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Rex TV India
Latest News प्रादेशिक Digital Newsletter 13 Sep 2026 · 9:40 AM

बाल श्रम पर शिकंजा, 800 बच्चे बचाए गए, 16,951 जगहों पर जांच

प्रतीकात्मक फोटो

कर्नाटक, भारत। बाल श्रम पर शिकंजा कसते हुए राज्य में व्यापक अभियान चलाया गया, जिसमें करीब 800 बच्चों को काम से मुक्त कराया गया। पुलिस और संबंधित विभागों ने 16,951 परिसरों की जांच की। अभियान के दौरान दुकानों, गैराज और दूसरे व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को भी जांच के दायरे में लिया गया। मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के निर्देश के बाद कार्रवाई तेज की गई। मुख्यमंत्री ने बेंगलुरु के यशवंतपुर एपीएमसी यार्ड के दौरे के दौरान बच्चों को काम करते देखा था। इसके बाद पूरे राज्य में बाल मजदूरी के खिलाफ व्यापक कार्रवाई के निर्देश दिए गए।  [1]

बचाव की मुहिम

अभियान में राज्य के 962 पुलिस थाना क्षेत्रों में कार्रवाई की गई। बेंगलुरु में सबसे बड़े स्तर पर जांच हुई, जहां 188 थाना क्षेत्रों के तहत 5,897 परिसरों की जांच की गई और 503 बच्चों को काम से मुक्त कराया गया। विजयपुर में 1,156 स्थानों की जांच में 72 बच्चे मिले। तुमकुरु में 33 और कोप्पल में 27 बच्चों को बचाया गया। कलबुर्गी शहर में 22, चिक्कबल्लापुर में 16, बल्लारी में 15 और चित्रदुर्ग में 13 बच्चे काम करते मिले। इन बच्चों को सुरक्षित वातावरण और आगे की सहायता उपलब्ध कराने की प्रक्रिया शुरू की गई।

अधिकारियों ने अभियान के दौरान यह भी देखा कि बाल मजदूरी की समस्या केवल बड़े शहरों तक सीमित नहीं है। मैसूरु शहर और बेलगावी समेत कई इलाकों में भी बच्चे काम करते मिले। कार्रवाई का उद्देश्य बच्चों को तत्काल काम से निकालने के साथ उनके पुनर्वास की व्यवस्था करना भी है। संबंधित विभागों को बच्चों की स्थिति का आकलन कर उन्हें शिक्षा और सुरक्षित माहौल से जोड़ने की जिम्मेदारी दी गई है। बाल श्रम पर शिकंजा कसने की इस मुहिम में पुलिस के साथ श्रम और बाल संरक्षण विभागों की भूमिका भी महत्वपूर्ण रही।

मालिकों पर केस

बच्चों को मजदूरी पर रखने वाले प्रतिष्ठानों के खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई शुरू की गई है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार विजयपुर में 3 और कोडागु में 2 एफआईआर दर्ज की गईं। कई मालिकों और प्रतिष्ठानों को कारण बताओ नोटिस भी जारी किए गए। प्रशासन का संदेश साफ है कि नाबालिगों से मजदूरी कराने वाले कारोबारियों पर कार्रवाई की जाएगी। बाल श्रम पर शिकंजा केवल छापेमारी तक सीमित नहीं रहने वाला है, बल्कि नियम तोड़ने वालों की जवाबदेही तय करने पर भी जोर दिया जा रहा है। इससे ऐसे प्रतिष्ठानों में बच्चों को काम पर रखने की प्रवृत्ति पर रोक लगाने की कोशिश होगी।

सरकार के लिए अब सबसे बड़ी चुनौती इन बच्चों को दोबारा मजदूरी में जाने से रोकना है। परिवारों की आर्थिक स्थिति, शिक्षा की उपलब्धता और बच्चों के पुनर्वास जैसे मुद्दे इस अभियान की अगली कड़ी होंगे। केवल काम से निकाल देना स्थायी समाधान नहीं माना जा सकता। बच्चों को स्कूल से जोड़ना और जरूरतमंद परिवारों को सहायता देना भी जरूरी होगा। राज्य में बाल श्रम पर शिकंजा अभियान ने बड़े पैमाने पर बच्चों को राहत दी है, लेकिन इसके असर को स्थायी बनाने के लिए लगातार निगरानी और पुनर्वास की जरूरत बनी रहेगी।

अस्वीकरण (Disclaimer):

यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसियों और स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचना के उद्देश्य से किया गया है। बाल श्रम से जुड़े मामलों में जांच और कानूनी कार्रवाई आगे बढ़ने के साथ आंकड़ों या स्थिति में बदलाव संभव है। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक किसी भी रूप में उत्तरदायी नहीं होंगे।

Rex TV India Author:अजय त्यागी September 13, 2026: 9:40 AM © 2026 Rex TV India Contact @ 91 6376887816 | rextvindia@gmail.com
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