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Rex TV India
Latest News राष्ट्रीय Digital Newsletter 01 Sep 2026 · 5:30 PM

छात्रों की FIR रद्द, सुप्रीम कोर्ट ने देशभर के मामलों पर रोक लगाई

जंतर मंतर पर सीजेपी का प्रदर्शन - File Photo

नई दिल्ली, दिल्ली। छात्रों की FIR रद्द करने का सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा आदेश दिया है। कोर्ट ने 20 से 25 जुलाई के बीच हुए छात्र प्रदर्शनों से जुड़े देशभर के मामलों को आगे नहीं बढ़ाने और उनकी जांच रोकने का निर्देश दिया। IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली 3 सदस्यीय पीठ ने संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत असाधारण शक्तियों का इस्तेमाल किया। अदालत ने कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन में शामिल युवाओं के भविष्य को देखते हुए पूर्ण न्याय के लिए यह कदम उठाया गया है।  [1]

देशभर में राहत का आदेश

सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली, बिहार, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल और असम से जुड़े मामलों में दर्ज FIR रद्द कर दीं। इसके साथ ही आदेश का दायरा पूरे देश तक बढ़ाते हुए कहा गया कि किसी अन्य राज्य या केंद्र शासित प्रदेश में इसी अवधि के प्रदर्शनों से जुड़े मामले भी आगे नहीं बढ़ाए जाएंगे। कोर्ट ने यह भी साफ कर दिया कि 20 से 25 जुलाई के प्रदर्शन से जुड़े मामलों में कोई नई FIR दर्ज नहीं की जाएगी। यानी जिन युवाओं पर केवल इन प्रदर्शनों के कारण आपराधिक कार्रवाई हुई थी उन्हें बड़ी कानूनी राहत मिली है।

हालांकि छात्रों की FIR से अदालत ने 2,873 ऐसे लोगों को इस राहत से अलग रखा है जिनके बारे में गंभीर आपराधिक पृष्ठभूमि होने की बात कही गई है। दिल्ली पुलिस को इनके खिलाफ एक FIR दर्ज करने की अनुमति दी गई है लेकिन कार्रवाई सिर्फ शारीरिक नुकसान और संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के आरोपों तक सीमित रहेगी। अदालत ने साफ किया कि इस अपवाद के तहत दर्ज होने वाली FIR भी संबंधित लोगों के कानूनी अधिकारों को प्रभावित नहीं करेगी। इस तरह सुप्रीम कोर्ट ने शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों और गंभीर आपराधिक आरोपों वाले मामलों के बीच स्पष्ट अंतर रखा है।

मुआवजे पर भी फैसला

सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि सरकार ने छात्रों के खिलाफ दर्ज मामलों को वापस लेने और आगे नई FIR नहीं दर्ज करने का आश्वासन दिया था। उन्होंने अकादमिक मुद्दों और NEET UG 2026 से जुड़े मामलों में आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को मुआवजा देने की प्रतिबद्धता भी दोहराई। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को 3 महीने के भीतर देशभर के लिए मुआवजा नीति तैयार करने का निर्देश दिया। इस नीति को राज्यों और संबंधित संस्थाओं के साथ साझा कर नियमित व्यवस्था के तौर पर लागू किया जाएगा।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद कॉकरोच जनता पार्टी ने 5 सितंबर को प्रस्तावित मार्च वापस लेने का फैसला किया। यह मार्च इंडिया गेट से नई दिल्ली पुलिस मुख्यालय तक प्रस्तावित था। संगठन की ओर से अदालत में मौजूद सह संयोजक सौरव दास ने सरकार के आश्वासन और अदालत के आदेश को देखते हुए मार्च वापस लेने की घोषणा की। अदालत ने साथ ही स्पष्ट किया कि अनुच्छेद 142 की असाधारण शक्ति का इस्तेमाल इस मामले की विशेष परिस्थितियों में किया गया है और इसे सामान्य मामलों के लिए बाध्यकारी मिसाल नहीं माना जाएगा। छात्रों की FIR रद्द होने से फिलहाल प्रदर्शन से जुड़े युवाओं को बड़ी राहत मिली है।

अस्वीकरण (Disclaimer):

यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसियों और स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचना के उद्देश्य से किया गया है। अदालत द्वारा दी गई राहत 20 से 25 जुलाई के प्रदर्शनों से जुड़े मामलों तक सीमित है और 2,873 लोगों से संबंधित कार्रवाई के लिए अलग प्रावधान किया गया है। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक किसी भी रूप में उत्तरदायी नहीं होंगे।

Rex TV India Author:अजय त्यागी September 1, 2026: 5:30 PM © 2026 Rex TV India Contact @ 91 6376887816 | rextvindia@gmail.com
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