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Rex TV India
Latest News स्वास्थ्य Digital Newsletter 07 Sep 2026 · 1:06 PM

पॉलिमर तकनीक से नई उम्मीद, दवा प्रतिरोधी बैक्टीरिया पर बड़ा प्रयोग

प्रतीकात्मक फोटो

चेन्नई, तमिलनाडु। पॉलिमर तकनीक को लेकर आईआईटी मद्रास के शोधकर्ताओं ने एक अहम उपलब्धि हासिल की है। संस्थान ने ऐसी जीवाणुरोधी सतह विकसित की है जो एंटीबायोटिक, कीटाणुनाशक या दूसरे रसायनों के इस्तेमाल के बिना बैक्टीरिया को भौतिक तरीके से नष्ट कर सकती है। पीटीआई की एक रिपोर्ट के अनुसार, इस तकनीक को पेटेंट मिल चुका है और इसका मकसद रोगाणुरोधी प्रतिरोध की बढ़ती चुनौती से निपटने के लिए एक अलग रास्ता तैयार करना है। शोध के नतीजे एसीएस एप्लाइड बायोमैटेरियल्स में प्रकाशित हुए हैं।  [1]

नैनो सतह का असर

शोधकर्ताओं ने लचीले और प्रत्यारोपण योग्य सिलिकॉन पर बेहद छोटी नैनो संरचनाएं तैयार की हैं। बैक्टीरिया जब इस सतह के संपर्क में आते हैं तो नैनो संरचनाओं से उन पर यांत्रिक दबाव पड़ता है। इससे उनकी कोशिका दीवार कमजोर होकर टूट जाती है और बैक्टीरिया नष्ट हो जाते हैं। इस प्रक्रिया की खास बात यह है कि सतह पर किसी अतिरिक्त जीवाणुरोधी रसायन की जरूरत नहीं पड़ती। शोध में कम दबाव वाले प्लाज्मा की विशेष प्रक्रिया का इस्तेमाल कर सिलिकॉन पर घनी नैनो उभार वाली संरचना तैयार की गई।

इस तकनीक की जांच 3 अलग बैक्टीरिया प्रजातियों पर की गई। शोधकर्ताओं के अनुसार जैव परत बनने की प्रक्रिया में 68 प्रतिशत से अधिक कमी देखी गई। वहीं स्तनधारी कोशिकाओं के परीक्षण में इंजीनियर्ड सतह पर 91 प्रतिशत तक कोशिकाएं जीवित पाई गईं। वैज्ञानिकों ने कंप्यूटरी मॉडलिंग के जरिए यह समझने की कोशिश भी की कि बैक्टीरिया की कोशिका दीवार को तोड़ने के लिए नैनो संरचनाओं की कितनी ऊंचाई जरूरी है। इन नतीजों से तकनीक की प्रभावशीलता और जैव अनुकूलता को लेकर शुरुआती उम्मीद बनी है।

दवा प्रतिरोध से मुकाबला

रोगाणुरोधी प्रतिरोध दुनिया भर में एक गंभीर स्वास्थ्य चुनौती बन रहा है। कई बैक्टीरिया समय के साथ सामान्य दवाओं के खिलाफ ज्यादा मजबूत हो रहे हैं। पॉलिमर तकनीक आधारित यह सतह बैक्टीरिया को दवा से कमजोर करने के बजाय सीधे भौतिक दबाव से नष्ट करने की कोशिश करती है। शोधकर्ताओं के मुताबिक इस तरीके का फायदा यह हो सकता है कि बैक्टीरिया को दवा के संपर्क में लाकर प्रतिरोध पैदा करने की प्रक्रिया से बचा जा सके। हालांकि इस संभावना को व्यापक चिकित्सा उपयोग से पहले आगे के परीक्षणों से साबित करना होगा।

तकनीक के संभावित इस्तेमाल का दायरा भी बड़ा बताया गया है। शोधकर्ताओं के मुताबिक भविष्य में ऐसी सतहों का इस्तेमाल मूत्र कैथेटर, चिकित्सकीय प्रत्यारोपण, घावों से जुड़े उत्पादों, अस्पताल के उपकरणों और दवा पैकेजिंग में किया जा सकता है। सार्वजनिक स्थानों पर बार बार छुई जाने वाली सतहों में भी इसका इस्तेमाल संभव माना जा रहा है। इससे रासायनिक जीवाणुरोधी पदार्थों के इस्तेमाल और उनसे जुड़े संभावित जोखिम को कम करने का रास्ता खुल सकता है। हालांकि हर क्षेत्र में उपयोग से पहले अलग सुरक्षा जांच जरूरी होगी।

आगे की संभावनाएं

पॉलिमर तकनीक से विकसित इस सतह की एक अहम विशेषता मानव कोशिकाओं के साथ इसकी शुरुआती अनुकूलता है। शोधकर्ताओं ने फाइब्रोब्लास्ट कोशिकाओं पर परीक्षण कर सतह की जैव अनुकूलता का आकलन किया। परिणाम उत्साहजनक जरूर हैं लेकिन इन्हें सीधे किसी स्वीकृत चिकित्सकीय उपचार का विकल्प नहीं माना जा सकता। बड़े पैमाने पर इस्तेमाल से पहले सुरक्षा, प्रभावशीलता और नियामकीय मानकों पर विस्तृत परीक्षण जरूरी होंगे। आईआईटी मद्रास की यह खोज फिर भी ऐसी जीवाणुरोधी सतह विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है जो रसायनों के बजाय भौतिक तरीके से बैक्टीरिया पर असर डालती है।

अस्वीकरण (Disclaimer):

यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसियों और स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचना के उद्देश्य से किया गया है। यह तकनीक अभी शोध और विकास के स्तर से जुड़ी उपलब्ध जानकारी पर आधारित है और इसके व्यापक चिकित्सकीय उपयोग को अंतिम स्वीकृत उपचार नहीं माना जाना चाहिए। किसी भी स्वास्थ्य संबंधी निर्णय के लिए योग्य चिकित्सकीय विशेषज्ञ और अधिकृत संस्थान की सलाह लेना जरूरी है। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक किसी भी रूप में उत्तरदायी नहीं होंगे।

Rex TV India Author:अजय त्यागी September 7, 2026: 1:06 PM © 2026 Rex TV India Contact @ 91 6376887816 | rextvindia@gmail.com
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