चेम्बूर, महाराष्ट्र। तेरापंथ महिला मंडल चेम्बूर की ओर से आचार्य श्री महाश्रमण जी की विदुषी शिष्या साध्वी श्री निर्वाण श्रीजी ठाणा 6 के सानिध्य में सामूहिक आयम्बिल अनुष्ठान हुआ। कार्यक्रम की शुरुआत नमस्कार महामंत्र के जाप से हुई। साध्वी श्री निर्वाण श्रीजी ने आयम्बिल को अनासक्ति का प्रयोग बताते हुए अस्वाद के जरिए संयम साधने की प्रेरणा दी। आयोजन में श्रद्धा के साथ शामिल हुए भाई बहनों ने तप और त्याग का संदेश आत्मसात किया।
साध्वी श्री निर्वाण श्रीजी ने कहा कि जीवन में लंबे समय की तपस्या के साथ एक दिन अस्वाद का अभ्यास भी जरूरी है। उन्होंने आयम्बिल के जरिए स्वाद पर नियंत्रण और मन को संयमित करने की भावना समझाई। इस दौरान साध्वी श्री योगक्षेम प्रभाजी ने श्रीकृष्ण और द्वारिका से जुड़ी घटना का वर्णन करते हुए आयम्बिल तप के प्रभाव का प्रसंग सुनाया। धार्मिक प्रसंगों और साध्वीश्री के मार्गदर्शन ने कार्यक्रम में मौजूद श्रद्धालुओं को तप की गहराई और आध्यात्मिक साधना का महत्व समझाया।
इसके बाद साध्वी श्री निर्वाण श्रीजी ने उपस्थित लोगों को प्रेक्षाध्यान का प्रयोग भी करवाया। ध्यान और आयम्बिल की साधना के इस मेल से वातावरण में आध्यात्मिक ऊर्जा का अनुभव हुआ। कार्यक्रम में शामिल भाई बहनों ने उत्साह और श्रद्धा के साथ अनुष्ठान में सहभागिता निभाई। आयोजकों के अनुसार सामूहिक रूप से तप करने से साधना के प्रति प्रेरणा और सामूहिक जुड़ाव दोनों मजबूत होते हैं। इसी भावना के साथ चेम्बूर में आयोजित यह कार्यक्रम आत्मसंयम और त्याग की सीख देने वाला रहा।
आयोजन की खास बात यह रही कि इसमें केवल बहनों ने ही नहीं बल्कि पुरुषों ने भी तप साधना में सहभागिता निभाई। तेरापंथ सभा चेम्बूर के अध्यक्ष लक्ष्मण जी कोठारी और मंत्री दिलीप जी मेहता सहित अन्य भाइयों ने आयम्बिल तप किया। इससे कार्यक्रम का स्वरूप सामूहिक बना और परिवार तथा समाज के अलग अलग वर्गों में आध्यात्मिक साधना का संदेश पहुंचा। उपस्थित लोगों ने साध्वीश्री के प्रेरणापाथेय को श्रद्धा से ग्रहण किया और तप के माध्यम से आत्मिक शुद्धि की भावना को आगे बढ़ाया।
तेरापंथ सभा भवन चेम्बूर में हुआ यह सामूहिक आयम्बिल अनुष्ठान श्रद्धा, तप, त्याग और आध्यात्मिक ऊर्जा से भरपूर रहा। आयोजन ने यह संदेश दिया कि धार्मिक साधना केवल व्यक्तिगत अभ्यास तक सीमित नहीं बल्कि सामूहिक प्रेरणा का माध्यम भी बन सकती है। साध्वी श्री निर्वाण श्रीजी के मार्गदर्शन में हुए इस कार्यक्रम ने चेम्बूर के श्रावक श्राविका समाज को संयम और अनासक्ति की दिशा में प्रेरित किया। सामूहिक आयम्बिल के जरिए श्रद्धालुओं ने तप के साथ आत्मनियंत्रण और आध्यात्मिक निर्जरा की भावना को मजबूत किया।
अस्वीकरण (Disclaimer):
यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसियों और स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचना के उद्देश्य से किया गया है। धार्मिक आयोजन और आध्यात्मिक विचारों से संबंधित विवरण उपलब्ध आयोजकीय जानकारी के आधार पर प्रस्तुत किए गए हैं। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक किसी भी रूप में उत्तरदायी नहीं होंगे।
Author:अजय त्यागी
September 6, 2026: 10:30 PM
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