भीलवाड़ा, राजस्थान (पंकज पोरवाल)। किसी अपने को खोने का दर्द बेहद गहरा होता है, लेकिन गगरानी परिवार ने इसी पीड़ा के बीच ऐसा फैसला लिया जिसने सेवा और मानवता की मिसाल पेश की। दिवंगत रामजस गगरानी के देवलोकगमन के बाद परिजनों ने नेत्रदान का संकल्प लिया। परिवार के इस फैसले से 2 दृष्टिहीन लोगों के जीवन में रोशनी लौटने की संभावना बनी है। भाविप नेताजी सुभाष शाखा के सचिव कैलाश शर्मा ने बताया कि इस पहल के पीछे समाजसेवा और जरूरतमंदों की मदद की भावना रही।
स्वर्गीय रामजस गगरानी कैलाश चंद्र गगरानी और शाखा की महिला प्रमुख मधु लढ़ा के पिताजी थे। परिजनों ने शोक के बीच नेत्रदान का निर्णय लेकर यह संदेश दिया कि किसी के जाने के बाद भी उनकी आंखें किसी दूसरे के जीवन में उजाला ला सकती हैं। नेत्रदान की प्रक्रिया रामस्नेही अस्पताल की चिकित्सा टीम के सहयोग से पूरी कराई गई। भाविप नेताजी सुभाष शाखा के माध्यम से कराया गया यह दूसरा नेत्रदान है और इसे शाखा पदाधिकारियों ने समाज के लिए प्रेरणादायक पहल बताया।
परिजनों ने इस सेवा कार्य में सहयोग के लिए गगरानी परिवार के साथ रामस्नेही अस्पताल की चिकित्सा टीम और अन्य सहयोगियों के प्रति आभार जताया। इस दौरान केदार गगरानी, दामाद कृष्ण गोपाल लढ़ा, चंद्र प्रकाश काल्या, राजेश चेचानी, गोपाल अग्रवाल और रामेश्वर सोमानी का भी सहयोग रहा। शाखा पदाधिकारियों का कहना है कि नेत्रदान से रोशनी की उम्मीद उन परिवारों के लिए भी प्रेरणा बन सकती है जो किसी अपने के निधन के बाद दूसरों की मदद का रास्ता चुनना चाहते हैं।
शाखा अध्यक्ष पंकज लोहिया, सचिव कैलाश शर्मा और कोषाध्यक्ष सुरेश रावत सहित पदाधिकारियों ने कहा कि मरणोपरांत नेत्रदान जैसे सेवा कार्य समाज में जागरूकता बढ़ाने का काम करते हैं। उनके मुताबिक किसी व्यक्ति की मृत्यु के बाद उसकी आंखें जरूरतमंदों के लिए बेहद महत्वपूर्ण हो सकती हैं। गगरानी परिवार के फैसले ने भी इसी भावना को सामने रखा है। नेत्रदान से रोशनी का यह संकल्प समाज में दूसरों को भी आगे आने और मानवता की सेवा से जुड़ने के लिए प्रेरित कर सकता है।
पदाधिकारियों ने लोगों से अपील की कि वे नेत्रदान जैसे पुनीत कार्यों को लेकर जागरूक हों और अपनी इच्छा के अनुसार ऐसे संकल्पों पर विचार करें। कार्यक्रम के दौरान दिवंगत रामजस गगरानी की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की गई। साथ ही शोक संतप्त परिवार को इस कठिन समय में संबल देने की कामना की गई। गगरानी परिवार का यह निर्णय बताता है कि गहरे दुख के बीच भी नेत्रदान से रोशनी की एक नई उम्मीद किसी जरूरतमंद के जीवन तक पहुंचाई जा सकती है।
अस्वीकरण (Disclaimer):
यह रिपोर्ट उपलब्ध कराए गए तथ्यों और प्राप्त स्रोतों पर आधारित है। नेत्रदान की प्रक्रिया और उससे संबंधित चिकित्सकीय परिणाम संबंधित चिकित्सा संस्थान तथा सक्षम स्वास्थ्य व्यवस्था के अनुसार होते हैं। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक किसी भी रूप में उत्तरदायी नहीं होंगे।
Author:अजय त्यागी
August 25, 2026: 12:21 PM
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