बिश्केक, किर्गिस्तान। रूसी सेना में भारतीयों की मौजूदगी को लेकर भारत सरकार ने बड़ा आंकड़ा सामने रखा है। विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने बताया कि अब तक 227 भारतीय नागरिकों के रूसी सशस्त्र बलों में भर्ती होने की जानकारी मिली है। इनमें से 139 को सेना से मुक्त किया जा चुका है जबकि 51 लोगों की मौत हो चुकी है। मिस्री ने कहा कि बचे भारतीयों की जल्द रिहाई और स्वदेश वापसी के लिए भारत रूस के साथ लगातार बातचीत कर रहा है। उन्होंने यह जानकारी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की किर्गिस्तान यात्रा के दौरान दी। [1]
विदेश सचिव ने कहा कि भारतीय नागरिकों की रूसी सेना में भर्ती का मुद्दा भारत और रूस के बीच कई स्तरों पर कई बार उठाया गया है। उन्होंने बताया कि मॉस्को स्थित भारतीय दूतावास इस पूरे मामले पर नियमित नजर रख रहा है। सरकार का जोर उन भारतीय नागरिकों को जल्द सेवा से मुक्त कराने और उनके परिवारों तक वापस पहुंचाने पर है जो अभी भी रूसी सैन्य ढांचे में मौजूद हैं। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक 227 में से 139 भारतीयों की सेवा समाप्त हो चुकी है जबकि 51 की जान जा चुकी है।
इस मामले में भारत की चिंता सिर्फ रिहाई तक सीमित नहीं है बल्कि प्रभावित परिवारों तक सही जानकारी और सहायता पहुंचाने की भी है। रूस में भारतीय दूतावास लगातार संबंधित मामलों की निगरानी कर रहा है और रूसी अधिकारियों के साथ संपर्क बनाए हुए है। सरकार पहले भी भारतीयों को युद्ध से जुड़े जोखिम वाले नौकरी प्रस्तावों से सावधान रहने की सलाह दे चुकी है। रूसी सेना में भारतीय नागरिकों की भर्ती का मुद्दा अब दोनों देशों के बीच लगातार होने वाली कूटनीतिक बातचीत का हिस्सा बना हुआ है।
रूसी सेना में भारतीय नागरिकों की भर्ती का मामला रूस यूक्रेन युद्ध के बीच सामने आया था। कुछ भारतीय नागरिकों के रूसी सैन्य ढांचे से जुड़े होने की जानकारी पहले भी सामने आती रही है। सरकार ने अब 227 भारतीयों से जुड़ा आंकड़ा बताया है। इनमें 51 की मौत की जानकारी विशेष रूप से चिंता बढ़ाती है। वहीं 139 लोगों को सेवा से मुक्त कराया जा चुका है। सरकार की कोशिश है कि बचे हुए लोगों को भी जल्द रूस से बाहर निकालकर उनके परिवारों के पास पहुंचाया जाए और मामलों का समाधान कूटनीतिक माध्यम से किया जाए।
विदेश सचिव के मुताबिक भारत और रूस के बीच इस मुद्दे पर बातचीत लगातार जारी है। इसी दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की मुलाकात में दोनों देशों के संबंधों और वैश्विक हालात पर भी चर्चा हुई। मोदी ने युद्ध खत्म करने और शांति की दिशा में आगे बढ़ने की जरूरत पर जोर दिया। भारत रूस के साथ व्यापार और आर्थिक सहयोग बढ़ाने की कोशिश भी जारी रखे हुए है। ऐसे माहौल में भारतीय नागरिकों की सुरक्षित वापसी का मुद्दा दोनों देशों के संबंधों में अहम बना हुआ है।
अस्वीकरण (Disclaimer):
यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसियों और स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचना के उद्देश्य से किया गया है। रूसी सेना में शामिल भारतीय नागरिकों की संख्या और उनकी स्थिति सरकारी जानकारी पर आधारित है और मामलों की स्थिति समय के साथ बदल सकती है। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक किसी भी रूप में उत्तरदायी नहीं होंगे।
Author:अजय त्यागी
September 1, 2026: 2:01 PM
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