बीकानेर, राजस्थान। सरदार पटेल मेडिकल कॉलेज के नेत्र विभाग ने 25 अगस्त 2026 से 8 सितंबर 2026 तक 41वें राष्ट्रीय नेत्रदान पखवाड़े का आयोजन किया। इस दौरान आमजन को नेत्रदान के महत्व की जानकारी देने के साथ इससे जुड़ी भ्रांतियों और आशंकाओं को दूर करने के लिए जागरूकता गतिविधियां कराई गईं। विभागाध्यक्ष एवं वरिष्ठ आचार्य डॉ. जय श्री मुरली मनोहर ने कहा कि एक व्यक्ति के नेत्रदान से 2 लोगों के जीवन में रोशनी लाई जा सकती है। उन्होंने नेत्रदान को महान मानवीय कार्य बताते हुए समाज में इसके प्रति व्यापक जागरूकता की जरूरत बताई। देशभर में यह पखवाड़ा 25 अगस्त से 8 सितंबर तक जागरूकता और मृत्यु के बाद नेत्रदान का संकल्प लेने के लिए मनाया जाता है।
डॉ. जय श्री मुरली मनोहर ने बताया कि सरदार पटेल मेडिकल कॉलेज के नेत्र विभाग में नेत्रदान और नेत्र प्रत्यारोपण का काम भी सुचारू रूप से संचालित किया जा रहा है। उन्होंने आमजन से आगे आकर इस पुण्य कार्य में सहभागिता निभाने की अपील की। उन्होंने बताया कि कोई भी व्यक्ति अस्पताल समय के दौरान नेत्र विभाग में पहुंचकर नेत्रदान के लिए संकल्प पत्र प्राप्त कर सकता है और उसे भरकर जमा कर सकता है। पखवाड़े के दौरान विभाग की ओर से लोगों को यह समझाने की कोशिश की गई कि नेत्रदान को लेकर समाज में मौजूद कई भ्रांतियों को तथ्य और सही जानकारी के जरिए दूर किया जा सकता है। इसी उद्देश्य से विशेष जागरूकता बैनर का लोकार्पण भी किया गया। नेत्रदान की यह पहल जरूरतमंद लोगों तक दृष्टि का उपहार पहुंचाने की सोच को आगे बढ़ाती है।
जागरूकता कार्यक्रम के दौरान विभागाध्यक्ष डॉ. जय श्री मुरली मनोहर के साथ डॉ. अनिल चौहान, डॉ. विमला बेनीवाल, डॉ. नवदीप कौर और डॉ. ख्याति यादव मौजूद रहे। विभाग की गतिविधियों में चिकित्सकीय टीम के साथ रेजिडेंट चिकित्सकों और नर्सिंग स्टाफ ने भी सक्रिय भूमिका निभाई। नर्सिंग ऑफिसर महिपाल नेहरा सहित अन्य नर्सिंग अधिकारियों ने कार्यक्रम को सफल बनाने में सहयोग किया। नेत्रदान परामर्शदाता विजेंद्र सिंह ने लोगों को नेत्रदान से जुड़ी जानकारी और संकल्प प्रक्रिया समझाने में भूमिका निभाई। कंप्यूटर ऑपरेटर हिमांशु ने भी आयोजन की व्यवस्थाओं में महत्वपूर्ण सहयोग दिया। देश में चल रहे 41वें राष्ट्रीय नेत्रदान पखवाड़े का उद्देश्य भी लोगों को नेत्रदान के बारे में सही जानकारी देना, संकल्प के लिए प्रेरित करना और कॉर्निया की जरूरत तथा उपलब्धता के बीच अंतर कम करने की दिशा में जागरूकता बढ़ाना है।
सरदार पटेल मेडिकल कॉलेज के नेत्र विभाग की यह पहल केवल एक पखवाड़े तक जागरूकता फैलाने तक सीमित नहीं बल्कि लोगों को नेत्रदान के बारे में सही जानकारी देकर भविष्य में संकल्प लेने के लिए प्रेरित करने की कोशिश है। डॉ. मुरली मनोहर ने साफ कहा कि नेत्रदान एक महान मानवीय कार्य है और इसके लिए समाज की भागीदारी जरूरी है। सरकारी स्वास्थ्य जानकारी के अनुसार एक दाता की आंखों से 2 दृष्टिबाधित लोगों को लाभ मिल सकता है, जबकि नेत्रदान का वास्तविक उद्देश्य कॉर्निया की जरूरत वाले मरीजों तक दृष्टि बहाल करने की संभावना पहुंचाना है। ऐसे में नेत्रदान से रोशनी का संदेश सिर्फ अभियान का हिस्सा नहीं बल्कि मृत्यु के बाद भी किसी दूसरे व्यक्ति के जीवन में उजाला छोड़ जाने की मानवीय सोच बनकर सामने आया।
अस्वीकरण (Disclaimer):
यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसियों और स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचना के उद्देश्य से किया गया है। नेत्रदान और नेत्र प्रत्यारोपण से जुड़े चिकित्सकीय निर्णय योग्य चिकित्सकों तथा अधिकृत नेत्र बैंक की सलाह और निर्धारित चिकित्सा प्रक्रिया के अनुसार ही लिए जाने चाहिए। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक किसी भी रूप में उत्तरदायी नहीं होंगे।
Author:अजय त्यागी
September 9, 2026: 9:56 PM
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