बेमेतरा, छत्तीसगढ़। बेमेतरा सिटी कोतवाली क्षेत्र के परशुराम चौक में पुलिस की लापरवाही का चौंकाने वाला मामला सामने आया है। आरोप है कि फांसी लगाने की कोशिश के बाद बेहोश महिला को मौके पर पहुंची पुलिस ने बिना चिकित्सकीय जांच के मृत समझ लिया। पुलिस ने कमरे में ताला लगा दिया गया और परिजनों को भीतर जाने से रोक दिया गया। करीब 2 घंटे बाद पंचनामा की कार्रवाई के लिए पुलिस की अन्य टीम लौटी तो महिला जीवित मिली। परिजनों ने उसे तत्काल निजी अस्पताल पहुंचाया। जहाँ महिला का उपचार जारी है। [1]
जानकारी के मुताबिक महिला ने अपने घर में फांसी लगाने की कोशिश की थी। घटना का पता चलने पर पड़ोसियों ने डायल 112 और स्थानीय पुलिस को सूचना दी। परिवार और प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार पुलिस टीम मौके पर पहुंची, लेकिन आरोप है कि महिला की नब्ज और सांस की जांच नहीं की गई। डॉक्टर को बुलाने या तत्काल अस्पताल ले जाने के बजाय उसे मृत मान लिया गया। इसके बाद उस कमरे को कथित तौर पर सबूत सुरक्षित रखने के नाम पर बंद कर दिया गया और परिवार को अंदर जाने से रोका दिया गया।
करीब 2 घंटे बाद पुलिस की दूसरी टीम पंचनामा और अन्य कानूनी औपचारिकताओं के लिए वहां पहुंची। कमरे का ताला खोला गया तो मौजूद लोगों को महिला के शरीर में हरकत दिखाई दी और पता चला कि वह सांस ले रही थी। महिला जीवित मिली तो परिजन तुरंत उसे निजी अस्पताल ले गए। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक महिला का उपचार जारी है। घटना के बाद स्थानीय लोगों और परिवार में नाराजगी है। उनका कहना है कि समय पर चिकित्सा सहायता मिलती तो महिला की हालत और बेहतर हो सकती थी।
घटना के बाद परिजनों और स्थानीय लोगों ने वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों से निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। उनका आरोप है कि मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों ने गंभीर लापरवाही बरती और महिला को चिकित्सा सहायता दिलाने के बजाय मृत समझकर कमरे में बंद कर दिया। लोगों ने जिम्मेदार पुलिसकर्मियों की भूमिका की जांच करने और दोष साबित होने पर कार्रवाई की मांग की है। फिलहाल उपलब्ध जानकारी में पुलिस का विस्तृत आधिकारिक पक्ष स्पष्ट नहीं है। इसलिए जांच के बाद ही जिम्मेदारी तय हो सकेगी।
इस पूरे मामले में पुलिस की लापरवाही का सबसे बड़ा सवाल यही है कि पुलिस ने महिला को मृत मानने से पहले उसकी चिकित्सकीय जांच क्यों नहीं कराई। इस घटना ने शुरुआती पुलिस कार्रवाई पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। जांच में यह भी सामने आना जरूरी है कि कमरे को बंद करने का फैसला किस आधार पर लिया गया और महिला को कितनी देर तक चिकित्सा सहायता नहीं मिल सकी। वरिष्ठ अधिकारियों की जांच और पुलिस के आधिकारिक जवाब के बाद ही पूरा घटनाक्रम साफ होगा। फिलहाल इस मामले ने पुलिस की लापरवाही को लेकर बड़ा सवाल खड़ा किया है।
अस्वीकरण (Disclaimer):
यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसियों और स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचना के उद्देश्य से किया गया है। पुलिस की कार्रवाई से जुड़े आरोपों की आधिकारिक जांच पूरी होने के बाद ही अंतिम तथ्य और जिम्मेदारी स्पष्ट होगी। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक किसी भी रूप में उत्तरदायी नहीं होंगे।
Author:अजय त्यागी
August 21, 2026: 7:13 PM
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