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Rex TV India
Latest News राजस्थान Digital Newsletter 23 Aug 2026 · 9:24 PM

आध्यात्मिक सुख से जीवन में संतुलन, संवाद में सकारात्मक सोच पर जोर

संवाद कार्यक्रम का समापन

बीकानेर, राजस्थान। पर्यावरण पोषण यज्ञ समिति और आरएसवी ग्रुप आफ स्कूल्स के तत्वावधान में आयोजित तीन दिवसीय संवाद कार्यक्रम के अंतिम दिन सुबह यज्ञ के साथ कार्यक्रम की शुरुआत हुई। इसके बाद स्वामी विवेकानंद जी ने उपस्थित लोगों से संवाद करते हुए यज्ञ और जीवन में आध्यात्मिक मूल्यों के महत्व पर विस्तार से बात की। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति में प्राचीन काल से यज्ञ का विशेष स्थान रहा है। उनके अनुसार भौतिक सुख सीमित होते हैं, जबकि आध्यात्मिक सुख की कोई सीमा नहीं होती। वेदों का अध्ययन और अच्छी पुस्तकों का पठन व्यक्ति के ज्ञान को समृद्ध करते हैं।

यज्ञ और ईश्वर ध्यान

स्वामीजी ने कहा कि इंद्रियों से मिलने वाला सुख सीमित है और कई बार राग तथा द्वेष को बढ़ा सकता है। इसके विपरीत ईश्वर का ध्यान व्यक्ति के भीतर आध्यात्मिक सुख और चेतना को मजबूत कर सकता है। उन्होंने कहा कि ईश्वर को समझने के लिए उसकी विशेषताओं और स्वरूप को जानना जरूरी है। उनके अनुसार जो वस्तु जैसी है उसे वैसा ही मानना आस्था है, जबकि बिना आधार के उसकी कल्पना करना अंधविश्वास है। उन्होंने एकाग्र होकर ईश्वर का ध्यान करने और उस समय मन को पूरी तरह ईश्वर पर केंद्रित रखने की बात कही।

संवाद के दौरान स्वामीजी ने सकारात्मक सोच रखने पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि दूसरों की सफलता देखकर विचलित होने के बजाय व्यक्ति को अपनी क्षमता और उपलब्ध अवसरों पर ध्यान देना चाहिए। सभी लोगों को जीवन में समान सुख सुविधाएं मिलना संभव नहीं है, लेकिन प्रत्येक व्यक्ति का जीवन मूल्यवान है। उन्होंने जीवन को व्यर्थ नहीं गंवाने की बात कहते हुए आत्महत्या जैसी प्रवृत्तियों पर भी गंभीरता से विचार करने की जरूरत बताई। उनके अनुसार मनुष्य को ईश्वर द्वारा मिली बुद्धि और विवेक का सकारात्मक उपयोग करते हुए जीवन को सार्थक दिशा देनी चाहिए।

क्रोध पर नियंत्रण जरूरी

स्वामीजी ने ईश्वर के स्वरूप पर चर्चा करते हुए कहा कि ईश्वर एक, सर्वव्यापी, निरंकारी, चैतन्य, न्यायकारी और आनंदस्वरूप है। उन्होंने कहा कि ईश्वर के बारे में जैसे जैसे ज्ञान बढ़ता है, उसके प्रति श्रद्धा भी मजबूत होती जाती है और व्यक्ति के दृष्टिकोण में व्यापक बदलाव आता है। उन्होंने छोटी छोटी बातों पर दुखी नहीं होने और अपने व्यवहार पर नियंत्रण रखने की सलाह दी। उनके अनुसार हर व्यक्ति की बुद्धि और सोच अलग होती है, इसलिए वह अपनी समझ के अनुसार कार्य करता है। ऐसे में परिस्थितियों को समझना भी जरूरी है।

आध्यात्मिक सुख हेतु क्रोध की स्थिति में भी उसे मन में दबाकर रखने के बजाय सही तरीके से नियंत्रित करने पर जोर दिया गया। स्वामीजी ने कहा कि क्रोध बुद्धि का विनाश कर सकता है, इसलिए व्यक्ति को संयम बनाए रखना चाहिए। उन्होंने प्रत्येक व्यक्ति से अपनी सामर्थ्य के अनुसार निष्काम कर्म करने का आह्वान किया। साथ ही कार्यों की प्राथमिकता तय करके उन्हें पूरा करने की सलाह दी। उनके अनुसार काम को व्यवस्थित तरीके से करने से व्यक्ति अपने तनाव पर बेहतर नियंत्रण रख सकता है। संवाद के दौरान स्वामीजी ने उपस्थित जिज्ञासुओं के सवालों के तार्किक उत्तर भी दिए।

अस्वीकरण (Disclaimer):

यह रिपोर्ट उपलब्ध कराए गए कार्यक्रम संबंधी तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचना के उद्देश्य से किया गया है। आध्यात्मिक विचार, धार्मिक मान्यताएं और जीवन संबंधी सुझाव वक्ता के विचारों के रूप में प्रस्तुत किए गए हैं। आत्महत्या या मानसिक संकट से जुड़ी किसी भी स्थिति में व्यक्ति को योग्य मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ या संबंधित आपातकालीन सहायता से संपर्क करना चाहिए। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक किसी भी रूप में उत्तरदायी नहीं होंगे।

Rex TV India Author:अजय त्यागी August 23, 2026: 9:24 PM © 2026 Rex TV India Contact @ 91 6376887816 | rextvindia@gmail.com
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