संगरूर, पंजाब। भारत-अमेरिका ट्रेड डील के विरोध और अन्य किसानी मुद्दों को लेकर संयुक्त किसान मोर्चा गैर राजनीतिक के नेतृत्व में किसानों का दिल्ली कूच खनौरी बॉर्डर पर रुक गया। 51 सदस्यीय जत्था रविवार को सीमा तक पहुंचा, लेकिन हरियाणा प्रशासन ने बॉर्डर सील कर किसानों को पैदल भी प्रवेश की अनुमति नहीं दी। इसके बाद किसान बॉर्डर से करीब 200 मीटर पीछे सड़क पर बैठ गए। किसानों ने बिस्तर लगाकर रात वहीं गुजारी और केंद्र सरकार से बातचीत की मांग दोहराई। [1]
दिल्ली जाने की अनुमति नहीं मिलने के बाद किसान प्रतिनिधियों और हरियाणा प्रशासन के बीच बैठक हुई। प्रशासन ने किसानों की मुलाकात हरियाणा के मुख्यमंत्री से कराने का आश्वासन दिया, लेकिन किसान प्रतिनिधियों ने प्रस्ताव स्वीकार नहीं किया। उनका कहना है कि उनकी मांगें हरियाणा सरकार से संबंधित नहीं हैं और इनका समाधान केंद्र सरकार के स्तर पर ही संभव है। इसलिए किसान केंद्रीय कृषि मंत्री के साथ बैठक तय कराने की मांग कर रहे हैं और तब तक खनौरी बॉर्डर पर बैठे रहने की बात कह रहे हैं।
किसान नेता जगजीत सिंह डल्लेवाल ने कहा कि पिछली बार किसानों को ट्रैक्टर ट्रॉलियों के साथ दिल्ली जाने से रोका गया था। इस बार केवल 51 किसान शांतिपूर्ण तरीके से पैदल दिल्ली जाना चाहते हैं, फिर भी उन्हें रास्ते में रोक दिया गया। उन्होंने कहा कि आंदोलन का उद्देश्य अपनी मांगें केंद्र सरकार तक शांतिपूर्ण ढंग से पहुंचाना है। सोमवार को किसान संगठनों के प्रतिनिधि खनौरी बॉर्डर पर बैठक कर आगे की रणनीति तय करेंगे। हरियाणा प्रशासन के साथ दोबारा बैठक की संभावना भी जताई गई है।
खनौरी बॉर्डर पर किसानों के बैठने के बीच हरियाणा प्रशासन ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं। किसानों का दिल्ली कूच रोकने के लिए बॉर्डर को कंक्रीट बैरिकेडिंग लगाकर पूरी तरह सील किया गया है और किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए भारी पुलिस बल तैनात है। मौके पर वाटर कैनन और आंसू गैस के गोले दागने के उपकरण भी लगाए गए हैं। किसान फिलहाल सीमा से पीछे सड़क पर बैठे हैं और उनका कहना है कि केंद्रीय कृषि मंत्री से बैठक तय होने या दिल्ली जाने की अनुमति मिलने तक वे वहीं डटे रहेंगे।
किसानों का दिल्ली कूच रुकने के बाद अब सभी की नजर सोमवार को होने वाली किसान संगठनों की बैठक और प्रशासन के साथ संभावित बातचीत पर है। किसान नेताओं का कहना है कि उनका उद्देश्य टकराव नहीं बल्कि अपनी मांगों को केंद्र सरकार तक पहुंचाना है। दूसरी ओर बॉर्डर पर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी होने से स्थिति पर प्रशासन की भी नजर बनी हुई है। किसान फिलहाल अपनी मांग पर कायम हैं और केंद्रीय कृषि मंत्री के साथ वार्ता या दिल्ली जाने की अनुमति मिलने तक खनौरी बॉर्डर पर डटे रहने की बात कह रहे हैं।
अस्वीकरण (Disclaimer):
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Author:अजय त्यागी
August 17, 2026: 9:31 AM
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