अहमदाबाद, गुजरात, साइबर क्राइम पुलिस ने बॉस स्कैम से जुड़े एक नेटवर्क का पर्दाफाश करते हुए पश्चिम बंगाल से इमरान अली और इजामुल मुल्लन को गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक दोनों ने करीब 4500 सिम कार्ड हासिल किए और WhatsApp ग्रुप बनाकर साइबर अपराधियों को OTP उपलब्ध कराए। आरोप है कि मिले हुए OTP अलग अलग साइबर ठगी करने वाले कॉल सेंटरों को कमीशन के बदले दिए जाते थे। अब तक दोनों पर करीब 21900 OTP बेचने का आरोप है और मामले की जांच आगे बढ़ रही है। [1]
बॉस स्कैम में आरोपी कथित तौर पर साइबर अपराधियों के लिए OTP जुटाने का काम कर रहे थे। पुलिस के अनुसार आरोपियों के मोबाइल नंबरों पर जब OTP आते थे तो वे उन्हें विदेश में चल रहे साइबर ठगी के कॉल सेंटरों तक पहुंचाते थे। पुलिस ने बताया कि अब तक करीब 23 लाख रुपये मूल्य के OTP बेचने की जानकारी सामने आई है। जून में अहमदाबाद में करीब 1.5 करोड़ रुपये की बॉस स्कैम ठगी की शिकायत दर्ज हुई थी। जांच के दौरान पुलिस अब तक 1.30 करोड़ रुपये बरामद करने का दावा कर रही है।
जांच में नेटवर्क का कनेक्शन पाकिस्तान और चीन तक पहुंचने के संकेत भी मिले हैं। पुलिस के अनुसार चीन में तैयार APK और मैलवेयर के जरिए ZIP फाइलें SMS, ईमेल और WhatsApp पर भेजी जाती थीं। इन फाइलों में कथित रूप से खतरनाक .exe और .dll फाइलें होती थीं। कंप्यूटर पर फाइल खुलने के बाद मैलवेयर इंस्टॉल हो जाता था और आरोपियों को पीड़ित के WhatsApp Web सेशन तक पहुंच मिल जाती थी। इसके बाद डेटा विदेश में चल रहे साइबर ठगी के कॉल सेंटरों तक भेजे जाने का आरोप है।
I4C यानी इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर के साथ हुई जांच में करीब 10000 मोबाइल फोन के संक्रमित होने की जानकारी सामने आई है। पुलिस ने इन उपकरणों को सुरक्षित करने की कार्रवाई शुरू कर दी है। गुजरात में अब तक इस नेटवर्क से जुड़े 3 पीड़ितों की पहचान हुई है। पुलिस को यह भी संदेह है कि आरोपियों को मिली रकम को अमेरिकी डॉलर में बदला गया और फिर देश से बाहर भेजा गया। इस लेनदेन और रकम के इस्तेमाल की भी जांच की जा रही है।
बॉस स्कैम का मतलब ऐसे साइबर हमले से है जिसमें अपराधी खुद को किसी कंपनी के CEO या डायरेक्टर जैसा अधिकारी बताकर कर्मचारी को तुरंत पैसे ट्रांसफर करने के लिए दबाव में लेते हैं। पुलिस के अनुसार यह नेटवर्क पहले Telegram के जरिए चल रहा था और बाद में WhatsApp पर शिफ्ट हो गया। दोनों गिरफ्तार आरोपियों को तकनीकी जानकारी रखने वाला बताया गया है। पुलिस अब सिम कार्ड, OTP, संक्रमित मोबाइल और पैसों के लेनदेन की कड़ियों को जोड़ रही है। आगे की जांच में नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों और ठगी का पता लगाया जाएगा।
अस्वीकरण (Disclaimer):
यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसियों और स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचना के उद्देश्य से किया गया है। साइबर नेटवर्क, संक्रमित उपकरणों और विदेशी कनेक्शन से जुड़े आरोप पुलिस जांच के आधार पर हैं और इनकी अंतिम पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया तथा जांच पूरी होने के बाद ही होगी। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक किसी भी रूप में उत्तरदायी नहीं होंगे।
Author:अजय त्यागी
August 18, 2026: 7:58 PM
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