चित्तौड़गढ़, राजस्थान। जिला चिकित्सालय के सामने स्थित एक लैब पर सोनोग्राफी रिपोर्ट को लेकर विवाद खड़ा हो गया। परिजनों ने आरोप लगाया कि गर्भावस्था के दौरान कई बार सोनोग्राफी कराने के बावजूद रिपोर्ट में दिख रही बच्चे के पैरों से जुड़ी गंभीर स्थिति की जानकारी उन्हें नहीं दी गई। प्रसव के बाद नवजात के दोनों पैरों के पंजे पूरी तरह विकसित नहीं होने और दोनों पैरों में बीच की 3 3 उंगलियां नहीं होने की बात सामने आने पर परिजनों ने विरोध शुरू किया। मामले में किसी पक्ष ने थाने में रिपोर्ट दर्ज नहीं कराई है। [1]
सदर थानाधिकारी प्रेमसिंह के अनुसार शुक्रवार शाम उदयपुर मार्ग पर जिला चिकित्सालय के सामने स्थित लैब में हंगामे की सूचना मिली थी। इसके बाद कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस बल तैनात किया गया। परिजनों का कहना है कि खेरी निवासी अर्चना का करीब 8 महीने से निजी अस्पताल में उपचार चल रहा था। चिकित्सक की सलाह पर सेंथी स्थित इसी लैब में सोनोग्राफी कराई जाती रही। परिवार का आरोप है कि प्रसव से पहले कराई गई जांचों के दौरान उन्हें बच्चे की स्थिति के बारे में स्पष्ट जानकारी नहीं मिली।
परिजनों के मुताबिक अर्चना का 2 दिन पहले राजकीय महिला एवं बाल चिकित्सालय में प्रसव हुआ। इसके बाद नवजात के दोनों पैरों के पंजे पूरी तरह विकसित नहीं होने की जानकारी सामने आई। साथ ही दोनों पैरों में बीच की 3 3 उंगलियां नहीं होने की बात कही गई। इसी के बाद परिवार और उनके साथ आए लोगों में नाराजगी बढ़ गई। उन्होंने लैब के बाहर धरना शुरू कर दिया और संबंधित चिकित्सक तथा लैब की भूमिका की जांच कर कार्रवाई की मांग उठाई। पुलिस मौके पर पहुंचकर स्थिति संभालती रही।
प्रसूता के पति महेंद्र जाट ने आरोप लगाया कि पत्नी का गर्भावस्था की शुरुआत से निजी अस्पताल में उपचार चल रहा था और चिकित्सक की सलाह पर लगातार सोनोग्राफी कराई गई। परिवार के अनुसार करीब 5 महीने तक जांच होने के बावजूद सोनोग्राफी रिपोर्ट और सोनोग्राफी फिल्म में दिखाई दे रही स्थिति के बारे में उन्हें जानकारी नहीं दी गई। उनका कहना है कि यदि गर्भावस्था के दौरान बच्चे की स्थिति के बारे में स्पष्ट जानकारी मिलती तो परिवार समय रहते चिकित्सकीय सलाह ले सकता था और आगे की तैयारी कर सकता था।
विरोध के दौरान लैब के चिकित्सक से मारपीट की जानकारी भी सामने आई। पुलिस के अनुसार चिकित्सक को प्रदर्शनकारियों से छुड़ाकर सदर थाने ले जाया गया। हालांकि इस मामले में किसी भी पक्ष की ओर से थाने में मामला दर्ज नहीं कराया गया है। पुलिस ने मौके पर कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए बल तैनात किया था। फिलहाल उपलब्ध तथ्यों के आधार पर यह स्पष्ट नहीं है कि सोनोग्राफी रिपोर्ट में वास्तव में क्या दर्ज था और उसमें नवजात के पैरों से जुड़ी स्थिति कितनी स्पष्ट रूप से दिखाई दे रही थी।
पूरे मामले में सबसे अहम सवाल यही है कि गर्भावस्था के दौरान कराई गई सोनोग्राफी की रिपोर्ट और फिल्म में नवजात के पैरों से जुड़ी स्थिति वास्तव में दिखाई दे रही थी या नहीं। इसका जवाब संबंधित मेडिकल रिकॉर्ड, सोनोग्राफी रिपोर्ट, फिल्म और विशेषज्ञों की राय से ही सामने आ सकता है। फिलहाल परिवार की ओर से जानकारी छुपाने का आरोप लगाया गया है, जबकि चिकित्सक या लैब की ओर से कोई अलग पक्ष सामने आने की पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए अंतिम निष्कर्ष जांच के बाद ही निकलेगा। RGHS में गड़बड़ी जैसे मामलों से अलग इस घटना में भी दस्तावेजों की जांच जरूरी है।
अस्वीकरण (Disclaimer):
यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसियों और स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचना के उद्देश्य से किया गया है। रिपोर्ट में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है और किसी चिकित्सक या सोनोग्राफी लैब को दोषी ठहराने का अंतिम निष्कर्ष जांच तथा उपलब्ध चिकित्सकीय रिकॉर्ड की समीक्षा के बाद ही निकाला जा सकता है। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक किसी भी रूप में उत्तरदायी नहीं होंगे।
Author:अजय त्यागी
August 21, 2026: 9:41 PM
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