कानपुर, उत्तर प्रदेश। 5600 करोड़ की ठगी के आरोप ने कानपुर में साइबर अपराध के बड़े नेटवर्क की तस्वीर सामने ला दी है। पुलिस ने इस मामले में बेकनगंज के शाहवेज वारिस और चमनगंज के सलमान को हैदराबाद से गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक दोनों पर ऑनलाइन गेमिंग, क्रिकेट सट्टा, निवेश और डिजिटल अरेस्ट जैसे तरीकों से लोगों को निशाना बनाने वाले नेटवर्क से जुड़े होने का आरोप है। शाहवेज को हैदराबाद की अदालत में पेश करने के बाद 48 घंटे की ट्रांजिट रिमांड पर कानपुर लाया गया। उसकी निशानदेही पर सलमान की गिरफ्तारी हुई। पुलिस अब दोनों से पूछताछ कर नेटवर्क की परतें खोल रही है। [1]
जांच में सामने आया है कि आरोपियों ने करीब 76 बोगस फर्में तैयार कर रखी थीं। इन फर्मों और उनसे जुड़े बैंक खातों के जरिये कथित 5600 करोड़ की ठगी की रकम को अलग अलग खातों में भेजने की आशंका है। पुलिस अब फर्मों के पंजीकरण, बैंक खातों, मोबाइल नंबरों और डिजिटल लेनदेन की जांच कर रही है। राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर दोनों आरोपियों के खिलाफ कुल 86 शिकायतें दर्ज होने की बात सामने आई है। इनमें शाहवेज के 11 बैंक खातों से जुड़ी शिकायतों में करीब 170 करोड़ रुपये की ठगी का उल्लेख है। सलमान के 2 खातों से जुड़ी 32 शिकायतों में करीब 16 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी बताई गई है।
पुलिस के मुताबिक आरोपियों का तरीका कई स्तरों पर लोगों को लालच देने वाला था। निवेश के नाम पर कम समय में रकम कई गुना करने का भरोसा दिलाया जाता था। ऑनलाइन गेमिंग और क्रिकेट मैच में सट्टे से मुनाफे का लालच देकर भी लोगों से पैसे मंगाए जाते थे। कुछ मामलों में डिजिटल अरेस्ट के नाम पर डराकर रकम ऐंठने की बात भी जांच में सामने आई है। पुलिस अब शिकायतों और बैंक खातों के विवरण का मिलान कर रही है। जांच एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि कथित ठगी से जुड़ी रकम किन खातों में गई और इस नेटवर्क में कितने लोग शामिल थे।
पुलिस जांच के अनुसार शाहवेज के खिलाफ 18 अगस्त को मुकदमा दर्ज होने के बाद लुकआउट नोटिस जारी किया गया था। इसके बाद उसके दुबई चले जाने की जानकारी सामने आई। बाद में पुलिस को उसके हैदराबाद में होने का पता चला और साइबर क्राइम टीम ने उसे वहां गिरफ्तार कर लिया। अदालत में पेश करने के बाद उसे 48 घंटे की ट्रांजिट रिमांड पर कानपुर लाया गया। पुलिस पूछताछ में मिली जानकारी के आधार पर सलमान को भी गिरफ्तार किया गया। अब जांच अधिकारी यह पता लगा रहे हैं कि दोनों आरोपी दुबई और दूसरे स्थानों पर किन लोगों के संपर्क में थे और क्या वहीं से नेटवर्क का संचालन किया जा रहा था।
पुलिस इस मामले को कानपुर में सामने आए बड़े साइबर और आर्थिक अपराधों की कड़ी से जोड़कर भी देख रही है। दिसंबर 2025 में रवींद्र सोनी की गिरफ्तारी के बाद करीब 1500 करोड़ रुपये की कथित ठगी का मामला सामने आया था। मई 2026 में महफूज अली उर्फ पप्पू छूरी की गिरफ्तारी 3200 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी के मामले में हुई थी। अब 5600 करोड़ की ठगी के आरोप में गिरफ्तार दोनों आरोपियों के नेटवर्क की पुराने मामलों से भी कड़ियां जोड़ी जा रही हैं। पुलिस बैंक खातों, फर्जी कंपनियों, डिजिटल लेनदेन और शिकायतों के आधार पर गिरोह के अन्य सदस्यों तक पहुंचने की कोशिश कर रही है।
अस्वीकरण (Disclaimer):
यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसियों और स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचना के उद्देश्य से किया गया है। 5600 करोड़ रुपये की ठगी से जुड़े आंकड़े पुलिस जांच और दर्ज शिकायतों पर आधारित हैं तथा मामले में आरोपों की अंतिम पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही होगी। किसी आरोपी को दोषी ठहराने का अधिकार सक्षम न्यायालय को है। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक किसी भी रूप में उत्तरदायी नहीं होंगे।
Author:अजय त्यागी
September 12, 2026: 6:27 PM
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