जयपुर, राजस्थान। CA के विरुद्ध FIR आयकर विभाग की शिकायत के बाद दर्ज हुई है। चार्टर्ड अकाउंटेंट अभिषेक जैन पर आरोप है कि उन्होंने 2021-22, 2022-23 और 2023-24 के दौरान 3168 Form 15CB प्रमाणपत्र पर्याप्त दस्तावेजों और सत्यापन के बिना जारी किए। विभाग की शिकायत के मुताबिक, इन प्रमाणपत्रों के आधार पर करीब 23956 करोड़ रुपये के विदेशी रेमिटेंस हुए। Hans India की रिपोर्ट के अनुसार, मामला 18 अगस्त को आयकर विभाग की डायरेक्टोरेट ऑफ इन्वेस्टिगेशन की सर्वे कार्रवाई के बाद सामने आया। पत्रकार कॉलोनी स्थित जैन के कार्यालय की भी जांच की गई। [1]
सर्वे के दौरान जैन के कार्यालय से मिले दस्तावेजों में विदेशी रेमिटेंस से जुड़े Form 15CB प्रमाणपत्रों का विवरण मिलने की बात शिकायत में कही गई है। इसके बाद आयकर विभाग के डिप्टी डायरेक्टर मिंटू लाल मीणा ने पत्रकार कॉलोनी थाने में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत के आधार पर पुलिस ने अभिषेक जैन के खिलाफ FIR दर्ज की। यानी घटनाक्रम में पहले सर्वे और दस्तावेजों की पड़ताल हुई, उसके बाद विभागीय शिकायत सामने आई और फिर पुलिस ने मामला दर्ज किया। अब जांच एजेंसियां बरामद दस्तावेजों और संबंधित लेनदेन की कड़ियां जोड़ रही हैं।
विभाग ने आरोप लगाया है कि प्रमाणपत्र जारी करने से पहले agreements, account related documents, Tax Residency Certificates और Form 10F जैसे जरूरी कागजातों का पर्याप्त सत्यापन नहीं किया गया। Form 15CB विदेशी भुगतान से जुड़े कुछ मामलों में CA द्वारा जारी किया जाने वाला प्रमाणपत्र है, जिसमें भुगतान की प्रकृति, कर देनदारी और TDS से जुड़े विवरण प्रमाणित किए जाते हैं। मौजूदा मामले में सवाल यह है कि जिन दस्तावेजों के आधार पर प्रमाणपत्र जारी हुए, उनकी वास्तविकता और लेनदेन की पूरी जानकारी की जांच किस स्तर तक की गई थी।
शिकायत में करीब 40 firms, entities और trusts के जरिए विदेशी रकम भेजे जाने का आरोप है। विभाग ने इनमें कुछ को संदिग्ध या कथित तौर पर फर्जी बताया है। शिकायत के अनुसार, कुछ लोगों और संस्थाओं ने आयकर रिटर्न दाखिल नहीं किया था या उनकी घोषित आय और कारोबारी गतिविधियां बड़ी रकम के मुकाबले बेहद कम थीं। इसके बावजूद उनके नाम से बड़े विदेशी रेमिटेंस किए गए। CA के विरुद्ध FIR में एक व्यक्ति के नाम करीब 8788 करोड़ रुपये और दूसरे के नाम करीब 9775 करोड़ रुपये के लेनदेन का उल्लेख भी किया गया है।
CA के विरुद्ध FIR के बाद अब पुलिस और जांच एजेंसियां बैंक खातों, विदेशी रेमिटेंस रिकॉर्ड, Form 15CB प्रमाणपत्रों और संबंधित कंपनियों तथा संस्थाओं के दस्तावेजों की पड़ताल करेंगी। जांच में यह भी देखा जाएगा कि रकम भेजने की प्रक्रिया शुरू करने वाले लोगों की क्या भूमिका थी और क्या किसी बिचौलिए या अन्य व्यक्ति ने इसमें मदद की। FIR में BNS की धाराएं 318(4), 234, 229 और 35 लगाई गई हैं। आगे की जांच यह तय करेगी कि कथित अनियमितता केवल प्रमाणपत्र जारी करने तक सीमित थी या इसके पीछे कोई बड़ा वित्तीय नेटवर्क भी था।
अस्वीकरण (Disclaimer):
यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसियों और स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचना के उद्देश्य से किया गया है। इस मामले में लगाए गए आरोप शिकायत और FIR में दर्ज दावों पर आधारित हैं और अभी जांच तथा न्यायिक प्रक्रिया के अधीन हैं। किसी भी आरोपी की दोषसिद्धि अदालत में आरोप साबित होने के बाद ही मानी जाएगी। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक किसी भी रूप में उत्तरदायी नहीं होंगे।
Author:अजय त्यागी
August 25, 2026: 5:10 PM
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