मुंबई, महाराष्ट्र। भारतीय रुपये पर शुक्रवार को रुपये पर दबाव बढ़ने की आशंका है। इसकी बड़ी वजह कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और आयातकों की ओर से डॉलर की लगातार मांग है। ट्रेडर्स के मुताबिक रुपया 95.74 से 95.78 के दायरे में खुल सकता है, जबकि गुरुवार को यह 95.7050 प्रति डॉलर पर बंद हुआ था। Reuters की एक रिपोर्ट के अनुसार, हाल के दिनों में RBI लगातार बाजार में दखल देकर रुपये की गिरावट को थामता रहा है। कमजोर डॉलर भी घरेलू मुद्रा के लिए कुछ राहत दे रहा है। [1]
ट्रेडर्स का कहना है कि इस हफ्ते रुपये की चाल काफी सीमित रही है। अब तक इसकी कारोबारी सीमा करीब 30 पैसे की रही है और यह पिछले हफ्ते के पैटर्न जैसा ही है। रोजाना कारोबार में कच्चे तेल और आयातकों की हेजिंग से रुपये पर दबाव आता है, लेकिन RBI के हस्तक्षेप के बाद गिरावट थमती दिखती है। बाजार में यह उम्मीद बनी हुई है कि केंद्रीय बैंक आगे भी जरूरत पड़ने पर डॉलर बेचकर रुपये को सहारा दे सकता है और इसकी कमजोरी को सीमित रख सकता है।
एक बैंक के करेंसी ट्रेडर के मुताबिक हाल के दिनों के घटनाक्रम को देखते हुए यह मानना उचित होगा कि RBI फिर बाजार में हस्तक्षेप कर सकता है। इससे रुपया एक सीमित दायरे में रह सकता है, हालांकि जोखिम फिलहाल कमजोरी की तरफ ज्यादा है। RBI के हस्तक्षेप से दिन के भीतर होने वाली तेज हलचल भी सीमित रहने की उम्मीद है। ट्रेडर्स का यह भी मानना है कि केंद्रीय बैंक की मौजूदगी के कारण सट्टेबाजी वाले प्रवाह कमजोर रह सकते हैं और रुपये की चाल काफी हद तक नियंत्रित दायरे में रह सकती है।
अमेरिकी डॉलर शुक्रवार को भी दबाव में रहा और उसके साप्ताहिक नुकसान में रहने की संभावना थी। अमेरिकी Treasury की ओर से लंबी अवधि के बॉन्ड को सहारा देने के कदम से डॉलर को कुछ राहत मिली थी, लेकिन बाजार इसे फिलहाल सीमित और अस्थायी उपाय मान रहा है। गुरुवार को लंबी अवधि के अमेरिकी Treasury में फिर बिकवाली शुरू हो गई। इस वजह से पहले आई राहत तेजी कमजोर पड़ गई। डॉलर की कमजोरी हालांकि भारतीय रुपये के लिए फिलहाल सकारात्मक संकेत बनी हुई है।
दूसरी तरफ कच्चे तेल की कीमत रुपये के लिए बड़ी चिंता बनी हुई है। शुक्रवार को Brent crude 94 डॉलर प्रति बैरल के ठीक नीचे कारोबार कर रहा था। इससे पहले पिछले सत्र में इसमें 2 फीसदी से ज्यादा की तेजी आई थी। पिछले 2 हफ्तों में Brent की कीमत करीब 12 फीसदी बढ़ चुकी है। अमेरिका और इजरायल की ईरान के साथ जंग के नतीजे को लेकर अनिश्चितता के कारण तेल आपूर्ति पर चिंता बनी हुई है। ऐसे माहौल में रुपये पर दबाव बना रह सकता है, हालांकि RBI का हस्तक्षेप और कमजोर डॉलर गिरावट को सीमित कर सकते हैं।
अस्वीकरण (Disclaimer):
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Author:अजय त्यागी
August 21, 2026: 10:53 AM
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