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Rex TV India
Latest News राजस्थान Digital Newsletter 08 Sep 2026 · 9:41 PM

पर्यूषण महोत्सव के पहले दिन मिली संयम और आत्मविकास की सीख

पर्यूषण महोत्सव

बीकानेर, राजस्थान। बीकानेर जैन श्वेताम्बर तेरापंथी सभा के तत्वावधान में युगप्रधान आचार्य श्री महाश्रमणजी की सुशिष्या शासनश्री साध्वीश्री मंजुप्रभा जी के सान्निध्य में पर्यूषण महोत्सव का शुभारंभ हुआ। पहले दिन धर्मसभा में साध्वी गुरुयशाजी ने भगवान महावीर की वाणी विपाकसूत्र आगम के माध्यम से कर्मों के स्वरूप और उनके फल की चर्चा की। उन्होंने कहा कि मनुष्य अपने कर्मों का फल भोगता है और राग द्वेष कर्म बंधन के प्रमुख कारण हैं। ऐसे में आत्मचिंतन और संयम से जीवन को बेहतर दिशा दी जा सकती है।

कर्मों को समझने की सीख

साध्वी गुरुयशाजी ने बताया कि विपाक की दृष्टि से कर्म शुभ और अशुभ दो प्रकार के होते हैं। उन्होंने समझाया कि इस महापर्व के दौरान व्यक्ति राग और द्वेष का अल्पीकरण करके कर्मों के जाल को सुलझाने का प्रयास कर सकता है। पहले से बंधे पाप कर्मों को त्याग, तपस्या, संयम और साधना के साथ शुभ भावों और शुभ योगों के जरिए पुण्य में बदलने की दिशा में प्रयास किया जा सकता है। उनके संदेश में आत्मसंयम को जीवन सुधारने का महत्वपूर्ण माध्यम बताया गया। श्रद्धालुओं ने धर्मसभा में इन विचारों को ध्यानपूर्वक सुना।

खाद्य संयम पर जोर

साध्वी जयंतप्रभाजी ने इस महापर्व को आत्मदर्शन, आत्ममंथन, आत्मविकास और आत्मकल्याण का पर्व बताया। उन्होंने कहा कि व्यक्ति को स्वयं को वोट देकर अपने जीवन की खोट निकालने का प्रयास करना चाहिए। पहले दिन को खाद्य संयम के रूप में मनाया गया। उन्होंने भोजन क्यों, कैसे, कब, कहां और कितना करना चाहिए, इस विषय पर आध्यात्मिक टिप्स दिए। साथ ही जंक फूड और फास्ट फूड का सेवन कम करने की प्रेरणा दी। संदेश यही रहा कि भोजन में संयम शरीर के साथ मन और जीवनशैली को भी संतुलित बनाने में मदद कर सकता है।

महावीर के जीवन से संदेश

शासनश्री साध्वी मंजुप्रभा जी ने भगवान महावीर के जीवन चरित्र पर प्रकाश डालते हुए कहा कि तीर्थंकर प्रभु राग द्वेष से मुक्त होते हैं और उनकी वाणी सर्वमंगलकारी तथा हितकारी होती है। उन्होंने कालचक्र के बारे में बताते हुए कहा कि इसके उत्सर्पिणी काल और अवसर्पिणी काल दो विभाग होते हैं और दोनों कालखंडों के 6 6 विभाग माने गए हैं। उन्होंने श्रद्धालुओं को भगवान महावीर के जीवन और संदेश से प्रेरणा लेते हुए आत्मसाधना की दिशा में आगे बढ़ने का आह्वान किया। धर्मसभा में आध्यात्मिक विषयों पर श्रद्धालुओं को विस्तार से समझाया गया।

चातुर्मास की बताई वजह

साध्वी मंजुप्रभा जी ने चातुर्मास की परंपरा और उसके पीछे अहिंसा की भावना को भी समझाया। उन्होंने कहा कि जैन श्रमण अहिंसा के पुजारी होते हैं और उनकी जीवनचर्या अहिंसा प्रधान रहती है। वर्षा ऋतु में जीव जंतुओं की संख्या बढ़ जाती है और इस दौरान उनके प्रति हिंसा की आशंका को देखते हुए सामान्य तौर पर विहार चर्या वर्जित रहती है। इसी कारण जैन श्रमण वर्षावास के दौरान 4 महीने तक एक ही स्थान पर रहते हैं। इस महापर्व में आत्मसाधना, धर्माराधना, त्याग और तपस्या के लिए विशेष प्रेरणा दी गई।

साधना और संयम का संदेश

पर्यूषण महोत्सव के पहले दिन की धर्मसभा में सैकड़ों श्रावक और श्राविकाएं उपस्थित रहे। पूरे आयोजन में कर्म, आत्ममंथन, भोजन संयम, अहिंसा और साधना जैसे विषयों पर श्रद्धालुओं को जीवन उपयोगी संदेश दिए गए। साध्वीवृंद ने पर्व को केवल धार्मिक आयोजन तक सीमित न रखते हुए इसे आत्मसुधार और आत्मविकास का अवसर बनाने की प्रेरणा दी। श्रद्धालुओं को राग द्वेष कम करने, संयम अपनाने और त्याग तपस्या के माध्यम से जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने का संदेश मिला। इससे पर्यूषण महोत्सव की आध्यात्मिक भावना और अधिक गहरी हुई।

अस्वीकरण (Disclaimer):

यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसियों और स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचना के उद्देश्य से किया गया है। धार्मिक मान्यताओं और आध्यात्मिक विचारों को संबंधित परंपरा और वक्ताओं के कथनों के संदर्भ में प्रस्तुत किया गया है। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक किसी भी रूप में उत्तरदायी नहीं होंगे।

Rex TV India Author:अजय त्यागी September 8, 2026: 9:41 PM © 2026 Rex TV India Contact @ 91 6376887816 | rextvindia@gmail.com
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