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Rex TV India
Latest News राष्ट्रीय Digital Newsletter 07 Sep 2026 · 9:59 AM

निजी भागीदारी बढ़ेगी, लेकिन ISRO का निजीकरण नहीं होगा

प्रतीकात्मक फोटो

बेंगलुरु, कर्नाटक। ISRO ने 6 सितंबर को जारी स्पष्टीकरण में साफ कहा कि ISRO का निजीकरण नहीं होगा और उसकी अहमियत भी कम नहीं की जाएगी। एजेंसी ने बताया कि वह भारत में उन्नत अंतरिक्ष अनुसंधान और तकनीकी विकास, राष्ट्रीय और रणनीतिक मिशनों, अंतरिक्ष विज्ञान तथा खोज अभियानों की प्रमुख संस्था बनी रहेगी। निजी क्षेत्र को आगे लाने का मकसद ISRO की भूमिका घटाना नहीं है। बल्कि इससे संगठन को अगली पीढ़ी की तकनीक और जटिल राष्ट्रीय मिशनों पर ज्यादा ध्यान देने का मौका मिलेगा।  [1]

निजी क्षेत्र बढ़ा

भारत ने 2020 में अंतरिक्ष क्षेत्र को निजी कंपनियों के लिए खोलने की दिशा में सुधार शुरू किए थे। Indian Space Policy 2023 ने इस व्यवस्था को आगे बढ़ाया। ISRO के मुताबिक उद्योग, स्टार्टअप और अकादमिक संस्थानों को अंतरिक्ष की पूरी वैल्यू चेन में भागीदारी का मौका देने से देश की क्षमता बढ़ेगी। परिपक्व तकनीकों का बड़े स्तर पर उत्पादन उद्योग कर सकता है, जबकि ISRO उन्नत अनुसंधान और नई तकनीक पर ज्यादा संसाधन लगाएगा। इसका उद्देश्य संस्था को हटाना नहीं बल्कि पूरे अंतरिक्ष क्षेत्र को बड़ा और प्रतिस्पर्धी बनाना है।

मामला तब चर्चा में आया जब ISRO के 9 कर्मचारी संगठनों ने 4 सितंबर को अध्यक्ष वी नारायणन को पत्र लिखकर स्थिति स्पष्ट करने की मांग की। संगठनों ने पूछा कि निर्माण और संचालन से जुड़े काम निजी कंपनियों या सार्वजनिक उपक्रमों को दिए जाने के बाद ISRO की वास्तविक भूमिका क्या होगी। ISRO का निजीकरण होने से कर्मचारियों ने मौजूदा सेवा, भविष्य की भर्ती और संगठन की तकनीकी क्षमता को लेकर भी सवाल उठाए। उनकी चिंता खास तौर पर इस बात पर थी कि कहीं ISRO को केवल शोध तक सीमित न कर दिया जाए।

अगली दिशा साफ

ISRO ने कहा है कि भविष्य में उसका फोकस उन क्षेत्रों पर और मजबूत होगा जहां उसकी वैज्ञानिक विशेषज्ञता सबसे ज्यादा जरूरी है। इसमें अत्याधुनिक शोध, मानव अंतरिक्ष उड़ान, अगली पीढ़ी के लॉन्च सिस्टम, गहरे अंतरिक्ष और ग्रहों से जुड़े मिशन तथा रणनीतिक क्षमताएं शामिल हैं। एजेंसी संचार, नेविगेशन और पृथ्वी अवलोकन के लिए उन्नत पेलोड, सेंसर और प्रणोदन जैसी तकनीकों पर भी काम जारी रखेगी। वहीं नियमित और परिपक्व प्रणालियों के उत्पादन को उद्योग बड़े पैमाने पर संभाल सकता है।

भारत के Space Vision 2047 में 2035 तक भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन स्थापित करने और 2040 तक किसी भारतीय को चंद्रमा पर भेजने जैसे बड़े लक्ष्य शामिल हैं। इन अभियानों के लिए उन्नत तकनीक और मजबूत औद्योगिक क्षमता दोनों की जरूरत होगी। इसलिए निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ाने की नीति आगे भी जारी रह सकती है। लेकिन ISRO का निजीकरण होने का दावा और अंतरिक्ष क्षेत्र में निजी कंपनियों की भागीदारी एक ही बात नहीं है। ISRO ने साफ किया है कि उसकी केंद्रीय भूमिका बनी रहेगी और वह भविष्य की कठिन तकनीकी चुनौतियों पर काम करता रहेगा।

अस्वीकरण (Disclaimer):

यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसियों और स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचना के उद्देश्य से किया गया है। निजी क्षेत्र की भागीदारी और ISRO की भविष्य की जिम्मेदारियों से जुड़े नीतिगत बदलाव संबंधित सरकारी निर्णयों और आधिकारिक घोषणाओं पर निर्भर होंगे। निजीकरण से संबंधित दावों को ISRO के 6 सितंबर 2026 के आधिकारिक स्पष्टीकरण के आधार पर प्रस्तुत किया गया है। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक किसी भी रूप में उत्तरदायी नहीं होंगे।

Rex TV India Author:अजय त्यागी September 7, 2026: 9:59 AM © 2026 Rex TV India Contact @ 91 6376887816 | rextvindia@gmail.com
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