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Rex TV India
Latest News राजस्थान Digital Newsletter 19 Aug 2026 · 6:03 PM

अलवर मेडिकल कॉलेज शुरू हुए 3 साल, फिर भी गंभीर इलाज का इंतजार जारी

प्रतीकात्मक फोटो

अलवर, राजस्थान। अलवर मेडिकल कॉलेज शुरू हुए 3 साल से ज्यादा समय बीत चुका है, लेकिन गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए जरूरी सुपर स्पेशलिटी सुविधाओं का इंतजार अब भी खत्म नहीं हुआ है। नए भवन के लोकार्पण के लिए केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह और मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा अलवर आए, मगर अस्पताल में कार्डियोलॉजिस्ट, न्यूरोसर्जन और एंडोक्राइनोलॉजिस्ट जैसी विशेषज्ञ सेवाएं अभी पूरी तरह उपलब्ध नहीं हैं। नतीजा यह है कि गंभीर मरीजों को दिल्ली, गुरुग्राम और जयपुर जैसे बड़े शहरों की ओर रेफर करना पड़ रहा है। [1]

इलाज का इंतजार

अलवर में मरीजों का दबाव लगातार बढ़ रहा है। अलवर मेडिकल कॉलेज की ओपीडी इन दिनों 4 हजार से ज्यादा पहुंच गई है, जबकि पहले यह करीब 2 से ढाई हजार रहती थी। अलवर, खैरथल तिजारा, कोटपूतली बहरोड़ और डीग के साथ हरियाणा के मेवात तथा आसपास के इलाकों से भी लोग यहां इलाज कराने पहुंचते हैं। जिला अस्पताल के प्रमुख चिकित्सा अधिकारी डॉ. प्रवीण शर्मा के मुताबिक गेस्ट्रोलॉजिस्ट की सुविधा है, लेकिन कार्डियोलॉजिस्ट, न्यूरो फिजिशियन, न्यूरोसर्जन और एंडोक्राइनोलॉजिस्ट जैसी कई सेवाओं की कमी बनी हुई है।

सुपर स्पेशलिटी सुविधा नहीं होने का सीधा असर गंभीर मरीजों पर पड़ रहा है। खासकर हेड इंजरी के मामलों में न्यूरोसर्जन की जरूरत होती है, लेकिन यह सुविधा उपलब्ध नहीं होने से मरीजों को जयपुर रेफर करना पड़ता है। अस्पताल में 550 बेड स्वीकृत हैं, जबकि मरीजों की संख्या देखते हुए फिलहाल 750 बेड की व्यवस्था की गई है। यहां 4 आईसीयू और पर्याप्त वेंटिलेटर मौजूद हैं, इसलिए आईसीयू स्तर की सुविधा मिल रही है, लेकिन विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी इलाज की पूरी व्यवस्था को प्रभावित कर रही है।

गंभीर असर

डॉ. प्रवीण शर्मा ने बताया कि जयपुर के एसएमएस अस्पताल के बाद अलवर जिला अस्पताल पर मरीजों का भार काफी ज्यादा रहता है। यहां नर्सिंग ऑफिसर्स की कमी है और 100 पदों की जरूरत बताई गई है। अलवर मेडिकल कॉलेज शुरू होने से पहले भी मरीजों के दबाव को देखते हुए सुपर स्पेशलिटी सेवाओं की जरूरत महसूस की जाती रही थी। कॉलेज शुरू होने के बाद इन सुविधाओं के मिलने की उम्मीद जगी, लेकिन 3 साल से ज्यादा समय बीतने के बाद भी यह कमी दूर नहीं हो सकी है।

मेडिकल कॉलेज शुरू होने से पहले जिला अस्पताल में मरीजों के बढ़ते भार के कारण सुपर स्पेशलिटी सेवाओं की जरूरत लगातार महसूस की जाती रही। सरकार की ओर से समय समय पर बेहतर चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने के दावे भी किए गए, लेकिन गंभीर रोगों के विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी बनी रही। अलवर मेडिकल कॉलेज और ईएसआईसी मेडिकल कॉलेज दोनों मौजूद होने के बावजूद उच्च स्तरीय चिकित्सा सुविधाओं का इंतजार खत्म नहीं हुआ। आसपास के जिलों और मेवात से आने वाले मरीजों के कारण सरकारी अस्पताल पर दबाव लगातार बना हुआ है।

रेफरल की मजबूरी

मरीजों की शिकायतें भी व्यवस्था की दूसरी तस्वीर दिखाती हैं। मेहताब सिंह का नौहरा निवासी प्रेमराज ने बताया कि एक्सीडेंट के बाद पैर में रॉड डाली गई थी और खून आने पर वह जिला अस्पताल पहुंचे। उनका आरोप है कि एक्स रे के बाद न पट्टी की गई और न खून रोकने की दवा दी गई। उन्होंने पर्ची, डॉक्टर और दवा के लिए अलग अलग कतारों में लगने की परेशानी भी बताई। एक अन्य मरीज ने दवा की खिड़की पर गार्ड नहीं होने से लाइन टूटने और विवाद होने की शिकायत की।

अलवर मेडिकल कॉलेज में सुपर स्पेशलिटी सुविधाओं की कमी अब सिर्फ भविष्य की जरूरत नहीं, बल्कि रोज सामने आ रही मरीजों की समस्या बन चुकी है। अस्पताल की ओपीडी 4 हजार से ज्यादा होने और आसपास के कई जिलों से मरीज आने के कारण विशेषज्ञ सेवाओं की मांग और बढ़ गई है। हेड इंजरी जैसे गंभीर मामलों में न्यूरोसर्जन की कमी से रेफरल जारी है। सरकार की ओर से बेहतर चिकित्सा सुविधाओं के दावे होते रहे हैं, लेकिन अलवर मेडिकल कॉलेज में सुपर स्पेशलिटी विस्तार का इंतजार अभी बाकी है।

अस्वीकरण (Disclaimer):

यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसियों और स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचना के उद्देश्य से किया गया है। मरीजों की ओर से लगाए गए आरोप संबंधित व्यक्तियों के दावे हैं और उनकी स्वतंत्र पुष्टि इस रिपोर्ट में नहीं की गई है। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक किसी भी रूप में उत्तरदायी नहीं होंगे।

Rex TV India Author:अजय त्यागी August 19, 2026: 6:03 PM © 2026 Rex TV India Contact @ 91 6376887816 | rextvindia@gmail.com
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