WA Join our WhatsApp Group
Advertisement Advertisement
← Back to article
Rex TV India
Latest News अंतरराष्ट्रीय Digital Newsletter 30 Aug 2026 · 12:27 PM

कमाई नहीं बांटना जरूरी, भागवत बोले सिर्फ पैसा नहीं जीवन का मकसद

Universal Oneness Celebration

न्यूयॉर्क, अमेरिका। कमाई नहीं बांटना जरूरी है, RSS प्रमुख मोहन भागवत ने न्यूयॉर्क के Universal Oneness Celebration में जीवन और सफलता को लेकर यह संदेश दिया। उन्होंने कहा कि इंसान जितना भी आगे बढ़ता है उसमें परिवार, किसान, मजदूर और समाज के अनगिनत लोगों का योगदान होता है। इसलिए खुद को पूरी तरह self made मानना सही नहीं है। IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, भागवत ने कहा कि असली सवाल यह नहीं है कि हम कितना कमाते हैं बल्कि यह है कि समाज को कितना वापस देते हैं। [1]

कमाई का मतलब क्या

भागवत ने करियर को केवल पैसे और भौतिक सुख से जोड़ने पर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि पैसा कमाना या भौतिक सफलता हासिल करना गलत नहीं है लेकिन इसे जिंदगी का अकेला मकसद नहीं बनाया जा सकता। भारतीय परंपरा में भी भौतिक उपलब्धियों को जीवन का हिस्सा माना गया है। उनका तर्क था कि इंसान को अपनी जरूरतें पूरी करने के साथ दूसरों के लिए भी सोचना चाहिए। यानी कमाई नहीं बांटना जरूरी की सोच से आगे बढ़कर ऐसी जिंदगी जीना जरूरी है जिसमें व्यक्तिगत सफलता का फायदा समाज तक पहुंचे।

अपने तर्क को समझाने के लिए भागवत ने रोजमर्रा की चीजों का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि हम जो खाना खाते हैं उसके पीछे किसान हैं और जो कपड़े पहनते हैं उनके पीछे कपास उगाने वाले किसान और मिलों में काम करने वाले मजदूर हैं। हमारे माता पिता हमें जीवन देते हैं और समाज हमें आगे बढ़ने के अवसर देता है। ऐसे में किसी व्यक्ति की सफलता अकेले उसकी मेहनत का नतीजा नहीं होती। भागवत ने इसी आपसी निर्भरता को समाज के प्रति जिम्मेदारी का आधार बताया।

सुख कितना टिकाऊ है

भागवत ने भौतिक सुख की स्थायी प्रकृति पर भी सवाल उठाया। उन्होंने न्यूयॉर्क के डोनट्स का उदाहरण देते हुए कहा कि पसंद की चीज को कोई एक समय में कितनी मात्रा में खा सकता है। अगले दिन वही व्यक्ति फिर उसे खाना चाहेगा। उनके मुताबिक इससे समझ आता है कि भौतिक सुख अक्सर अस्थायी होता है और जरूरत से ज्यादा मिलने पर उसका आनंद भी कम हो सकता है। इसलिए कमाई नहीं बांटना जरूरी का संदेश सिर्फ धन तक सीमित नहीं बल्कि अपनी क्षमता और संसाधनों को दूसरों के काम लगाने से भी जुड़ा है।

उन्होंने कहा कि इंसान के पास सही और गलत के नतीजों पर विचार करने की खास क्षमता है। इसी सोच की दिशा तय करती है कि व्यक्ति केवल अपने बारे में सोचेगा या दूसरों की जिंदगी बेहतर बनाने में भी भूमिका निभाएगा। भागवत ने कहा कि मनुष्य को केवल जीने देने की सोच से आगे बढ़कर दूसरों को जीने में मदद करनी चाहिए। उनके मुताबिक व्यक्तिगत जरूरतें पूरी करना जरूरी है लेकिन इसके साथ समाज और प्रकृति की चिंता करना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।

जीवन का असली पैमाना

भागवत के संदेश का केंद्र यही रहा कि सफलता को सिर्फ बैंक खाते या भौतिक उपलब्धियों से नहीं मापा जाना चाहिए। कमाई नहीं बांटना जरूरी का अर्थ उनके तर्क में यह है कि इंसान को अपनी कमाई और क्षमता का कुछ हिस्सा समाज के हित में लगाना चाहिए। उन्होंने लोगों से एक दूसरे की परवाह करने और ऐसी जिंदगी जीने की अपील की जिसमें व्यक्ति खुद भी आगे बढ़े और दूसरों को भी आगे बढ़ने का मौका दे। यह संदेश व्यक्तिगत उपलब्धि और सामाजिक जिम्मेदारी के बीच संतुलन की बात करता है।

अस्वीकरण (Disclaimer):

यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसियों और स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचना के उद्देश्य से किया गया है। मोहन भागवत के वक्तव्य को संदर्भ सहित प्रस्तुत किया गया है और इसे किसी व्यक्ति या समुदाय के लिए व्यक्तिगत सलाह या निर्देश के रूप में नहीं लिया जाना चाहिए। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक किसी भी रूप में उत्तरदायी नहीं होंगे।

Rex TV India Author:अजय त्यागी August 30, 2026: 12:27 PM © 2026 Rex TV India Contact @ 91 6376887816 | rextvindia@gmail.com
— End of Article —