मुंबई, महाराष्ट्र। बाबुलालजी बाफना के दीक्षा संकल्प को लेकर आचार्य महाप्रज्ञ पब्लिक स्कूल में अभिनंदन समारोह आयोजित हुआ। कार्यक्रम आचार्य महाप्रज्ञ विद्यानिधि फाउंडेशन और श्री जैन श्वेतांबर तेरापंथी सभा, तेयुप तथा महिला मंडल दक्षिण मुंबई के संयुक्त तत्वावधान में हुआ। शासनश्री साध्वीश्री कंचनप्रभाजी, शासनश्री साध्वीश्री मंजुरेखाजी और सहवर्ती साध्वीवृंद का पावन सान्निध्य रहा। तेरापंथ महिला मंडल ने गीत के जरिए मंगलभावनाएं प्रेषित कीं और समाज के पदाधिकारियों ने संयम यात्रा के लिए शुभकामनाएं दीं।
शासनश्री साध्वीश्री कंचनप्रभाजी ने कहा कि बाबुलालजी बाफना अपने परिवार का गौरव बढ़ा रहे हैं। उन्होंने कहा कि जीवन के एक पड़ाव पर संसार का त्याग कर संयम का मार्ग चुनना वीरता और साहस का कार्य है। साध्वीश्री ने उनकी पत्नी प्रेमलता के साहस और प्रसन्नता की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि उपलब्ध सुख सुविधाओं का त्याग कर संयम स्वीकार करने का संकल्प जैन शासन की प्रभावना का प्रेरणादायी उदाहरण है। इस अवसर पर साध्वीवृंद ने भी गीत के माध्यम से दीक्षार्थी को मंगलकामनाएं दीं और उनके संकल्प की सराहना की।
शासनश्री साध्वीश्री मंजुरेखाजी ने बाबुलालजी बाफना को संयम यात्रा के लिए शुभकामनाएं देते हुए कहा कि उनकी यात्रा लगातार आगे बढ़ती रहे और वे जैन शासन की प्रभावना करें। उन्होंने अप्रमत्त जीवन जीने के साथ विनय और सद्व्यवहार को जीवन में प्रमुख स्थान देने की प्रेरणा दी। महिला मंडल अध्यक्षा लतिका डागलिया और सभा अध्यक्ष देवेंद्र डागलिया ने दक्षिण मुंबई के तेरापंथ समाज की ओर से मंगलकामनाएं प्रेषित कीं। समारोह में मौजूद श्रावक और श्राविकाओं ने भी दीक्षार्थी के भावी संयम जीवन के लिए अपनी शुभेच्छाएं व्यक्त कीं।
समारोह में आचार्य महाप्रज्ञ विद्यानिधि फाउंडेशन के अध्यक्ष कुंदनमल धाकड़, सभा मीडिया प्रभारी नितेश धाकड़, तेयुप सहमंत्री दीपक कच्छारा, उत्सव धाकड़ और फाउंडेशन से सुखलाल सियाल सहित अनेक कार्यकर्ता और श्रावक श्राविकाएं उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन सभा उपाध्यक्ष दिनेश धाकड़ ने किया। आयोजन के दौरान धार्मिक भावनाओं और संयम के प्रति सम्मान का माहौल दिखाई दिया। समाज के लोगों ने दीक्षार्थी के जीवन में आने वाले इस महत्वपूर्ण बदलाव को शुभ और प्रेरणादायी अवसर बताते हुए उनके संकल्प के सफल होने की कामना की।
बाबुलालजी बाफना के अभिनंदन समारोह में वक्ताओं ने संयम को केवल व्यक्तिगत निर्णय नहीं बल्कि आत्मिक साधना और अनुशासन से जुड़ा मार्ग बताया। साध्वीवृंद के सान्निध्य में हुए कार्यक्रम में त्याग, विनय और सद्व्यवहार जैसे मूल्यों पर विशेष जोर रहा। आयोजकों के अनुसार समाज की ओर से दी गई मंगलभावनाएं दीक्षार्थी के संकल्प को प्रोत्साहन देने वाली हैं। समारोह के समापन पर उपस्थित सभी लोगों ने उनके भावी संयम जीवन में आध्यात्मिक उन्नति, आत्मकल्याण और जैन शासन की प्रभावना की मंगलकामना की।
अस्वीकरण (Disclaimer):
यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसियों और स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचना के उद्देश्य से किया गया है। समारोह और इसमें व्यक्त विचारों से संबंधित जानकारी आयोजकों द्वारा उपलब्ध कराए गए विवरण पर आधारित है और धार्मिक परंपराओं तथा व्यक्तिगत आस्थाओं की व्याख्या व्यक्ति और समुदाय के अनुसार अलग हो सकती है। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक किसी भी रूप में उत्तरदायी नहीं होंगे।
Author:अजय त्यागी
September 1, 2026: 3:35 PM
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