चेन्नई, तमिलनाडु। चुनाव लड़ने पर रोक से जुड़ी बड़ी खबर सामने आई है। निर्वाचन आयोग ने पूर्व कांग्रेस विधायक जेएमएच आसन मौलाना के खिलाफ चुनावी खर्च से जुड़े मामले में कार्रवाई की है। आयोग के अनुसार 2021 के विधानसभा चुनाव के दौरान दर्ज किए गए कुछ खर्चों का पूरा विवरण सामने नहीं आया था। इसी आधार पर उन्हें चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य ठहराया गया है। यह मामला पुराने चुनावी खर्च के हिसाब से जुड़ा है और अब इसकी राजनीतिक गूंज भी तेज हो गई है। [1]
मामला 2021 के तमिलनाडु विधानसभा चुनाव से जुड़ा है। निर्वाचन आयोग की कार्रवाई की जड़ में करीब 33.05 लाख रुपये के उन विज्ञापनों का खर्च बताया गया है, जिन्हें चुनावी हिसाब में शामिल किए जाने को लेकर विवाद हुआ। ये विज्ञापन मार्च 2021 में क्षेत्रीय अखबारों में प्रकाशित हुए थे और उनमें मौलाना की तस्वीर तथा उनके पक्ष में मतदान की अपील थी। आयोग ने इसे उम्मीदवार से जुड़ा खर्च माना, जबकि मौलाना का कहना था कि विज्ञापनों का भुगतान तमिलनाडु कांग्रेस कमेटी ने किया था।
इस मामले में मौलाना पहले ही मद्रास हाईकोर्ट का रुख कर चुके थे। उन्होंने आयोग के नोटिस को चुनौती देते हुए कहा था कि विज्ञापन किसी एक उम्मीदवार के लिए नहीं बल्कि राज्यभर में गठबंधन के उम्मीदवारों के प्रचार अभियान का हिस्सा थे। उनके मुताबिक इसका खर्च पार्टी ने उठाया था और उन्होंने खुद विज्ञापनों को मंजूरी नहीं दी थी। 2025 में हाईकोर्ट ने उनकी याचिका पर आयोग से जवाब मांगा था। इसके बाद मामले की कानूनी स्थिति पर लगातार नजर बनी हुई थी। जिस पर चुनाव आयोग ने कार्रवाई करते हुए उनके चुनाव लड़ने पर रोक लगाई है।
चुनावी खर्च का सही हिसाब देना उम्मीदवार की अहम कानूनी जिम्मेदारी है। जनप्रतिनिधित्व कानून की धारा 77 और 78 में चुनाव खर्च का लेखा रखने और उसे जमा करने की व्यवस्था है। खर्च संबंधी नियमों का पालन नहीं होने पर धारा 10ए के तहत 3 साल तक चुनाव लड़ने से अयोग्यता हो सकती है। इसी कानूनी प्रावधान के तहत आयोग की कार्रवाई को देखा जा रहा है। हालांकि इस मामले में मौलाना की ओर से विज्ञापनों के भुगतान को लेकर अलग दावा किया गया था।
आसन मौलाना 2021 में वेलाचेरी सीट से कांग्रेस के टिकट पर विधायक चुने गए थे। 2026 के विधानसभा चुनाव में भी उन्होंने इसी सीट से कांग्रेस उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ा, लेकिन वे जीत नहीं सके। निर्वाचन आयोग के आधिकारिक नतीजों के मुताबिक उन्हें 45,928 वोट मिले और वे दूसरे स्थान पर रहे। अब चुनाव लड़ने पर रोक का फैसला उनके अगले चुनावी कदमों के लिए महत्वपूर्ण है। इस पूरे विवाद में खर्च का हिसाब और आयोग की कार्रवाई सबसे अहम मुद्दे बने हुए हैं।
अस्वीकरण (Disclaimer):
यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसियों और स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचना के उद्देश्य से किया गया है। चुनावी अयोग्यता और कानूनी कार्रवाई से जुड़े मामलों में अंतिम स्थिति संबंधित आधिकारिक आदेश और न्यायिक प्रक्रिया पर निर्भर हो सकती है। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक किसी भी रूप में उत्तरदायी नहीं होंगे।
Author:अजय त्यागी
September 5, 2026: 4:07 PM
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