भीलवाड़ा, राजस्थान (पंकज पोरवाल)। भारत विकास परिषद के संस्कार अभियान के तहत 'भारत को जानो' अखिल भारतीय लिखित प्रतियोगिता में राजस्थान ने इस बार रिकॉर्ड कायम किया है। प्रदेश की 229 शाखाओं के जरिए 3,736 विद्यालयों के 6,06,973 विद्यार्थियों ने हिस्सा लिया। परिषद ने 5 लाख विद्यार्थियों का लक्ष्य रखा था लेकिन बच्चों की संख्या उससे एक लाख से भी ज्यादा आगे निकल गई। मतलब आयोजकों ने जितना सोचा था बच्चों ने उससे कहीं ज्यादा उत्साह दिखाई दिया और लक्ष्य को पीछे छोड़ते हुए ऐसा आंकड़ा खड़ा कर दिया जिसे अब आसानी से नजरअंदाज करना मुश्किल है।
भारत को जानो प्रतियोगिता में राजस्थान दक्षिण प्रांत ने 1,84,757 विद्यार्थियों की भागीदारी के साथ सबसे आगे रहते हुए पहला स्थान हासिल किया। दौसा शाखा ने 26,212 विद्यार्थियों की सहभागिता के साथ प्रदेश की सर्वश्रेष्ठ शाखा बनने का गौरव पाया। राजस्थान दक्षिण पूर्व प्रांत की सभी 40 शाखाओं में प्रतियोगिता आयोजित हुई और शत प्रतिशत सहभागिता दर्ज की गई। राजस्थान पूर्व प्रांत ने पिछले साल के मुकाबले 225 प्रतिशत की सबसे बड़ी वृद्धि दर्ज की। यानी बच्चों ने सिर्फ परीक्षा नहीं दी बल्कि आंकड़ों की दौड़ में भी खूब तेजी दिखाई।
राजस्थान उत्तर पूर्व पश्चिम और उत्तर प्रांतों ने भी 110 प्रतिशत से अधिक वृद्धि दर्ज की। राजस्थान मध्य प्रांत ने अपने निर्धारित लक्ष्य पूरे किए। पिछले वर्ष प्रतियोगिता में 4.58 लाख विद्यार्थी शामिल हुए थे जबकि इस बार यह आंकड़ा 6 लाख से अधिक पहुंच गया। करीब 6.25 लाख प्रश्नपत्र छपवाकर समय पर वितरित किए गए। इतनी बड़ी संख्या में प्रश्नपत्र पहुंचाना भी किसी परीक्षा से कम चुनौती नहीं रहा होगा। फर्क बस इतना रहा कि यहां प्रश्नपत्र बांटने वालों की परीक्षा किसी कक्षा में नहीं बल्कि पूरे प्रदेश के स्कूलों में हुई।
क्षेत्रीय अध्यक्ष राधेश्याम रंगा के अनुसार भारत विकास परिषद 1963 से सेवा संस्कार समर्पण और राष्ट्रीय चेतना के माध्यम से स्वस्थ समर्थ और संस्कारित भारत के निर्माण के लिए काम कर रही है। क्षेत्रीय महासचिव सीए संदीप बाल्दी ने बताया कि परिषद 2001 से राष्ट्रीय स्तर पर भारत को जानो प्रतियोगिता आयोजित कर रही है। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों में भारतीय संस्कृति गौरवशाली इतिहास राष्ट्रीय मूल्यों और राष्ट्रभक्ति की भावना विकसित करना है। यानी भारत को जानने की यह कवायद अब सिर्फ किताब के पन्नों तक सीमित नहीं रही बल्कि परीक्षा के सवालों के रास्ते भी बच्चों तक पहुंच रही है।
इस अभियान को राजस्थान सरकार शिक्षा विभाग स्थानीय प्रशासन और विद्यालयों का सहयोग मिला। शाखा से लेकर प्रांत और क्षेत्र तक कार्यकर्ताओं ने योजना और समन्वय के साथ प्रतियोगिता को आगे बढ़ाया। आयोजकों के मुताबिक इतनी बड़ी भागीदारी सामूहिक प्रयास का नतीजा है। व्यंग्य की गुंजाइश यहां भी है क्योंकि लक्ष्य 5 लाख का था और विद्यार्थियों ने उसे इतनी मजबूती से पार किया कि अगली बार लक्ष्य तय करने वालों को शायद पहले ही कैलकुलेटर की बैटरी बदलवानी पड़े। फिर भी उपलब्धि का असली महत्व संख्या से ज्यादा बच्चों तक पहुंची राष्ट्रीय चेतना में है।
प्रतियोगिता कक्षा 6 से 8 और कक्षा 9 से 12 के विद्यार्थियों के लिए चार चरणों में आयोजित होती है। शाखा प्रांत क्षेत्र और राष्ट्रीय स्तर के इन चरणों में लिखित परीक्षा के बाद आगे की प्रतियोगिताएं होंगी। क्षेत्रीय स्तर की प्रतियोगिता 22 नवंबर 2026 को भीलवाड़ा में आयोजित होगी। राष्ट्रीय स्तर का मुकाबला 17 जनवरी 2027 को गया बिहार में होगा। यानी राजस्थान ने लिखित परीक्षा में रिकॉर्ड जरूर बनाया है लेकिन अब अगली बारी उन विद्यार्थियों की है जो क्षेत्रीय मंच पर अपनी तैयारी और ज्ञान का दम दिखाएंगे।
अखिल भारतीय संस्कार गतिविधि संयोजक डॉ. त्रिभुवन शर्मा ने सफलता के पीछे कार्यकर्ताओं के समर्पण अनुशासन समन्वय और संगठन की सामूहिक शक्ति को अहम बताया। सह संयोजक मुकेश लाठी सहित राष्ट्रीय क्षेत्रीय और प्रांतीय पदाधिकारियों ने भी अभियान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। अब नजर भीलवाड़ा में होने वाली क्षेत्रीय प्रतियोगिता पर होगी। भारत को जानो का मकसद विद्यार्थियों में राष्ट्रप्रेम भारतीय संस्कृति के प्रति सम्मान और राष्ट्रीय चेतना मजबूत करना है। रिकॉर्ड बनना अच्छी शुरुआत है लेकिन अंतिम सफलता तब मानी जाएगी जब प्रतियोगिता के सवालों से निकली समझ बच्चों की सोच और व्यवहार में भी दिखाई दे।
अस्वीकरण (Disclaimer):
यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसियों और स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचना के उद्देश्य से किया गया है। प्रतियोगिता से जुड़े आंकड़े सहभागिता और आगामी आयोजन की तारीखें आयोजकों द्वारा उपलब्ध कराई गई जानकारी पर आधारित हैं और इनमें परिस्थितियों के अनुसार परिवर्तन संभव है। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक प्रकाशक एवं संपादक किसी भी रूप में उत्तरदायी नहीं होंगे।
Author:अजय त्यागी
September 4, 2026: 9:35 PM
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