नई दिल्ली, दिल्ली। सरकार ने चीनी आयात के नियमों में बड़ा बदलाव किया है। अब शुल्क मुक्त कच्ची चीनी मंगाने वाले आयातकों को बिल ऑफ एंट्री दाखिल करने की तारीख से अधिकतम 2 महीने में उसे सफेद या रिफाइंड चीनी में बदलकर घरेलू बाजार में बेचना होगा। पहले इसके लिए 31 अक्टूबर की तय समयसीमा थी। IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, DGFT ने 10 लाख टन कच्ची चीनी के टैरिफ रेट कोटा के तहत जारी व्यवस्था में यह बदलाव किया है। [1]
नई व्यवस्था में 31 अक्टूबर की साझा अंतिम तारीख हटा दी गई है। अब हर आयातित खेप के लिए बिल ऑफ एंट्री की तारीख से अधिकतम 2 महीने की अवधि लागू होगी। यानी आयातक को कच्ची चीनी को समय पर प्रोसेस कर सफेद या रिफाइंड चीनी के रूप में घरेलू बाजार में उतारना होगा। 20 अगस्त को सरकार ने टैरिफ रेट कोटा के तहत 10 लाख टन कच्ची चीनी के शुल्क मुक्त आयात की अनुमति दी थी। बाकी शर्तों में ताजा संशोधन से कोई बदलाव नहीं किया गया है।
सरकार ने 20 अगस्त की व्यवस्था के तहत मौजूदा एडवांस ऑथराइजेशन में एक बार बदलाव की सुविधा भी दी थी। SION E52 के तहत जारी पात्र ऑथराइजेशन को टैरिफ रेट कोटा व्यवस्था में बदला जा सकता है। यह सुविधा 20 अगस्त तक वास्तव में आयात की गई कच्ची चीनी से जुड़ी है। सरकार का ताजा कदम ऐसे समय आया है जब अगस्त से नवंबर के बीच त्योहारों के कारण चीनी की मांग बढ़ती है। मकसद घरेलू बाजार में उपलब्धता बढ़ाना और कीमतों पर दबाव कम करना है।
चीनी आयात के फैसले के साथ सरकार की नजर बाजार की कीमतों और उपलब्धता पर भी है। ISMA ने कहा है कि देश में घरेलू मांग पूरी करने के लिए पर्याप्त चीनी स्टॉक मौजूद है और आने वाले हफ्तों में आपूर्ति बेहतर होने पर कीमतें नरम पड़ सकती हैं। ISMA के महानिदेशक दीपक बल्लानी के मुताबिक, पिछले 15 से 20 दिनों में कीमतों की तेजी मुख्य रूप से बाजार की धारणा, सट्टेबाजी और अल्पकालिक आपूर्ति को लेकर चिंता से जुड़ी रही, न कि किसी संरचनात्मक कमी से।
ISMA अध्यक्ष नीरज शिरगांवकर ने भी उपभोक्ताओं को भरोसा दिया है कि देश में पर्याप्त स्टॉक है और आगामी त्योहारों के दौरान मांग पूरी करने में परेशानी नहीं होगी। बल्लानी के अनुसार मौजूदा सीजन के 30 सितंबर को खत्म होने तक पर्याप्त चीनी उपलब्ध रहेगी और बाजार की स्थिति जल्द सुधरने की उम्मीद है। ऐसे में चीनी आयात से बाजार में अतिरिक्त आपूर्ति का भरोसा बढ़ सकता है। हालांकि, खुदरा कीमतों पर वास्तविक असर इस बात पर निर्भर करेगा कि आयातित कच्ची चीनी कितनी तेजी से रिफाइंड होकर बाजार में पहुंचती है।
अस्वीकरण (Disclaimer):
यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसियों और स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचना के उद्देश्य से किया गया है। चीनी की कीमतें मांग, आपूर्ति, उत्पादन, आयात और सरकारी नीतियों के अनुसार बदल सकती हैं। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक किसी भी रूप में उत्तरदायी नहीं होंगे।
Author:अजय त्यागी
August 25, 2026: 10:36 AM
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