नई दिल्ली, भारत। हाईवे टोल कलेक्शन में अगले वित्त वर्ष में तेज बढ़ोतरी का अनुमान है। आईसीआरए की रिपोर्ट के अनुसार 2027 से 2028 में राष्ट्रीय राजमार्गों पर टोल संग्रह 10 से 12 फीसदी बढ़ सकता है। इस दौरान ट्रैफिक ग्रोथ 4 से 5 फीसदी रहने का अनुमान है। वहीं 2026 से 2027 में टोल संग्रह की वृद्धि घटकर 7 से 9 फीसदी रह सकती है। IANS के अनुसार इसके पीछे धीमी ट्रैफिक वृद्धि और टोल दरों में कम संशोधन प्रमुख कारण होंगे। रिपोर्ट में निर्माण खनन और विनिर्माण क्षेत्र की गतिविधियों को हाईवे ट्रैफिक से भी जोड़ा गया है। [1]
हाईवे टोल कलेक्शन को लेकर आईसीआरए ने अनुमान लगाया है कि 2026 से 2027 में राष्ट्रीय राजमार्गों पर ट्रैफिक 4.5 से 5.5 फीसदी बढ़ सकता है। यह पिछले वित्त वर्ष के 6 फीसदी ट्रैफिक ग्रोथ अनुमान से कम है। इस अवधि में टोल दरों में 3.4 से 4 फीसदी की बढ़ोतरी का अनुमान है। रिपोर्ट के अनुसार निर्यात से जुड़े ट्रैफिक में चुनौतियों का असर भी वृद्धि पर पड़ सकता है। आईसीआरए के मुताबिक राष्ट्रीय राजमार्गों पर ट्रैफिक की चाल निर्माण खनन और विनिर्माण क्षेत्र के सकल मूल्य वर्धन से काफी हद तक जुड़ी रहती है।
वित्त वर्ष 2025 से 2026 में निर्माण खनन और विनिर्माण क्षेत्र का सकल मूल्य वर्धन 8.1 फीसदी बढ़ा था। इससे राष्ट्रीय राजमार्गों पर ट्रैफिक वृद्धि करीब 6 फीसदी रही और टोल कलेक्शन में 10 फीसदी की बढ़ोतरी हुई। आईसीआरए के कॉरपोरेट रेटिंग्स को ग्रुप हेड सुप्रियो बनर्जी के अनुसार इन क्षेत्रों की गतिविधियां हाईवे पर वाहनों की आवाजाही को प्रभावित करती हैं। रिपोर्ट का अनुमान है कि 2027 से 2028 में टोल दरों में ज्यादा संशोधन होने से हाईवे टोल कलेक्शन को अतिरिक्त सहारा मिल सकता है।
हाईवे टोल कलेक्शन की भविष्यवाणी में टोल दरों के अलावा सड़क निर्माण की रफ्तार भी अहम है। आईसीआरए के अनुसार सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय की ओर से 2026 से 2027 में सड़क निर्माण 9000 से 9500 किलोमीटर के बीच रह सकता है। यह 2025 से 2026 में पूरे हुए 9380 किलोमीटर के करीब है। रिपोर्ट में परियोजनाओं के अवॉर्ड में लंबे समय से जारी सुस्ती को इसका प्रमुख कारण बताया गया है। हालांकि नए प्रोजेक्ट अवॉर्ड में सुधार की उम्मीद है और 2026 से 2027 में यह 8000 से 8500 किलोमीटर तक पहुंच सकता है।
रिपोर्ट के अनुसार सरकार फिलहाल इंजीनियरिंग प्रोक्योरमेंट कंस्ट्रक्शन मॉडल को प्राथमिकता दे रही है। साथ ही निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ाने के लिए बिल्ड ऑपरेट ट्रांसफर टोल परियोजनाओं पर भी जोर बढ़ रहा है। संशोधित बीओटी मॉडल कंसेशन एग्रीमेंट से कंसेशन लेने वाली कंपनियों और कर्जदाताओं के जोखिम कम होने की उम्मीद है। इसमें ट्रैफिक कम रहने की स्थिति में राजस्व सहायता और परियोजना समाप्त करने से जुड़े प्रावधान शामिल हैं। आईसीआरए का मानना है कि बेहतर टोल संशोधन और स्थिर ट्रैफिक वृद्धि से आने वाले समय में हाईवे टोल कलेक्शन मजबूत रह सकता है।
अस्वीकरण (Disclaimer):
यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसियों और स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचना के उद्देश्य से किया गया है। हाईवे टोल कलेक्शन और ट्रैफिक वृद्धि से जुड़े आंकड़े आईसीआरए की रिपोर्ट में दिए गए अनुमान हैं और वास्तविक परिणाम आर्थिक परिस्थितियों यातायात मांग टोल दरों तथा सरकारी नीतियों के आधार पर अलग हो सकते हैं। यह रिपोर्ट निवेश या वित्तीय निर्णय की सिफारिश नहीं है। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक प्रकाशक एवं संपादक किसी भी रूप में उत्तरदायी नहीं होंगे।
Author:अजय त्यागी
September 2, 2026: 10:12 AM
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