से किया गया है। विमान की तकनीकी खराबी और पायलट की जांच के बीच किसी सीधे संबंध की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है तथा अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक किसी भी रूप में उत्तरदायी नहीं होंगे।
Author:अजय त्यागी
August 14, 2026: 2:39 PM
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