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Rex TV India
Latest News समीक्षा Digital Newsletter 04 Sep 2026 · 3:29 PM

बाल मजदूरी पर शिकंजा, 3 महीने में 3800 से ज्यादा बच्चे हुए आजाद

प्रतीकात्मक फोटो

3800 से ज्यादा बच्चों का बचाया जाना सिर्फ एक सरकारी आंकड़ा नहीं है बल्कि उस व्यवस्था पर बड़ा सवाल है जहां बचपन की जगह बच्चों के हाथों में औजार थमा दिए जाते हैं। राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने 12 जून से 31 अगस्त तक विशेष अभियान चलाया और देशभर में बाल मजदूरी के खिलाफ कार्रवाई की। अभियान में 575 से ज्यादा FIR दर्ज हुईं। यानी जिन जगहों पर बच्चों से काम करवाना शायद रोज का सामान्य दृश्य समझ लिया गया था वहां अचानक कानून भी पहुंच गया और सवाल भी खड़े हो गए।  [1]

बचपन पर बड़ा वार

आयोग ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के साथ मिलकर फैक्ट्रियों, ईंट भट्ठों, निर्माण स्थलों, होटल, ढाबों, वर्कशॉप, बाजार और रेलवे स्टेशनों जैसे इलाकों को निशाना बनाया। इन जगहों पर बच्चों के शोषण और तस्करी का खतरा माना गया। बाल मजदूरी के खिलाफ अभियान में सिर्फ बच्चों को निकालना ही लक्ष्य नहीं था बल्कि उनके पुनर्वास, परिवार तक वापसी और शिक्षा से जोड़ने पर भी जोर दिया गया। मतलब बच्चा काम से बाहर आया तो कहानी खत्म नहीं होनी थी बल्कि असली परीक्षा उसके बाद शुरू होनी थी।

आंकड़ों में देखें तो उत्तर प्रदेश में 1480 बच्चों को बचाया गया जो सबसे ज्यादा है। इसके बाद राजस्थान में 804 और गुजरात में 630 बच्चों को अभियान के दौरान बचाया गया। बिहार में 183 और आंध्र प्रदेश में 147 बच्चों के बचाव की जानकारी सामने आई है। बाल मजदूरी के इन आंकड़ों की विडंबना यही है कि बचाए गए हर बच्चे के पीछे एक ऐसा बचपन है जो पढ़ने खेलने और सपने देखने के बजाय रोजी कमाने में लगा था। अब कम से कम इन बच्चों के लिए तस्वीर बदलने की कोशिश शुरू हुई है।

सिर्फ बचाव काफी नहीं

अभियान के दौरान राज्यों से बच्चों के बचाव के साथ FIR, पुनर्वास, परिवार को सौंपने, शिक्षा से जोड़ने और मुआवजे जैसी जानकारी भी मांगी गई। आयोग ने जिला प्रशासन के साथ बैठकें कर जमीनी अड़चनों की समीक्षा भी की। सोशल मीडिया और दूसरे माध्यमों से जागरूकता अभियान चलाकर लोगों से बाल श्रम की शिकायत करने की अपील की गई। बाल मजदूरी के खिलाफ कार्रवाई इसलिए भी अहम है क्योंकि किसी बच्चे को दुकान, कारखाने या ढाबे से निकाल देना तभी सार्थक होगा जब उसे दोबारा उसी चक्र में जाने से रोका जाए।

सरकारी अभियान का दूसरा पहलू निगरानी और समन्वय है। जिला मजिस्ट्रेट, श्रम विभाग, पुलिस और दूसरे विभागों को साथ लेकर कार्रवाई की गई ताकि सिर्फ छापेमारी तक मामला सीमित न रहे। 575 से ज्यादा FIR इस बात का संकेत देती हैं कि कई मामलों में कानूनी कार्रवाई भी आगे बढ़ी। फिर भी असली चुनौती लगातार निगरानी की है। बाल मजदूरी अक्सर वहीं लौट आती है जहां गरीबी, तस्करी और सस्ते श्रम की मांग मिलती है। इसलिए बच्चों को बचाने के साथ उस बाजार को भी बदलना होगा जो उनका बचपन खरीदने की कोशिश करता है।

अस्वीकरण (Disclaimer):

यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसियों और स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचना के उद्देश्य से किया गया है। बाल श्रम से जुड़े मामलों में कानूनी कार्रवाई संबंधित जांच और न्यायिक प्रक्रिया के अधीन है तथा अभियान के आंकड़े संबंधित सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार बदल सकते हैं। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक प्रकाशक एवं संपादक किसी भी रूप में उत्तरदायी नहीं होंगे।

Rex TV India Author:अजय त्यागी September 4, 2026: 3:29 PM © 2026 Rex TV India Contact @ 91 6376887816 | rextvindia@gmail.com
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