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Rex TV India
Latest News दिल्ली Digital Newsletter 11 Sep 2026 · 12:37 PM

अमेरिका भारत युद्धाभ्यास में नई तकनीक से बढ़ेगी दोनों सेनाओं की ताकत

प्रतीकात्मक फोटो

नई दिल्ली, दिल्ली। अमेरिका भारत युद्धाभ्यास का 22वां संस्करण 10 सितंबर से शुरू हो गया है और यह 28 सितंबर तक चलेगा। TOI की एक रिपोर्ट के अनुसार, इस साल के सैन्य अभ्यास की सबसे बड़ी खासियत पहली बार काउंटर ड्रोन सिस्टम का इस्तेमाल है। भारतीय और अमेरिकी सेनाएं बदलते युद्धक्षेत्र में ड्रोन से पैदा होने वाले खतरे से निपटने की तकनीक और रणनीति पर साथ काम कर रही हैं। अभ्यास राजस्थान के बीकानेर और उत्तराखंड के औली में आयोजित किया जा रहा है। इससे दोनों सेनाओं के बीच परिचालन तालमेल को और मजबूत करने की कोशिश साफ दिखती है।   [1]

ड्रोन पर पहली ट्रेनिंग

अमेरिका भारत युद्धाभ्यास में काउंटर ड्रोन सिस्टम को पहली बार शामिल किया जाना बदलते सैन्य माहौल का बड़ा संकेत है। आधुनिक युद्ध में छोटे ड्रोन निगरानी से लेकर हमले तक कई भूमिकाओं में इस्तेमाल हो रहे हैं। ऐसे में उन्हें समय रहते पहचानने और खतरा बनने से पहले रोकने की क्षमता बेहद अहम हो गई है। दोनों सेनाएं इस अभ्यास में अपनी तकनीक और अनुभव साझा करेंगी। इससे सैनिकों को वास्तविक परिस्थितियों जैसी चुनौती में एक दूसरे की कार्यप्रणाली समझने का मौका मिलेगा। अभ्यास का मकसद केवल हथियारों की ट्रेनिंग नहीं बल्कि संयुक्त अभियान की क्षमता बढ़ाना भी है।

अमेरिका भारत युद्धाभ्यास को लेकर अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने कहा कि दोनों सेनाएं एक दूसरे से सीख रही हैं और साथ मिलकर भरोसा तथा क्षमताएं मजबूत कर रही हैं। यह बयान अभ्यास के व्यापक उद्देश्य को सामने रखता है। भारत और अमेरिका के बीच रक्षा सहयोग पिछले वर्षों में लगातार बढ़ा है और ऐसे संयुक्त अभ्यास दोनों देशों की सेनाओं को एक दूसरे के करीब लाने में मदद करते हैं। साथ ट्रेनिंग करने से संचार, योजना और मैदान पर तालमेल बेहतर होता है। यही क्षमता किसी साझा सुरक्षा चुनौती के दौरान दोनों देशों के लिए उपयोगी साबित हो सकती है।

दो जगहों पर अभ्यास

इस साल का सैन्य अभ्यास राजस्थान और उत्तराखंड की अलग अलग भौगोलिक परिस्थितियों में हो रहा है। बीकानेर का इलाका रेगिस्तानी परिस्थितियों में सैन्य तैयारी का अनुभव देता है जबकि औली का पहाड़ी वातावरण अलग तरह की चुनौती पेश करता है। इससे दोनों सेनाओं को अलग परिस्थितियों में अपनी रणनीति और तकनीक परखने का मौका मिलेगा। अभ्यास में आधुनिक युद्धक तकनीक के साथ सैनिकों की संयुक्त कार्यक्षमता पर भी ध्यान दिया जा रहा है। काउंटर ड्रोन तकनीक की पहली एंट्री इसे इस संस्करण का सबसे अहम आकर्षण बनाती है और भविष्य की सैन्य जरूरतों की दिशा भी दिखाती है।

अमेरिका भारत युद्धाभ्यास में ड्रोन रोधी तकनीक का इस्तेमाल ऐसे समय हो रहा है जब दुनिया भर के संघर्षों में ड्रोन की भूमिका तेजी से बढ़ी है। इसलिए दोनों सेनाओं के लिए ऐसी तकनीक को समझना और उसके खिलाफ प्रभावी प्रतिक्रिया विकसित करना अहम हो गया है। संयुक्त प्रशिक्षण से दोनों पक्ष अपने अनुभव साझा कर सकते हैं और संभावित खतरों से निपटने की तैयारी बेहतर कर सकते हैं। 28 सितंबर तक चलने वाला यह अभ्यास भारत अमेरिका रक्षा साझेदारी के साथ आधुनिक युद्ध की बदलती जरूरतों पर भी फोकस करता है। इससे भविष्य के संयुक्त अभियानों के लिए दोनों सेनाओं का भरोसा और तालमेल मजबूत होने की उम्मीद है।

अस्वीकरण (Disclaimer):

यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसियों और स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचना के उद्देश्य से किया गया है। सैन्य अभ्यास में इस्तेमाल होने वाली तकनीक और संचालन संबंधी गतिविधियों में बदलाव संभव है तथा अभ्यास की जानकारी को वास्तविक युद्धक क्षमता का अंतिम आकलन नहीं माना जाना चाहिए। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक किसी भी रूप में उत्तरदायी नहीं होंगे।

Rex TV India Author:अजय त्यागी September 11, 2026: 12:37 PM © 2026 Rex TV India Contact @ 91 6376887816 | rextvindia@gmail.com
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