वेल्लोर, तमिलनाडु। चर्च की छत गिरने से निर्माण स्थल पर अचानक अफरा तफरी मच गई। हादसा गुरुवार रात को कटपाडी के पास मंडी कृष्णापुरम में निर्माणाधीन चर्च में हुआ। मजदूर छत पर कंक्रीट डालने का काम कर रहे थे तभी करीब 20 फुट ऊंचा स्टील स्कैफोल्डिंग और सपोर्ट ढांचा अचानक ढह गया। इसके नीचे कई मजदूर दब गए। हादसे में 3 लोगों की मौत हुई और 11 मजदूर घायल हुए। घायलों को वेल्लोर के सरकारी मेडिकल कॉलेज अस्पताल, क्रिश्चियन मेडिकल कॉलेज अस्पताल और पड़ोसी आंध्र प्रदेश के चित्तूर स्थित अस्पतालों में भेजा गया। [विडियो] [1]
घटना की सूचना मिलते ही जिला प्रशासन, पुलिस और दमकल विभाग की टीमें मौके पर पहुंचीं। मलबे में फंसे मजदूरों को बाहर निकालने के लिए राहत अभियान शुरू किया गया। अरक्कोनम से राष्ट्रीय आपदा मोचन बल की टीम भी मौके पर पहुंची और बचाव कार्य में शामिल हुई। भारी कंक्रीट और मलबे के बीच फंसे लोगों को निकालना चुनौतीपूर्ण था। जिला कलेक्टर पी एस लीला एलेक्स भी मौके पर मौजूद रहीं और बचाव अभियान की निगरानी की। अधिकारियों के मुताबिक कम से कम 8 घायल मजदूरों की हालत स्थिर बताई गई है। बाकी घायलों का अलग अलग अस्पतालों में इलाज कराया जा रहा है।
इस हादसे में जान गंवाने वालों की पहचान जॉन के रूप में हुई है जो बेंगलुरु के रहने वाले 39 वर्षीय बिल्डिंग कॉन्ट्रैक्टर थे। उनके अलावा आंध्र प्रदेश से आए 45 वर्षीय दिहाड़ी मजदूर इमैनुएल और 45 वर्षीय सैमुअल की भी मौत हुई। हादसे के वक्त निर्माण स्थल पर कई मजदूर मौजूद थे। अचानक चर्च की छत गिरने से उन्हें संभलने का मौका नहीं मिला। राहत दलों ने मलबा हटाकर घायलों को बाहर निकाला और तुरंत अस्पताल पहुंचाया। प्रशासन ने घटना के बाद पूरे निर्माण स्थल की स्थिति और वहां अपनाए जा रहे सुरक्षा इंतजामों पर भी ध्यान देना शुरू कर दिया है।
प्रशासन अब यह पता लगाने में जुटा है कि निर्माणाधीन ढांचा अचानक क्यों गिरा। जिला कलेक्टर ने कहा कि संरचनात्मक विफलता के सही कारण का पता लगाने के लिए एक समिति बनाई जाएगी। यह भी जांच की जाएगी कि चर्च के निर्माण के लिए बिल्डर के पास जरूरी मंजूरियां और भवन निर्माण से जुड़े परमिट थे या नहीं। हादसे के बाद निर्माण स्थल की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठना स्वाभाविक है। खासकर तब जब मजदूर छत डालने जैसे जोखिम वाले काम में लगे थे। जांच समिति की रिपोर्ट से यह साफ हो सकेगा कि ढांचा गिरने के पीछे तकनीकी खामी, सुरक्षा में लापरवाही या कोई अन्य वजह थी।
चर्च की छत गिरने से निर्माण स्थलों पर मजदूरों की सुरक्षा का सवाल भी सामने आ गया। निर्माण कार्य के दौरान ऊंचाई पर भारी कंक्रीट डालने में मजबूत सपोर्ट और सुरक्षित स्कैफोल्डिंग बेहद जरूरी होती है। इस हादसे ने यह सवाल खड़ा किया है कि मौके पर सुरक्षा मानकों का कितना पालन किया जा रहा था। फिलहाल प्रशासन ने बचाव अभियान पूरा करने के साथ घटना के कारणों की जांच की तैयारी शुरू कर दी है। 3 लोगों की मौत और 11 के घायल होने के बाद अब निगाह जांच समिति की रिपोर्ट पर रहेगी। उसी से हादसे की असली वजह और जिम्मेदारी का पता चलेगा।
अस्वीकरण (Disclaimer):
यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसियों और स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचना के उद्देश्य से किया गया है। निर्माण स्थल पर हादसे की वास्तविक वजह जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी और किसी व्यक्ति या संस्था की जिम्मेदारी तय करना जांच के निष्कर्षों पर निर्भर करेगा। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक किसी भी रूप में उत्तरदायी नहीं होंगे।
Author:अजय त्यागी
September 11, 2026: 2:04 PM
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