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Rex TV India
Latest News समीक्षा Digital Newsletter 08 Sep 2026 · 9:30 AM

साक्षरता की चुनौती: 739 मिलियन लोगों तक शिक्षा क्यों नहीं -अजय त्यागी 

प्रतीकात्मक फोटो

अंतरराष्ट्रीय साक्षरता दिवस हर साल 8 सितंबर को मनाया जाता है। 2026 में यह दिन खास इसलिए है क्योंकि UNESCO की ओर से इसे घोषित किए जाने के 60 साल पूरे हो रहे हैं। इस मौके पर दुनिया के सामने साक्षरता की चुनौती के रूप में एक बड़ा सवाल भी खड़ा है। प्रगति के बावजूद कम से कम 739 मिलियन युवा और वयस्क अब भी बुनियादी साक्षरता से दूर हैं। UNESCO के अनुसार साक्षरता सिर्फ पढ़ने लिखने की क्षमता नहीं बल्कि गरिमा और मानव अधिकार से जुड़ा मुद्दा है।

60 साल की यात्रा

साक्षरता को लेकर दुनिया ने पिछले छह दशकों में काफी प्रगति की है। UNESCO के मुताबिक आज दुनिया की 88 प्रतिशत से ज्यादा वयस्क आबादी पढ़ और लिख सकती है जबकि 1975 में यह हिस्सेदारी करीब 65 प्रतिशत थी। फिर भी तस्वीर पूरी तरह संतोषजनक नहीं है। करोड़ों लोगों के लिए अक्षर ज्ञान अब भी दूर की चीज बना हुआ है। यही वजह है कि साक्षरता की चुनौती को केवल स्कूलों तक सीमित करके नहीं देखा जा सकता। इसमें वयस्क शिक्षा, रोजगार, डिजिटल समझ और सामाजिक भागीदारी भी शामिल हैं।

थीम में संदेश

2026 के अंतरराष्ट्रीय साक्षरता दिवस की थीम लोगों, धरती और समृद्धि के लिए साक्षरता है। इसका सीधा संदेश यह है कि पढ़ना लिखना सीखना सिर्फ परीक्षा पास करने का जरिया नहीं है। साक्षर व्यक्ति अपने अधिकारों को बेहतर समझ सकता है और रोजगार तथा सामाजिक फैसलों में ज्यादा प्रभावी तरीके से भाग ले सकता है। डिजिटल दौर ने साक्षरता का मतलब और बड़ा कर दिया है। अब जानकारी को समझना, सही और गलत सूचना में फर्क करना और तकनीक का जिम्मेदारी से इस्तेमाल करना भी जरूरी कौशल बन चुका है।

739 मिलियन वंचित 

UNESCO के ताजा आंकड़े बताते हैं कि 2024 में कम से कम 739 मिलियन युवा और वयस्क बुनियादी साक्षरता कौशल से वंचित थे। यह आंकड़ा इसलिए भी गंभीर है क्योंकि शिक्षा की कमी का असर व्यक्ति की पूरी जिंदगी पर पड़ सकता है। नौकरी पाने से लेकर सरकारी योजनाओं का लाभ उठाने तक कई कामों में पढ़ने लिखने की क्षमता जरूरी होती है। महिलाओं और कमजोर सामाजिक समूहों पर इसका असर और गहरा हो सकता है। इसलिए साक्षरता की चुनौती असल में अवसरों की असमानता से भी जुड़ जाती है।

बच्चों की तस्वीर अहम

साक्षरता की चर्चा केवल वयस्कों तक सीमित नहीं है। UNESCO के अनुसार दुनिया के कई हिस्सों में बच्चे अभी भी पढ़ने की न्यूनतम क्षमता हासिल नहीं कर पा रहे हैं। 2023 में 272 मिलियन बच्चे और किशोर स्कूल से बाहर थे। इसका मतलब है कि सिर्फ स्कूल में दाखिला बढ़ाना पर्याप्त नहीं होगा। बच्चों को ऐसी शिक्षा चाहिए जिससे वे पढ़ने समझने और आगे सीखने की मजबूत बुनियाद बना सकें। यही वह जगह है जहां शुरुआती शिक्षा और बुनियादी साक्षरता किसी भी देश के भविष्य को तय करने में अहम भूमिका निभाती है।

