बीकानेर, राजस्थान। ग्राम पंचायत नौरंगदेसर में 2 सितंबर 2026 को असली और नकली कीटनाशकों की पहचान को लेकर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित हुआ। भारत सरकार के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय से जुड़े टिड्डी और एकीकृत नाशीजीव प्रबंधन अनुसंधान केंद्र बीकानेर की ओर से हुए कार्यक्रम में किसानों और कृषि विभाग के अधिकारियों समेत करीब 50 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। किसानों को खरीदारी के दौरान सतर्क रहने और नकली कीटनाशक से बचने के लिए जरूरी सावधानियों की जानकारी दी गई।
कार्यक्रम का शुभारंभ कार्यालय प्रभारी अधिकारी सहायक निदेशक नवीन कुमार भार्गव ने किया। सहायक पौध संरक्षण अधिकारी मोनिका स्वामी ने किसानों को असली और नकली कीटनाशकों में अंतर समझाया। उन्होंने कहा कि किसान कीटनाशक हमेशा अधिकृत विक्रेता से सीलबंद पैकिंग में खरीदें और पक्का बिल जरूर लें। कार्यक्रम में उत्पाद की पहचान से जुड़े कुछ आसान तरीके भी बताए गए। किसानों को समझाया गया कि खरीद के समय पैकेट की स्थिति और उस पर दर्ज जरूरी जानकारी को ध्यान से देखना बेहद जरूरी है।
वैज्ञानिक सहायक जगतपाल सिंह जादौन ने कीटनाशक की प्रामाणिकता जांचने के लिए क्यूआर कोड, बारकोड, पंजीकरण संख्या और वैध नंबर के मिलान की अहमियत बताई। उन्होंने किसानों को राष्ट्रीय नाशीजीव निगरानी प्रणाली यानी NPSS मोबाइल ऐप की कार्यप्रणाली और उपयोग की जानकारी भी दी। सरकारी जानकारी के अनुसार यह प्रणाली फसलों में नाशीजीवों की पहचान, निगरानी और प्रबंधन संबंधी सहायता देने के लिए विकसित की गई है। इससे किसानों को कीट संबंधी समस्याओं को समझने और विशेषज्ञ सलाह तक पहुंच बनाने में मदद मिल सकती है।
कार्यक्रम में मुखराम गोदारा, छोगाराम और रतिराम कृकना समेत कई प्रमुख किसानों ने अपने विचार रखे। इसके बाद सहायक निदेशक नवीन कुमार भार्गव ने ट्राइकोडर्मा के माध्यम से बीज और भूमि उपचार की वैज्ञानिक तकनीक समझाई। उन्होंने किसानों से रसायनों के इस्तेमाल को जरूरत के मुताबिक सीमित करने और जैविक खेती की दिशा में आगे बढ़ने का आग्रह किया। कार्यक्रम का उद्देश्य केवल नकली कीटनाशक की पहचान बताना नहीं था बल्कि किसानों को सुरक्षित और वैज्ञानिक नाशीजीव प्रबंधन के प्रति जागरूक करना भी रहा।
नौरंगदेसर में आयोजित कार्यक्रम के दौरान किसानों को नकली कीटनाशक से बचने के लिए खरीदारी में सावधानी बरतने और उत्पाद की जानकारी जांचने का संदेश दिया गया। अधिकारियों ने प्रामाणिकता से जुड़े क्यूआर कोड, बारकोड और पंजीकरण विवरण देखने की सलाह दी। साथ ही राष्ट्रीय नाशीजीव निगरानी प्रणाली की जानकारी देकर डिजिटल माध्यम से फसल संबंधी समस्याओं की निगरानी की उपयोगिता समझाई गई। कार्यक्रम के अंत में किसानों को रसायनों पर निर्भरता घटाने और ट्राइकोडर्मा जैसी जैविक तकनीकों के इस्तेमाल के लिए प्रोत्साहित किया गया।
अस्वीकरण (Disclaimer):
यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसियों और स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचना के उद्देश्य से किया गया है। कीटनाशक की प्रामाणिकता के संबंध में अंतिम पुष्टि संबंधित अधिकृत विभाग या सक्षम प्रयोगशाला की जांच से ही मानी जानी चाहिए और किसी घरेलू तरीके को अंतिम प्रमाण नहीं माना जाना चाहिए। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक किसी भी रूप में उत्तरदायी नहीं होंगे।
Author:अजय त्यागी
September 2, 2026: 9:15 PM
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