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Rex TV India
Latest News समीक्षा Digital Newsletter 04 Sep 2026 · 3:09 PM

चीनी के दाम नरम पड़े, फिर भी मिठास महंगी, राहत के लिए अभी और इंतजार

प्रतीकात्मक फोटो

चीनी के दाम में नरमी जरूर आई है लेकिन आम ग्राहक के लिए यह राहत अभी आधी अधूरी कहानी है। देशभर में औसत खुदरा भाव 1 हफ्ते में 3.85 प्रतिशत घटकर 62.57 रुपये प्रति किलो हुआ है। सुनने में खबर मीठी लगती है लेकिन पेंच यह है कि पिछले महीने यही भाव 49.33 रुपये था। यानी कीमत नीचे आई है मगर जेब को अब भी पुरानी ऊंचाई का हिसाब चुकाना पड़ रहा है। बाजार का गणित ऐसा है कि दाम घटते ही राहत का बोर्ड लग जाता है लेकिन राहत घर पहुंचने में समय लगता है।  [1]

थोक में भी नरमी

थोक बाजार में भी चीनी के दाम में कुछ ठंडक दिखाई दी है। 2 सितंबर को चीनी का औसत थोक भाव 57.62 रुपये प्रति किलो रहा जबकि 1 हफ्ते पहले यह 60.39 रुपये था। यानी करीब 2.77 रुपये की कमी आई। सरकार ने बढ़ती कीमतों पर लगाम लगाने के लिए 10 लाख टन चीनी आयात की अनुमति दी है और स्टॉक रखने के नियम भी कड़े किए हैं। कागज पर कदम काफी दमदार हैं। अब देखना यह है कि इन कदमों की मिठास बाजार से निकलकर ग्राहक की रसोई तक कब पहुंचती है।

सरकार के इन उपायों का असर थोक बाजार में दिखने लगा है लेकिन खुदरा ग्राहक को पूरा फायदा तुरंत नहीं मिल रहा। वजह भी बाजार की अपनी कहानी है। कई दुकानदारों ने चीनी पहले ही महंगे भाव पर खरीदी है। अब अगर वे उसी स्टॉक को अचानक सस्ते भाव में बेचेंगे तो हिसाब किताब बिगड़ जाएगा। इसलिए बाजार में अजीब स्थिति है। ऊपर से भाव नरम और नीचे ग्राहक की उम्मीद गर्म। यानी राहत दरवाजे तक आ चुकी है लेकिन घंटी बजाने में अभी वक्त लग रहा है।

पुराना स्टॉक बना रोड़ा

उद्योग से जुड़े एक सूत्र के मुताबिक खुदरा कीमतों में साफ बदलाव दिखने में कम से कम 10 दिन लग सकते हैं। आम तौर पर दुकानदार के पास 10 से 15 बोरियां रहती हैं और एक बोरी करीब 50 किलो की होती है। जब तक यह महंगा पुराना माल बिक नहीं जाता तब तक नए सस्ते स्टॉक का फायदा ग्राहक को सीमित ही मिलेगा। यानी ग्राहक को कीमत घटने की खबर आज मिल सकती है लेकिन दुकान पर उसका असर देखने के लिए बाजार के पुराने हिसाब को निपटने का इंतजार करना पड़ेगा।

एक और पेंच उत्पादन का है। 2025-26 मार्केटिंग ईयर के लिए चीनी उत्पादन का अनुमान 343 लाख टन से घटाकर 306 लाख टन किया गया है। इसके बावजूद सरकार को फिलहाल घरेलू जरूरत के मुकाबले उपलब्धता में बड़ा संकट नहीं दिख रहा। सालाना घरेलू मांग करीब 280 से 285 लाख टन रहने का अनुमान है। ऐसे में अगले 10 दिन खास माने जा रहे हैं। चीनी के दाम में आई नरमी अगर नए सस्ते स्टॉक के साथ दुकानों तक पहुंची तो ग्राहक को सचमुच राहत मिल सकती है।

अस्वीकरण (Disclaimer):

यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसियों और स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचना के उद्देश्य से किया गया है। चीनी की कीमतें बाजार की मांग आपूर्ति स्टॉक और सरकारी नीतियों के अनुसार बदल सकती हैं इसलिए भविष्य के दाम की कोई निश्चित गारंटी नहीं है। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक प्रकाशक एवं संपादक किसी भी रूप में उत्तरदायी नहीं होंगे।

Rex TV India Author:अजय त्यागी September 4, 2026: 3:09 PM © 2026 Rex TV India Contact @ 91 6376887816 | rextvindia@gmail.com
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