भारत की रणनीति

भारत में वयस्क साक्षरता को आगे बढ़ाने के लिए ULLAS यानी Understanding of Lifelong Learning for All in Society महत्वपूर्ण पहल है। शिक्षा मंत्रालय के अनुसार यह योजना 15 वर्ष और उससे अधिक उम्र के उन लोगों पर केंद्रित है जिन्हें पर्याप्त औपचारिक शिक्षा नहीं मिल सकी। इसमें बुनियादी साक्षरता और अंक ज्ञान के साथ जरूरी जीवन कौशल, बुनियादी शिक्षा, व्यावसायिक कौशल और आगे की शिक्षा जैसे हिस्से शामिल हैं। इसका उद्देश्य लोगों को सिर्फ अक्षर ज्ञान देना नहीं बल्कि उन्हें समाज और विकास की मुख्यधारा से जोड़ना भी है।

NEP से जुड़ा लक्ष्य

ULLAS को राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 की सोच के अनुरूप लागू किया जा रहा है। इसका जोर ऐसे शिक्षा तंत्र पर है जिसमें बुनियादी पढ़ने लिखने और अंक ज्ञान को मजबूत आधार माना जाए। भारत के लिए चुनौती सिर्फ निरक्षरता कम करना नहीं बल्कि बदलती अर्थव्यवस्था और डिजिटल दुनिया के मुताबिक सीखने की क्षमता बढ़ाना भी है। मोबाइल फोन और इंटरनेट ने जानकारी तक पहुंच आसान की है लेकिन हर व्यक्ति उस जानकारी को समझ पाए यह अपने आप तय नहीं होता। यहां साक्षरता की चुनौती डिजिटल समझ से भी जुड़ जाती है।

सिर्फ अक्षर ज्ञान काफी नहीं

आज के समय में किसी व्यक्ति का साक्षर होना केवल उसका नाम पढ़ लेना या लिख लेना भर नहीं है। उसे बैंकिंग, स्वास्थ्य, सरकारी सेवाओं और डिजिटल प्लेटफॉर्म से जुड़ी सामान्य जानकारी भी समझनी पड़ती है। गलत सूचना तेजी से फैलने के दौर में सूचना की जांच करना भी जरूरी हो गया है। इसी वजह से भविष्य की साक्षरता में पढ़ने लिखने के साथ डिजिटल और जीवन कौशल की भूमिका बढ़ती जा रही है। दुनिया की बदलती जरूरतें बता रही हैं कि शिक्षा को उम्र के किसी एक पड़ाव तक सीमित रखना अब पर्याप्त नहीं है।

आगे क्या 

अंतरराष्ट्रीय साक्षरता दिवस की 60वीं वर्षगांठ सिर्फ उपलब्धियों का जश्न मनाने का अवसर नहीं बल्कि कमियों को पहचानने का भी समय है। दुनिया में लाखों लोगों तक बुनियादी शिक्षा नहीं पहुंच पाना बताता है कि सरकारी योजनाओं के साथ समाज की भागीदारी भी जरूरी है। भारत में ULLAS जैसी योजनाएं इसी दिशा में काम कर रही हैं। असली सफलता तब मानी जाएगी जब पढ़ना लिखना हर व्यक्ति के लिए सम्मान, रोजगार, अधिकार और बेहतर जीवन का रास्ता बने। यही साक्षरता की चुनौती को अवसर में बदलने की सबसे बड़ी कुंजी होगी।

अस्वीकरण (Disclaimer):

यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसियों और स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचना के उद्देश्य से किया गया है। इसमें दिए गए वैश्विक साक्षरता आंकड़े UNESCO द्वारा उपलब्ध कराए गए आंकड़ों पर आधारित हैं और समय के साथ इनमें संशोधन हो सकता है। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक किसी भी रूप में उत्तरदायी नहीं होंगे।

Rex TV India Author:अजय त्यागी September 8, 2026: 9:30 AM © 2026 Rex TV India Contact @ 91 6376887816 | rextvindia@gmail.com
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