भीलवाड़ा, राजस्थान (पंकज पोरवाल)। गणेश उत्सव की तैयारियों के बीच बाजारों में तैयार प्रतिमाओं की खरीदारी हो रही है, लेकिन सखी स्टूडियो और डिवाइन ऊर्जा ग्रुप की सखियों ने इस बार उत्सव को अलग अंदाज दिया। निजी रेस्टोरेंट में आयोजित इको फ्रेंडली गणेश कार्यशाला में 15 प्रतिभागियों ने बच्चों के साथ मिलकर मिट्टी के गणेश बनाए। किसी ने मिट्टी को आकार दिया तो किसी ने अपनी कल्पना और भावनाओं को प्रतिमा में उतारा। देखते ही देखते साधारण मिट्टी आस्था के प्रतीक में बदल गई। मिट्टी के गणेश बनाते हुए प्रतिभागियों ने भक्ति के साथ प्रकृति बचाने का संदेश भी दिया।
कार्यशाला में भक्ति और रचनात्मकता के साथ पर्यावरण संरक्षण को सबसे ज्यादा महत्व दिया गया। प्रतिभागियों ने अपने हाथों से प्रतिमाएं गढ़ीं और उन्हें देखकर उनके चेहरों पर खुशी साफ नजर आई। आयोजन का मकसद लोगों को यह समझाना था कि गणेश उत्सव की खुशी प्रकृति की कीमत पर मनाना जरूरी नहीं है। मिट्टी की प्रतिमा बनाकर उत्सव को पर्यावरण से जोड़ा जा सकता है। बच्चों की भागीदारी ने इस पहल को और खास बना दिया। उनके लिए यह केवल धार्मिक प्रतिमा बनाने की गतिविधि नहीं थी, बल्कि रचनात्मकता के साथ पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी समझने का मौका भी रहा।
कार्यशाला में तैयार प्रतिमाओं की रचनात्मकता का मूल्यांकन करने के लिए श्रीमती नीलम काबरा और श्रीमती रिंकू अग्रवाल को निर्णायक के रूप में आमंत्रित किया गया। उत्कृष्ट रचनात्मकता के लिए तीन प्रतिभागियों को विशेष पुरस्कार भी दिए गए। प्रथम पुरस्कार रेखा शर्मा को, द्वितीय पुरस्कार चेतना जागेटिया को और तृतीय पुरस्कार पायल अजमेरी को मिला। पुरस्कारों ने प्रतिभागियों के उत्साह को और बढ़ाया। आयोजन में यह संदेश भी उभरा कि जब धार्मिक आस्था के साथ कला और पर्यावरण संरक्षण जुड़ते हैं तो उत्सव का स्वरूप ज्यादा सार्थक बन सकता है। इस पहल ने लोगों को अपने हाथों से प्रतिमा बनाने के लिए प्रेरित किया।
कार्यक्रम में रेखा लढा, चेतना जागेटिया, रेखा शर्मा, सरोज लढा, पायल अजमेरा, शिवानी समदानी, सोनिका जागेटिया, सोनल सोमानी, अंजली बांगड़, सोनाली अजमेरा, आरती तोषनीवाल, रेनू समदानी और सोनल दरगड़ सहित सखी स्टूडियो की सखियों की उपस्थिति रही। आयोजन के दौरान सभी ने मिलकर गणेश प्रतिमा निर्माण की प्रक्रिया में हिस्सा लिया। मिट्टी को गढ़ने से लेकर प्रतिमा को अंतिम रूप देने तक प्रतिभागियों ने उत्साह दिखाया। इस दौरान कार्यशाला में मौजूद बच्चों ने भी बड़ों के साथ हाथ बंटाया। इससे कार्यक्रम में परिवार और समुदाय की भागीदारी का भाव दिखाई दिया और पर्यावरण अनुकूल उत्सव का संदेश सहज तरीके से सामने आया।
आयोजकों की इस पहल का उद्देश्य गणेश उत्सव के जरिए पर्यावरण संरक्षण और इको फ्रेंडली प्रतिमाओं के प्रति जागरूकता बढ़ाना रहा। प्रतिभागियों ने संदेश दिया कि मिट्टी से प्रतिमा बनाकर और उसका प्राकृतिक तरीके से विसर्जन करके उत्सव की खुशी के साथ प्रकृति को भी सुरक्षित रखा जा सकता है। मिट्टी के गणेश की इस पहल में धार्मिक आस्था के साथ कला, परिवार की भागीदारी और पर्यावरण की चिंता एक साथ दिखाई दी। बाजार से प्रतिमा खरीदने की सामान्य परंपरा के बीच अपने हाथों से प्रतिमा गढ़ने का अनुभव प्रतिभागियों के लिए यादगार बना। यही संदेश इस कार्यशाला को खास बनाता है।
अस्वीकरण (Disclaimer):
यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसियों और स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचना के उद्देश्य से किया गया है। पर्यावरण संरक्षण और प्राकृतिक विसर्जन से जुड़े प्रभाव स्थानीय परिस्थितियों और अपनाई गई विधि पर निर्भर कर सकते हैं। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक किसी भी रूप में उत्तरदायी नहीं होंगे।
Author:अजय त्यागी
September 10, 2026: 10:12 PM
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