गांधीनगर, गुजरात। जल मिशन में गड़बड़ी को लेकर नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक यानी CAG की रिपोर्ट ने गुजरात में योजना के क्रियान्वयन पर गंभीर सवाल उठाए हैं। रिपोर्ट में 2019-20 से 2023-24 के बीच जल जीवन मिशन के कामकाज की जांच की गई। ऑडिट में ठेकेदारों को अतिरिक्त भुगतान, ग्रामीण परिवारों के नल कनेक्शन में अंतर, पानी की गुणवत्ता और परियोजनाओं में देरी जैसी कमियां सामने आईं। रिपोर्ट के मुताबिक गुजरात में 73 करोड़ रुपये से ज्यादा का अतिरिक्त भुगतान हुआ। साथ ही कई जगह कागजों में कवरेज और जमीन पर उपलब्ध सुविधा के बीच अंतर पाया गया। [1]
गुजरात में 91.18 लाख ग्रामीण परिवारों को कार्यशील घरेलू नल कनेक्शन मिलने का दावा किया गया था। लेकिन CAG की जांच में 6 में से 4 परीक्षण किए गए जिलों में नवंबर 2024 तक 71,842 परिवारों के पास कार्यशील नल कनेक्शन नहीं मिले। जिला स्तर के आंकड़ों में अप्रैल 2024 तक 14.84 लाख परिवारों के कनेक्शन का इंतजार करने की जानकारी भी दर्ज थी। दूसरी तरफ राज्य के पोर्टल और वार्षिक योजना में अक्टूबर 2022 तक 100 प्रतिशत कवरेज बताया गया था। जल मिशन में गड़बड़ी का यह अंतर योजना के आंकड़ों की विश्वसनीयता पर सवाल खड़ा करता है।
पानी की उपलब्धता और गुणवत्ता की जांच भी की गई। 48 गांवों की भौतिक जांच में 29 गांवों में तय 55 लीटर प्रति व्यक्ति प्रतिदिन से अधिक पानी मिला। 14 गांवों में आपूर्ति 40 से 55 लीटर के बीच रही। 1 गांव में 40 लीटर से कम पानी मिला, जबकि 4 गांवों में पानी की आपूर्ति नहीं मिली। पानी की गुणवत्ता के मामले में 88 नमूनों की जांच की गई, जिनमें 78 स्वीकार्य मानकों पर खरे नहीं उतरे। इससे साफ है कि केवल नल कनेक्शन का दावा पर्याप्त नहीं है, बल्कि नियमित और सुरक्षित पानी की उपलब्धता भी जरूरी है।
जल मिशन में गड़बड़ी का दूसरा बड़ा पहलू वित्तीय भुगतान से जुड़ा है। CAG के मुताबिक गुजरात वाटर इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड और गुजरात वाटर सप्लाई एंड सीवरेज बोर्ड ने थोक मूल्य सूचकांक यानी WPI की गलत दरों का इस्तेमाल किया। इसके चलते ठेकेदारों को 54.32 करोड़ रुपये का अतिरिक्त भुगतान हुआ। इसके अलावा गलत GST दर लागू करने से 18.65 करोड़ रुपये का अतिरिक्त भुगतान सामने आया। दोनों मामलों को मिलाकर अतिरिक्त भुगतान 73 करोड़ रुपये से ज्यादा रहा। CAG ने भुगतान की गणना और दरों के इस्तेमाल में अधिक सावधानी बरतने की जरूरत बताई है।
परियोजनाओं की रफ्तार भी चिंता का कारण बनी। CAG ने 11 थोक पाइपलाइन परियोजनाओं की जांच की। इनमें 5 परियोजनाएं 8 से 25 महीने की देरी से पूरी हुईं, जबकि 6 परियोजनाएं दिसंबर 2024 तक जारी थीं। गुजरात वाटर सप्लाई एंड सीवरेज बोर्ड के 111 कार्यों में केवल 41 यानी 36.94 प्रतिशत काम दिसंबर 2024 तक पूरे हुए। इसके अलावा 248 गांवों की जलापूर्ति योजनाएं ग्राम कार्य योजना या ग्राम सभा के प्रस्ताव के बिना लागू की गईं। जल मिशन में गड़बड़ी से जुड़े इन निष्कर्षों के बीच CAG ने समय पर काम पूरा करने और सुरक्षित पानी की आपूर्ति सुनिश्चित करने पर जोर दिया है।
अस्वीकरण (Disclaimer):
यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसियों और स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचना के उद्देश्य से किया गया है। CAG की रिपोर्ट में दर्ज अनियमितताएं ऑडिट निष्कर्ष हैं और इनके आधार पर किसी व्यक्ति या संस्था को दोषी ठहराने का निष्कर्ष नहीं निकाला जाना चाहिए। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक किसी भी रूप में उत्तरदायी नहीं होंगे।
Author:अजय त्यागी
September 13, 2026: 9:48 AM
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