बायतु (बाड़मेर), राजस्थान। बायतु में डायलिसिस की सुविधा शुरू होने से किडनी रोगियों के लिए इलाज अब पहले के मुकाबले आसान होगा। उप जिला अस्पताल में हीमोडायलिसिस सेवा शुरू की गई है। प्रमुख चिकित्सा अधिकारी डॉ नरेंद्र चौधरी के अथक प्रयासों से शुरू हुई इस सुविधा का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्र के मरीजों को घर के पास बेहतर स्वास्थ्य सेवा देना है। अस्पताल के मुताबिक अब मरीजों को डायलिसिस के लिए बायतु से बाहर दूसरे स्थानों पर जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। इससे यात्रा में लगने वाला समय और परिवहन खर्च बचेगा। इसे स्थानीय स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए अहम कदम माना जा रहा है।
हीमोडायलिसिस किडनी की कार्यक्षमता बहुत कम होने पर खून साफ करने की प्रक्रिया है। इसमें मरीज का खून शरीर से बाहर निकालकर डायलाइजर नाम के विशेष फिल्टर से गुजारा जाता है। यह फिल्टर खून से अपशिष्ट पदार्थ और अतिरिक्त तरल हटाने में मदद करता है। इसके बाद साफ किया गया खून शरीर में वापस पहुंचाया जाता है। डायलिसिस मशीन इस पूरी प्रक्रिया में रक्त के प्रवाह और शरीर से निकाले जाने वाले तरल की मात्रा को नियंत्रित करती है। आम तौर पर सेंटर पर होने वाली हीमोडायलिसिस सप्ताह में 3 बार की जा सकती है और एक सत्र करीब 4 घंटे चलता है।

किडनी स्वस्थ रहने पर शरीर से अपशिष्ट और अतिरिक्त पानी निकालती है तथा खून में जरूरी खनिजों का संतुलन बनाए रखती है। जब किडनी यह काम पर्याप्त रूप से नहीं कर पाती तो शरीर में अपशिष्ट और तरल जमा होने लगते हैं। ऐसे मामलों में डॉक्टर मरीज की स्थिति देखकर डायलिसिस की सलाह दे सकते हैं। हीमोडायलिसिस किडनी फेल्योर का स्थायी इलाज नहीं है बल्कि यह किडनी के कुछ जरूरी कामों को संभालने में मदद करती है। उपचार के साथ मरीज को खानपान, दवाओं और तरल पदार्थों को लेकर डॉक्टर की सलाह का पालन करना पड़ सकता है।
बायतु में डायलिसिस शुरू होने का सबसे बड़ा फायदा बायतु और आसपास के ग्रामीण इलाकों के मरीजों को मिलने की उम्मीद है। पहले नियमित डायलिसिस की जरूरत वाले मरीजों को दूर के अस्पतालों तक जाना पड़ सकता था। इससे यात्रा का समय, आने जाने का खर्च और मरीज की शारीरिक परेशानी बढ़ती थी। अब उप जिला अस्पताल में ही सुविधा मिलने से इलाज तक पहुंच आसान होगी। अस्पताल के अनुसार यहां आधुनिक मशीनों के जरिए उच्च गुणवत्ता वाली डायलिसिस सेवा उपलब्ध कराई जाएगी। अनुभवी चिकित्सक और प्रशिक्षित पैरामेडिकल स्टाफ मरीजों की नियमित देखभाल करेंगे। स्वच्छ वातावरण और सुरक्षित चिकित्सा प्रक्रिया पर भी ध्यान रहेगा।

अस्पताल में नियमित डायलिसिस के साथ आपातकालीन डायलिसिस की सुविधा उपलब्ध कराने की भी बात कही गई है। इससे जरूरत के समय स्थानीय स्तर पर चिकित्सा सहायता मिलने में मदद हो सकती है। डायलिसिस के दौरान मरीज की स्थिति, रक्तचाप और उपचार से जुड़े दूसरे जरूरी मानकों पर निगरानी रखी जाती है। हालांकि हर मरीज के लिए उपचार की जरूरत और अवधि अलग हो सकती है। इसलिए डायलिसिस कितनी बार और कितनी देर करनी है इसका फैसला डॉक्टर ही करते हैं। बायतु में डायलिसिस की शुरुआत से स्थानीय मरीजों को इलाज के लिए लंबी दूरी तय करने से राहत मिलेगी और क्षेत्र की स्वास्थ्य सेवाएं मजबूत होंगी।
अस्वीकरण (Disclaimer):
यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसियों और स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचना के उद्देश्य से किया गया है। हीमोडायलिसिस की जरूरत, उपचार की अवधि और इसकी उपयुक्तता मरीज की चिकित्सकीय स्थिति पर निर्भर करती है इसलिए उपचार संबंधी कोई भी निर्णय संबंधित विशेषज्ञ चिकित्सक की सलाह से ही लिया जाना चाहिए। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक किसी भी रूप में उत्तरदायी नहीं होंगे।
Author:अजय त्यागी
September 12, 2026: 7:59 PM
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