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Rex TV India
Latest News बाज़ार और निवेश Digital Newsletter 06 Sep 2026 · 12:21 PM

यूरोप में भारतीय डीजल की बढ़ी मांग, रूस और अमेरिका की सप्लाई घटी 

प्रतीकात्मक फोटो

नई दिल्ली, भारत। यूरोप में भारतीय डीजल की अहमियत तेजी से बढ़ी है। अगस्त में बाब अल मंदेब से यूरोप जाने वाले डीजल के करीब 60% हिस्से की आपूर्ति भारतीय रिफाइनरियों ने की। IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, रूस की कमजोर होती सप्लाई और अमेरिका से घटते प्रवाह ने यूरोप के सामने ईंधन की नई चुनौती खड़ी कर दी है। इस रूट से अगस्त में करीब 200000 बैरल प्रतिदिन डीजल यूरोप जा रहा था और उसमें भारत की हिस्सेदारी करीब 60% रही।  [1]

भारत की ताकत

भारत की यह बढ़त उसकी विशाल रिफाइनिंग क्षमता से जुड़ी है। देश दुनिया का चौथा सबसे बड़ा रिफाइनर है और उसकी स्थापित क्षमता 258.1 मिलियन टन सालाना है। घरेलू मांग से ज्यादा क्षमता होने के कारण भारतीय कंपनियां अतिरिक्त पेट्रोलियम उत्पाद बाहर भेज सकती हैं। 2025 26 में भारत ने 61.5 मिलियन टन पेट्रोलियम उत्पादों का निर्यात किया था। यूरोप में भारतीय डीजल की बढ़ती मौजूदगी इसी निर्यात ताकत का नया उदाहरण है। लेकिन कच्चे तेल की उपलब्धता घटने से आगे यह रफ्तार बनाए रखना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। 

रूस कभी यूरोप के लिए डीजल का बड़ा स्रोत था, लेकिन अब वहां से समुद्री निर्यात बुरी तरह दबा हुआ है। अगस्त के पहले 25 दिनों में रूस का डीजल और गैसऑयल निर्यात औसतन करीब 150000 बैरल प्रतिदिन रहा, जो एक साल पहले से लगभग 610000 बैरल कम था। यह पांच साल के मौसमी औसत से 81% नीचे था। यूक्रेनी ड्रोन हमलों ने रूसी रिफाइनरियों और निर्यात ढांचे को नुकसान पहुंचाया है। जुलाई और अगस्त में रिफाइनरियों पर 32 हमले दर्ज किए गए। 

रूस की कमी

अमेरिकी सप्लाई भी यूरोप की जरूरत पूरी करने में पहले जैसी मजबूत नहीं दिख रही। अगस्त में अमेरिका ने यूरोप के क्षेत्र से बाहर आने वाले समुद्री डीजल आयात का करीब आधा हिस्सा दिया, लेकिन महीने के दूसरे हिस्से में उसकी खेपें लगभग 35% घट गईं। ऐसे में यूरोप के लिए पूर्वी रास्ते से आने वाली आपूर्ति का महत्व बढ़ गया है। यहीं भारत की भूमिका और अहम हो जाती है। कच्चे तेल की उपलब्धता भारत में भी लगातार दबाव में है, इसलिए आगे यूरोप की मांग पूरी करना भारतीय रिफाइनरियों के लिए बड़ा संतुलन होगा। 

आने वाले महीनों में तस्वीर आसान नहीं है। भारत में अगस्त के दौरान कच्चे तेल और कंडेनसेट की आवक घटकर करीब 3.8 मिलियन बैरल प्रतिदिन रही, जबकि एक साल पहले यह 4.8 मिलियन बैरल प्रतिदिन थी। यूरोप सर्दियों की मांग की ओर बढ़ रहा है और वहां रिफाइनरियों के रखरखाव से सप्लाई पर दबाव बढ़ सकता है। ऐसे माहौल में यूरोप में भारतीय डीजल का महत्व और बढ़ सकता है, लेकिन यह निर्भर करेगा कि भारत को पर्याप्त कच्चा तेल और सुरक्षित समुद्री रास्ते कितनी आसानी से मिलते हैं। 

अस्वीकरण (Disclaimer):

यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसियों और स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचना के उद्देश्य से किया गया है। वैश्विक डीजल आपूर्ति और समुद्री व्यापार से जुड़े आंकड़े डेटा ट्रैकिंग पर आधारित हैं और बाजार की स्थिति बदलने पर इनमें बदलाव संभव है। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक किसी भी रूप में उत्तरदायी नहीं होंगे।

Rex TV India Author:अजय त्यागी September 6, 2026: 12:21 PM © 2026 Rex TV India Contact @ 91 6376887816 | rextvindia@gmail.com
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