नई दिल्ली, दिल्ली। मोदी को पुतिन का न्योता मिला और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे स्वीकार कर लिया है। रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने प्रधानमंत्री मोदी को 24वीं भारत रूस वार्षिक शिखर बैठक के लिए रूस आने का आमंत्रण दिया है। प्रधानमंत्री ने निमंत्रण स्वीकार करते हुए कहा कि बैठक की तारीख दोनों देशों की आपसी सुविधा और राजनयिक माध्यमों से तय की जाएगी। दोनों नेताओं ने नई दिल्ली में हुई बैठक के दौरान व्यापार को 2030 तक 100 अरब डॉलर तक पहुंचाने के लक्ष्य पर चर्चा की। रक्षा, ऊर्जा, महत्वपूर्ण खनिज और उर्वरक आपूर्ति जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर भी जोर दिया गया। [1]
मोदी को पुतिन का न्योता ऐसे समय आया है जब भारत और रूस के बीच उच्चस्तरीय संपर्क लगातार जारी है। दोनों नेताओं की यह इस साल की दूसरी मुलाकात थी। इससे पहले प्रधानमंत्री मोदी और पुतिन बिश्केक में शंघाई सहयोग संगठन की बैठक के दौरान मिले थे। नई दिल्ली की बैठक में दोनों देशों ने आर्थिक सहयोग को और मजबूत करने पर चर्चा की। 2030 तक 100 अरब डॉलर का द्विपक्षीय व्यापार लक्ष्य तय किया गया है। इसके लिए ऊर्जा, रक्षा और औद्योगिक क्षेत्रों के साथ महत्वपूर्ण खनिज और उर्वरक आपूर्ति में सहयोग बढ़ाने पर भी ध्यान दिया जा रहा है।
आगामी रूस यात्रा में इन मुद्दों को और आगे बढ़ाने की उम्मीद है। दोनों देशों के बीच लंबे समय से रणनीतिक साझेदारी रही है और बदलते वैश्विक हालात में इसका महत्व और बढ़ा है। भारत रूस के साथ ऊर्जा और रक्षा संबंधों को बनाए रखने के साथ व्यापार और निवेश के नए रास्ते तलाश रहा है। रूस भी भारतीय बाजार में अपनी आर्थिक मौजूदगी बढ़ाना चाहता है। ऐसे में वार्षिक शिखर बैठक दोनों देशों को लंबित मुद्दों पर सीधे बातचीत और नए समझौतों की दिशा तय करने का अवसर दे सकती है।
बैठक में यूक्रेन युद्ध और पश्चिम एशिया के संघर्ष समेत अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर भी चर्चा हुई। पुतिन ने यूक्रेन की मौजूदा स्थिति और शांति प्रयासों के बारे में प्रधानमंत्री मोदी को जानकारी दी। भारत ने संघर्षों के समाधान के लिए बातचीत और कूटनीति के जरिए रास्ता निकालने की अपनी नीति दोहराई। दोनों नेताओं ने पश्चिम एशिया और काला सागर क्षेत्र की स्थिति पर भी विचार साझा किए। इन क्षेत्रों में बढ़ता तनाव समुद्री व्यापार, ऊर्जा आपूर्ति और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर असर डाल रहा है। इसलिए भारत और रूस के बीच उच्चस्तरीय संवाद को रणनीतिक नजरिए से भी अहम माना जा रहा है।
मोदी को पुतिन का न्योता स्वीकार होने के बाद अब अगली भारत रूस वार्षिक शिखर बैठक की तारीख पर नजर रहेगी। तारीख दोनों देशों की आपसी सुविधा और राजनयिक माध्यमों से तय होगी। रूस यात्रा में व्यापार, ऊर्जा, रक्षा और औद्योगिक सहयोग के साथ मौजूदा अंतरराष्ट्रीय संकटों पर भी बातचीत होने की संभावना है। 100 अरब डॉलर के व्यापार लक्ष्य को हासिल करना दोनों देशों के आर्थिक एजेंडे में प्रमुख मुद्दा रहेगा। अब सवाल यह है कि आगामी बैठक में इस लक्ष्य को आगे बढ़ाने के लिए कौन से ठोस कदम सामने आते हैं और भारत रूस साझेदारी बदलती वैश्विक परिस्थितियों में किस दिशा में बढ़ती है।
अस्वीकरण (Disclaimer):
यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसियों और स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचना के उद्देश्य से किया गया है। भारत रूस वार्षिक शिखर बैठक की तारीख अभी तय नहीं हुई है और भविष्य के कार्यक्रम में बदलाव संभव है। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक किसी भी रूप में उत्तरदायी नहीं होंगे।
Author:अजय त्यागी
September 12, 2026: 10:51 AM
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